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संशोधित प्रणाली के अनुसार तत्काल प्रभाव से समाचार रेटिंग जारी करे बार्क: केंद्र

सरकार का यह क़दम अक्टूबर 2020 में कथित टीआरपी घोटाले के बाद रेटिंग के निलंबन के साल भर बाद आया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीआरपी सेवाओं के उपयोग के लिए ‘रिटर्न पाथ डेटा’ क्षमताओं का लाभ उठाने पर विचार के लिए प्रसार भारती के सीईओ की अध्यक्षता में एक ‘कार्य समूह’ का गठन भी किया है.

(फोटो साभार: विकीपीडिया)

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को भारतीय प्रसारणकर्ताओं के संगठन बार्क से कहा कि वह तत्काल प्रभाव से समाचार रेटिंग जारी करे.

दरअसल, ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस एंड रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने कहा था कि उसने प्रोटोकॉल और तंत्र में बदलाव के लिए कदम उठाए हैं.

अक्टूबर 2020 में कथित टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स) घोटाला विवाद के बाद टेलीविजन समाचार रेटिंग के निलंबन के एक साल बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.

मंत्रालय ने बार्क को तत्काल प्रभाव से समाचार रेटिंग जारी करने और पिछले तीन महीनों के आंकड़े मासिक रूप में जारी करने कहा है, ताकि वास्तविक रुझानों का निष्पक्ष और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके.

मंत्रालय ने एक बयान में कहा गया कि संशोधित प्रणाली के अनुसार समाचार और अन्य प्रारूप की रिपोर्टिंग चार सप्ताह के रोलिंग औसत पर होगी.

मंत्रालय ने टीआरपी सेवाओं के उपयोग के लिए ‘रिटर्न पाथ डेटा’ (आरपीडी) क्षमताओं का लाभ उठाने पर विचार के लिए प्रसार भारती के सीईओ की अध्यक्षता में एक ‘कार्य समूह’ का गठन किया है.

इसकी अनुशंसा भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) और टीआरपी रेटिंग समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में की थी.

संयुक्त कार्य समूह में अध्यक्ष के रूप में प्रसार भारती के सीईओ एसएस वेम्पति और पांच सदस्य होंगे. इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो, बार्क और ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन से एक-एक सदस्य और डीटीएच एसोसिएशन के अध्यक्ष हरित नागपाल होंगे.

समूह वर्तमान रेटिंग के तरीके में सामान्य प्रोटोकॉल, डेटा मानकों और संशोधनों को तय करेगा ताकि आरपीडी सक्षम एसटीबीएस के डेटा को वर्तमान टीवी रेटिंग सिस्टम में एकीकृत किया जा सके.

टीआरपी कमेटी की रिपोर्ट और 24 अप्रैल, 2020 की ट्राई की सिफारिश में यह शामिल है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) ने अपनी प्रक्रिया, प्रोटोकॉल, निगरानी तंत्र में संशोधन किया है और शासन संरचना में भी बदलाव शुरू किए हैं.

इस मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इंडिया टीवी के प्रमुख संपादक और न्यूज ब्राडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) के अध्यक्ष रजत शर्मा ने कहा, ‘मंत्रालय ने खामियों का संज्ञान लेकर और रेटिंग जारी करने के लिए समयसीमा निर्धारित करने समेत सुधार की गुंजाइश पर मुहर लगाकर एनबीडीए के रुख को न्यायोचित ठहराया है.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक आधिकारिक आदेश में मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त कार्य समूह दर्शकों की माप, अंतरराष्ट्रीय प्राक्टिस, दर्शकों के डेटा की सुरक्षा आदि के संदर्भ में आरपीडी सहित डेटा कैप्चरिंग के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा.

इसमे कहा है कि, ‘समूह सफल वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास का अध्ययन कर सकता है. आरपीडी कनाडा की तरह भारत में बीएआरसी द्वारा किए गए मॉडल/पायलट और डीटीएच ऑपरेटरों और अन्य संबंधित हितधारकों द्वारा अन्य स्वतंत्र प्रयोग और आरपीडी सहित डेटा स्रोतों के संयोजन के लिए एक जनादेश तैयार कर सकता है, यदि ऐसा मौजूदा नमूना पद्धति के साथ तय किया गया है.’

समूह आरपीडी सक्षम एसटीबीएस, एसओपी के प्रमाणन और ऑडिट के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करेगा. यह वर्तमान रेटिंग पद्धति में सामान्य प्रोटोकॉल, डेटा मानकों और संशोधनों को निर्दिष्ट करेगा ताकि आरपीडी सक्षम एसटीबीएस के डेटा को वर्तमान टीवी रेटिंग सिस्टम में एकीकृत किया जा सके.

मंत्रालय ने कहा, ‘इसके अलावा वर्तमान टीवी रेटिंग में एकीकरण के लिए उपरोक्त प्रस्तावित आरपीडी प्रणाली को बढ़ाने के लिए किसी भी स्मार्ट फोन-आधारित ऐप के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करें. प्रमाणन और ऑडिट के लिए एसओपी के लिए भी मानक निर्धारित करें.’

आरपीडी/स्मार्ट फोन-आधारित डेटा संग्रह सहित इस तरह के विभिन्न डेटा सेटों की कीमत/लागत को टीवी रेटिंग सिस्टम के ढांचे के भीतर कैसे साझा किया जाएगा, इस पर समूह एक आम सहमति विकसित करेगा.

यह ऐसे सभी डेटा संग्रह और टीवी रेटिंग के भीतर उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सहमति-आधारित गोपनीयता ढांचे को निर्धारित करेगा और इसके लिए जिम्मेदारी के बिंदुओं को निर्धारित करते समय सभी हितधारकों का मार्गदर्शन करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के साथ उपरोक्त के रोलआउट के लिए समयसीमा स्थापित करेगा.

संयुक्त कार्य समूह के लिए सचिवालय प्रसार भारती द्वारा प्रदान किया जाएगा. यदि आवश्यक हो, तो समूह अपने विचार-विमर्श के लिए किसी भी विशेषज्ञ (विशेषज्ञों) और हितधारकों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित कर सकता है.

समूह इस आदेश के जारी होने की तारीख से चार महीने के भीतर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा.

बता दें कि टीआरपी घोटाला अक्टूबर 2020 में उस समय सामने आया था, जब टीवी चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग जारी करने वाली बार्क ने हंसा रिसर्च एजेंसी के माध्यम से रिपब्लिक टीवी सहित कुछ चैनलों के खिलाफ टीआरपी में धांधली करने की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने इस कथित घोटाले की जांच शुरू की थी.

मुंबई के पुलिस आयुक्त ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी सहित कुछ चैनलों ने टीआरपी के साथ हेराफेरी की है.

एफआईआर में बार्क और रिपब्लिक टीवी के कर्मचारियों के भी नाम थे. मुंबई पुलिस कथित तौर पर टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले में फख्त मराठी, बॉक्स सिनेमा, न्यूज नेशन, महामूवीज और वॉव म्यूजिक जैसे अन्य चैनलों की भूमिका की भी जांच कर रही थी.

इस मामले में मुंबई पुलिस ने गोस्वामी और दासगुप्ता के बीच वॉट्सऐप चैट जारी की थी, जिसमें दोनों ने प्रतिद्वंद्वी चैनलों के बारे में बात की और रिपब्लिक से बेहतर प्रदर्शन कर रहे उन चैनलों को लेकर निराशा जताई.

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज पूरक चार्जशीट के अनुसार ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) इंडिया के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता ने मुंबई पुलिस को दिए हाथ से लिखे एक बयान में दावा किया है कि उन्हें टीआरपी से छेड़छाड़ करने के बदले रिपब्लिक चैनल के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी से तीन सालों में दो फैमिली ट्रिप के लिए 12,000 डॉलर और कुल चालीस लाख रुपये मिले थे.

इस मामले के सामने आने के बाद बार्क ने समाचार चैनलों की रेटिंग को अस्थायी रूप से 12 सप्ताह के लिए निलंबित करने की घोषणा की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)