हेट स्पीच: अलीगढ़ में प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ पर डीएम और एसपी से एहतियाती कार्रवाई का आग्रह

22-23 जनवरी को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ‘सनातन धर्म संसद’ के आयोजन का ऐलान किया गया है. बीते दिसंबर महीने में हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित ऐसे ही धर्म संसद कार्यक्रमों में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर नफ़रत भरे भाषण देने के साथ उनके नरसंहार का आह्वान किया गया था.

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उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

22-23 जनवरी को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ‘सनातन धर्म संसद’ के आयोजन का ऐलान किया गया है. बीते दिसंबर महीने में हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित ऐसे ही धर्म संसद कार्यक्रमों में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर नफ़रत भरे भाषण देने के साथ उनके नरसंहार का आह्वान किया गया था.

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: बीते महीने कुछ शहरों में क​ट्टरपंथी हिंदुत्वावादी लोगों द्वारा किए गए आयोजनों के दौरान मुस्लिमों के खिलाफ कथित तौर पर नफरत भरे भाषण और उनके नरसंहार का आह्वान करने के मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं दायर करने वालों ने अलीगढ़ जिलाधिकारी को पत्र लिखकर उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कार्रवाई करने का आग्रह किया है कि शहर में प्रस्तावित ऐसे ही एक कार्यक्रम में उस तरह के भाषण न दिए जाएं, जैसा कि हरिद्वार में हुई ‘धर्म संसद’ में दिए गए थे.

उच्चतम न्यायालय ने बीते 12 जनवरी को केंद्र, दिल्ली पुलिस और उत्तराखंड पुलिस से उस याचिका पर जवाब देने को कहा था जिसमें हाल में हरिद्वार और राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दो कार्यक्रमों (धर्म संसद) के दौरान कथित रूप से मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी.

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता इस तरह की घटनाओं के संबंध में संबंधित स्थानीय अधिकारियों को एक प्रतिवेदन देने के लिए स्वतंत्र हैं.

पीठ ने यह बात याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा यह बताए जाने के बाद कही थी कि एक ‘धर्म संसद’ अलीगढ़ में होने वाली है.

सिब्बल ने दलील दी थी कि कुछ और आयोजनों की योजना है, जिनमें भड़काऊ भाषण दिए जाने की आशंका है.

याचिकार्ताओं ने उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रदान की गई स्वतंत्रता के अनुसार अलीगढ़ के जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि 22-23 जनवरी को अलीगढ़ में अब एक और ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उन लोगों के फिर से भाषण देने की आशंका है, जिन्होंने पिछले साल 17-19 दिसंबर के बीच हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया था.

पत्र में कहा गया है, ‘भीड़ हिंसा की किसी भी संभावित घटना से बचने के लिए एहतियाती उपाय करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है और आप अलीगढ़ में प्रशासन के प्रभारी हैं, इसलिए इस तरह के भाषण न दिए जाएं, यह सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कार्रवाई करने की जिम्मेदारी आपके ऊपर है.’

गौरतलब है कि ‘सनातन हिंदू सेवा संस्थान’ ने आगामी 22-23 जनवरी को अलीगढ़ के नौरंगाबाद स्थित सनातन भवन में ‘सनातन धर्म संसद’ के आयोजन का ऐलान किया है. हालांकि, जिला प्रशासन ने ऐसे किसी भी कार्यक्रम की जानकारी होने से इनकार किया है.

इसके अलावा ‘धर्म संसद’ कार्यक्रमों पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर इस महीने प्रस्तावित इस तरह के कई कार्यक्रमों में भड़काऊ भाषणों पर रोक लगाने के लिए निवारक कदम उठाने का अनुरोध किया है.

सिब्बल ने अपने पत्रों की प्रतियां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों, गृह सचिवों और पुलिस प्रमुखों के अलावा अलीगढ़ तथा हरिद्वार के पुलिस अधीक्षकों को भेजी हैं. इसकी प्रति चुनाव आयोग को भी भेजी गई है.

सिब्बल ने अलीगढ़ और हरिद्वार के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर इस तरह के आयोजनों को रोकने के लिए धारा 144 लागू करने सहित अन्य निवारक उपाय करने का आग्रह किया है.

सिब्बल ने अपने पत्र में लिखा, ‘हम विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच हैं, हम किसी भी व्यक्ति पर अपनी मंशा नहीं थोपना चाहते, लेकिन अगर चुनाव के बीच इस तरह के भाषण दिए जाते हैं, तो वे सामाजिक व्यवस्था को अस्थिर कर देंगे और इसका देश की राजनीति पर गंभीर परिणाम पड़ेगा.’

सिब्बल ने अपने पत्र में आगे कहा, ‘हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप अपनी शक्तियों के तहत ऐसे निवारक कदम उठाएं, जो आवश्यक हैं, जिसमें आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144 और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम,1980 की धारा 3 और 5 शामिल हैं.’

जमीयत ने चुनाव आयोग से प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ पर रोक लगाने का आग्रह किया

इस बीच देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि अलीगढ़ में अगले सप्ताह प्रस्तावित ‘धर्म संसद’ पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इस आयोजन का मकसद चुनावों के सांप्रदायिक आरोप-प्रत्यारोप को सार्वजनिक विमर्श में लाना है.

संगठन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी की ओर से आयोग के समक्ष ऑनलाइन प्रतिवेदन देकर इस आयोजन पर रोक लगाने की मांग की गई है.

जमीयत का कहना है कि उसने अलीगढ़ के जिलाधिकारी से भी यह आग्रह किया है.

इस मुस्लिम संगठन ने अपने प्रतिवेदन में इस बात का उल्लेख भी किया कि पिछले दिनों हरिद्वार में हुई ‘धर्म संसद’ में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए जाने के मामले में उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है.

उसने कहा कि विधानसभा चुनावों के समय ऐसे आयोजनों पर रोक लगाई जानी चाहिए.

इससे पहले अलीगढ़ के कुछ स्थानीय नागरिकों ने सरकार से प्रस्तावित धर्म संसद के आयोजन को रोकने की मांग की थी.

मालूम हो कि उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर 2021 के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित तौर पर खुलकर नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

कट्टर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद इस धर्म संसद के आयोजकों में से एक थे. नरसिंहानंद पहले ही नफरत भरे भाषण देने के लिए पुलिस की निगाह में हैं.

यति नरसिंहानंद ने मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा था कि वह ‘हिंदू प्रभाकरण’ बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये देंगे.

मामले में 15 लोगों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.

इस आयोजन का वीडियो वायरल होने पर मचे विवाद के ​बाद 23 दिसंबर 2021 को इस संबंध में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था.

प्राथमिकी में 25 दिसंबर 2021 को बिहार निवासी स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडेय के नाम जोड़े गए. पूजा शकुन पांडेय निरंजिनी अखाड़े की महामंडलेश्वर और हिंदू महासभा के महासचिव हैं.

इसके बाद बीते एक जनवरी को इस एफआईआर में यति नरसिंहानंद और रूड़की के सागर सिंधुराज महाराज का नाम शामिल किया गया था.

बीती दो जनवरी को राज्य के पुलिस महानिदेशक ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया था. उसके बाद बीते तीन जनवरी को धर्म संसद के संबंध में 10 लोगों के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की गई थी.

दूसरी एफआईआर में कार्यक्रम के आयोजक यति नरसिंहानंद गिरि, जितेंद्र नारायण त्यागी (जिन्हें पहले वसीम रिज़वी के नाम से जाना जाता था), सागर सिंधुराज महाराज, धरमदास, परमानंद, साध्वी अन्नपूर्णा, आनंद स्वरूप, अश्विनी उपाध्याय, सुरेश चव्हाण और प्रबोधानंद गिरि को नामजद किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)