राजनीति

मध्य प्रदेश में ‘हिजाब’ पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है: सरकार

मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बीते आठ फरवरी को कहा था कि हिजाब ड्रेस का हिस्सा नहीं है, इसलिए इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए. राज्य के स्कूलों में ड्रेस कोड लागू किया जाएगा, ताकि सभी स्कूली विद्यार्थियों में समानता की भावना सुनिश्चित की जा सके.

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार. (फोटो साभार: फेसबुक/@InderSinghBJP)

भोपाल: कर्नाटक में कॉलेजों में हिजाब को लेकर उपजे विवाद के कुछ अन्य राज्यों में जोर पकड़ने के बीच मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार ने बुधवार को कहा कि राज्य के शिक्षण संस्थानों में ‘हिजाब’ पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.

हालांकि, एक दिन पहले ‘हिजाब’ पर प्रतिबंध का समर्थन करने और प्रदेश के स्कूलों में ‘यूनिफॉर्म कोड’ (वर्दी) लागू करने का बयान देने वाले राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा, ‘कुछ लोगों ने मेरे इस बयान का गलत अर्थ निकालकर गलत संदर्भ में देश के सामने रखा है.’

शिक्षा मंत्री परमार ने एक वीडियो बयान में कहा, ‘कल (मंगलवार) मेरे द्वारा स्कूलों में ड्रेस को लेकर एक बयान जारी किया गया था. मेरा बयान स्कूलों में समानता, अनुशासन और स्कूल की पहचान के संदर्भों में था. इसलिए मैंने (मध्य प्रदेश में) यूनिफॉर्म कोड लागू करने के विषय पर बोला था.’

परमार ने कहा, ‘परंतु कुछ लोगों ने उसका गलत अर्थ निकालकर गलत संदर्भ में पूरे देश के सामने इसे रखा है. मैं उसका खंडन करता हूं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘फिलहाल हम नया यूनिफॉर्म कोड लागू नहीं करेंगे, न ही उस पर कोई काम हो रहा है. परंपरागत रूप से जैसी व्यवस्था चल रही है, ऐसी व्यवस्था ही स्कूलों में गणवेश को लेकर रहेगी.’

एक दिन पहले बीते आठ फरवरी को इंदर सिंह परमार ने भोपाल में मीडिया से कहा था, ‘हिजाब यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है, इसलिए मैं समझता हूं कि उस पर पाबंदी लगनी चाहिए. मध्य प्रदेश में स्कूलों में यूनिफॉर्म कोड के अनुसार ही बच्चों को आना होगा. अगले शैक्षणिक सत्र से ‘ड्रेस कोड’ पूरी तरह लागू किया जाएगा.’

यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य के शिक्षण संस्थानों में इस पोशाक (हिजाब) पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, उन्होंने कहा था कि अगर स्कूलों में हिजाब पहनकर कोई आया तो यहां भी इस पर प्रतिबंध लगाया जाएगा.

इधर, कर्नाटक में स्कूल एवं कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर जारी विवाद पर किए गए सवालों के जवाब में प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘मध्य प्रदेश में हिजाब (पहनने) को लेकर कोई विवाद नहीं है. हिजाब को लेकर कोई प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. इसलिए कोई भ्रम की स्थिति न रहे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘कर्नाटक, जहां यह विवाद है, वहां पर भी यह पूरा मामला उच्च न्यायालय में लंबित है.’ मिश्रा मध्य प्रदेश सरकार के प्रवक्ता भी हैं.

हिजाब पर चल रहे विवाद को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को कहा कि कर्नाटक के विद्यालयों में हिजाब पहनने की जिद करके वहां धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास किया जा रहा है. विद्यालय का अपना ड्रेस कोड है और उसका कड़ाई से पालन होना चाहिए.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘विद्यालय ज्ञान के लिए है न कि धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए. कर्नाटक के विद्यालयों में हिजाब पहनने की जिद करके वहां धार्मिक उन्माद फैलाने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह अनुचित है. विद्यालय का अपना ड्रेस कोड है और उसका कड़ाई से पालन होना चाहिए.’

वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने कहा कि कर्नाटक हिजाब विवाद ने राजनीतिक और सांप्रदायिक मोड़ ले लिया है. इसे रोकने के लिए विपक्ष के नेताओं को इस मुद्दे पर अपनी टिप्पणी बंद करनी चाहिए.

वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने ट्वीट किया, ‘कर्नाटक हिजाब विवाद ने राजनीतिक और सांप्रदायिक मोड़ ले लिया है. इसे रोकने के लिए विपक्ष के नेताओं को इस मुद्दे पर अपनी टिप्पणी बंद करनी चाहिए, जबकि राज्य सरकार को जल्द ही शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता और आम नागरिकों के अधिकारों पर विचार करते हुए एक समाधान पर पहुंचना चाहिए.’

बता दें कि कर्नाटक में उडुपी के कई सरकारी कॉलेजों में हिजाब और बुर्का पहनकर आने वाली छात्राओं को प्रवेश करने से रोकने संबंधी घटनाएं सामने आई हैं.

हाल ही में भाजपा सरकार ने एक आदेश पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि छात्र केवल यूनिफॉर्म पहनें, जबकि कई मुस्लिम छात्राएं कई सालों से हिजाब पहन रही हैं.

उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज की पांच छात्राओं ने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दाखिल कर हिजाब पर पाबंदियों को चुनौती दी है.

कर्नाटक हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्कूल और कॉलेज परिसर में हिजाब पर पाबंदी से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए बुधवार को इस मामले को बड़ी पीठ के समक्ष भेज दिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)