राजनीति

कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय कांग्रेस की नहीं, वीपी सिंह की सरकार थी: शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में दिखाया गया है कि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि ऐसा नहीं है. यह बाद दोहराते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि उस समय कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और हत्याओं की भाजपा ने निंदा तक नहीं की थी.

Mumbai: NCP President Sharad Pawar gestures as he speaks during an exclusive interview with PTI, at his residence in Mumbai, Saturday, March 16, 2019. (PTI Photo) (Story No. BMM1) (PTI3_16_2019_000097B)

शरद पवार. (फोटो: पीटीआई)

पुणे/मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने रविवार को कहा कि घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में दिखाया गया है कि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि ऐसा नहीं है और उस वक्त वीपी सिंह की सरकार थी.

पवार ने दावा किया कि वीपी सिंह की सरकार को भाजपा के कुछ सदस्यों का समर्थन हासिल था. पवार ने कहा कि भाजपा की ही मदद से मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृह मंत्री बने थे.

राकांपा नेता ने पुणे के बारामती में पत्रकारों से कहा कि जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन का कांग्रेस से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था.

पवार ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी को दोषी ठहराने के लिए यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है जब यह सब कुछ हुआ तब कांग्रेस देश पर शासन कर रही थी, लेकिन अगर हम इसका अध्ययन करें, तो यह (कश्मीरी पंडितों का पलायन) तब हुआ जब विश्वनाथ प्रताप सिंह देश का नेतृत्व कर रहे थे. अब इस मुद्दे पर हल्ला मचा रही भाजपा के कुछ लोग उस समय सिंह का समर्थन कर रहे थे.’

पवार ने कहा, ‘मुफ्ती मोहम्मद सईद जो उस समय केंद्रीय गृह मंत्री थे, उन्हें भाजपा की मदद से यह पद मिला था. साथ ही, तत्कालीन राज्यपाल (जगमोहन) का कांग्रेस से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पवार ने कहा कि समाज को बांटने वाले लेखन या फिल्म से बचना चाहिए.

विवेक अग्निहोत्री द्वारा लिखित और निर्देशित ‘द कश्मीर फाइल्स’ पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की ओर से कश्मीरी पंडितों की सुनियोजित हत्याओं के बाद कश्मीर से समुदाय के पलायन को दर्शाती है.

बीते 11 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म को लेकर राजनीतिक दलों में बहस छिड़ गई है.

मालूम हो कि फिल्म को भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है और सभी भाजपा शासित राज्यों में या तो फिल्म को कर-मुक्त घोषित कर दिया गया है या सरकारी कर्मचारियों को फिल्म देखने के लिए विशेष अवकाश दिया जा रहा है. इस बीच विपक्ष ने फिल्म को एकतरफा और बेहद हिंसक बताया है.

भाजपा के विरोधियों पर तीखा हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए 15 मार्च को कहा था कि ऐसी फिल्में बनती रहनी चाहिए, क्योंकि ये सच को समाने लेकर आती हैं.

उन्होंने कहा था, ‘इन दिनों द कश्मीर फाइल्स की खूब चर्चा हो रही है. जो लोग हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी के झंडे लेकर घूमते हैं, वह पूरी जमात बौखला गई है.’

पीएम ने कहा, ‘तथ्यों के आधार पर इसकी विवेचना करने के बजाय, इसको बदनाम करने के लिए एक मुहिम चलाई जा रही है. यह पूरा इकोसिस्टम… अगर कोई सत्य उजागर करने का साहस करें… तो बौखला जाता है. वह वही प्रस्तुत करने की कोशिश करते हैं, जिसे वह सत्य मानते हैं. पिछले चार-पांच दिनों से यही कोशिश हो रही है कि लोग सत्य को न देख सकें.’

फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज़ के बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय इसके निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को सीआरपीएफ की वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है.

भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए ‘कश्मीर फाइल्स’ का प्रचार कर रही: संजय राउत

शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गुजरात और राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का प्रचार करने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में कई ‘कड़वी सच्चाइयों’ को दबाने का प्रयास किया गया है.

राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक कॉलम ‘रोकटोक’ में लिखा कि कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी सुनिश्चित करना भाजपा का वादा था, लेकिन अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बावजूद ऐसा नहीं हुआ है. शिवसेना सांसद ने जानना चाहा कि यह किसकी नाकामी है.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘द कश्मीर फाइल्स’ का मुख्य प्रचारक भी करार दिया. भाजपा पर निशाना साधते हुए राउत ने सवाल किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत में शामिल करने के पार्टी के वादे का क्या हुआ.

राउत ने कहा, ‘कश्मीर से हिंदू पंडितों के पलायन, उनकी हत्याओं, उन पर किए गए अत्याचारों और उनके गुस्से पर आधारित फिल्म परेशान करती है. लेकिन इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि फिल्म के जरिये हिंदू-मुसलमानों को फिर से बांटने और चुनाव जीतने का प्रयास किया जा रहा है.’

राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ को गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों को जीतने के मकसद से प्रदर्शित किया गया है.

राउत ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्में बननी चाहिए, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी फिल्मों का एजेंडा अब राजनीतिक विरोधियों के बारे में नफरत और भ्रम फैलाना हो गया है.

उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्माताओं ने पहले ‘द ताशकंद फाइल्स’ का निर्माण किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि इस फिल्म के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की गई थी कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के लिए केवल गांधी परिवार जिम्मेदार था.

शिवसेना नेता ने दावा किया कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ में सच्ची घटनाओं को दिखाते हुए कई कटु सत्यों को दबाने की कोशिश की गई है.

उन्होंने कहा, ‘32 साल पहले कश्मीर का माहौल न केवल कश्मीरी पंडितों के लिए, बल्कि सभी के लिए खराब था. हालांकि, कश्मीरी पंडित इससे सबसे ज्यादा प्रभावित थे.’

राउत ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के अलावा उस समय कश्मीर में मारे गए लोगों में कश्मीरी सिख और मुसलमान भी शामिल थे.

उन्होंने कहा कि कश्मीर में पहली राजनीतिक हत्या अगस्त 1989 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद यूसुफ हलवाई की हुई थी और इससे पहले पुलिस महानिरीक्षक पर हमला हुआ था, जिसमें अधिकारी का अंगरक्षक मारा गया था.

राउत ने आरोप लगाया कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ में ऐसे कई सच छिपाए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि आजादी के 43 साल बाद तक कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से भागने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा था.

शिवसेना नेता ने कहा कि 1990 में जब कश्मीरी पंडितों और सिखों को कश्मीर छोड़ना पड़ा, तब केंद्र में भाजपा समर्थित वीपी सिंह की सरकार थी.

राउत ने कहा, ‘भाजपा नेता जगमोहन उस समय कश्मीर के राज्यपाल थे. ‘द कश्मीर फाइल’ उस समय ठंडे बस्ते में थी, जब घाटी में हिंदू मर रहे थे और भाग रहे थे.’

उन्होंने दावा किया कि उस समय केवल शिवसेना के दिवंगत संस्थापक बाल ठाकरे कश्मीरी पंडितों के हक की आवाज उठा रहे थे.

राउत ने भाजपा से सवाल किया कि मार्च 2015 में उसने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार कैसे बनाई, ‘जिसने आतंकियों से हाथ मिलाया था.’

उन्होंने कहा, ‘इन लोगों (भाजपा) ने उस समय कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और हत्याओं की निंदा तक नहीं की.’

शिवसेना नेता ने यह भी पूछा कि उस सरकार में शामिल भाजपा के मंत्री तब चुप क्यों थे, जब पीडीपी ने 2001 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ करार दिया था और सुरक्षाबलों द्वारा आतंकी बुरहान वानी को मार गिराए जाने पर सवाल उठाए थे.

उन्होंने कहा कि बाल ठाकरे ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के बच्चों के लिए महाराष्ट्र में चिकित्सा और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में पांच फीसदी आरक्षण सुनिश्चित किया था, लेकिन भाजपा शासित राज्यों ने ऐसा निर्णय क्यों नहीं लिया.

वर्ष 2019 के पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि सुरक्षाबल भले ही ‘पंडित’ नहीं थे, लेकिन यह किसकी गलती थी कि उन्हें इस हमले में अपनी जान गंवानी पड़ी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)