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असम: साहित्य व छात्र संगठनों की अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बनाने का फ़ैसला वापस लेने की मांग

बीते दिनों राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि शैक्षणिक वर्ष 2023 से सभी सरकारी और प्रांतीय असमिया और अन्य स्थानीय माध्यम के स्कूलों में कक्षा तीन से गणित और विज्ञान अंग्रेज़ी में पढ़ाए जाएंगे. साहित्य व छात्र संगठनों का कहना है कि हालिया आदेश मातृभाषा में पढ़ाई कराने वाले स्कूलों और अंतत: असमी, बोडो व राज्य की अन्य भाषाओं के लिए मौत का फ़रमान साबित होंगे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

गुवाहाटी: असम के शीर्ष साहित्य और छात्र संगठनों ने सोमवार को राज्य सरकार से अपने उस हालिया आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की, जिसके तहत वर्नाक्युलर (स्थानीय भाषा) माध्यम के स्कूलों में कक्षा तीन से विज्ञान और गणित जैसे विषयों की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में कराने का निर्देश दिया गया है.

गौरतलब है कि वर्नाक्युलर माध्यम के स्कूलों में शिक्षा का माध्यम स्थानीय या मातृभाषा होती है.

साहित्य और छात्र संगठनों ने शिक्षा क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा लिए गए अन्य फैसलों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें सरकारी स्कूलों में दोहरे माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था लागू करना, शैक्षणिक संस्थानों के प्रांतीयकरण को रोकना और राज्य बोर्ड के तहत आने वाले स्कूलों को सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के अधीन स्थानांतरित करना शामिल है.

असम साहित्य सभा (एएसएस), बोडो साहित्य सभा (बीएसएस), अखिल असम छात्र संघ (एएएसयू) और अखिल बोडो छात्र संघ (एबीएसयू) के नेतृत्व ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में लिए गए हालिया फैसलों को वापस लेने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को जल्द एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा जाएगा.

शिक्षक एवं छात्र संगठनों के बीच हुई चर्चा के बाद एएएसयू के प्रमुख सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम सरकार के हालिया फैसलों के खिलाफ कड़ा एतराज जताते हैं. हम चाहते हैं कि सरकार इन फैसलों पर पुनर्विचार करे और इन्हें तत्काल वापस ले.’

भट्टाचार्य ने आरोप लगाया, ‘हमें लगता है कि ये आदेश मातृभाषा में पढ़ाई कराने वाले स्कूलों और अंतत: असमिया, बोडो व राज्य की अन्य भाषाओं के लिए मौत का फरमान साबित होंगे. लिहाजा हम इन फैसलों को रद्द करने की अपनी मांग को लेकर एक संयुक्त ज्ञापन सौंपेंगे.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्य मंत्रिमंडल ने 28 जुलाई को फैसला किया था कि शैक्षणिक वर्ष 2023 से सभी सरकारी और प्रांतीय असमिया और अन्य स्थानीय माध्यम के स्कूलों में कक्षा तीन से अंग्रेजी में गणित और विज्ञान पढ़ाया जाएगा.

इसने राज्य सरकार के तहत असमिया और स्थानीय भाषा के स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक शिक्षा के दोहरे माध्यम की शुरुआत को भी मंजूरी दी.

इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि भूगोल और इतिहास स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषयों के रूप में सामाजिक अध्ययन की जगह लेंगे.

सरकार ने पहले कहा था कि स्कूलों और कॉलेजों के प्रांतीयकरण को भी रोका जाएगा, जबकि वर्तमान में राज्य बोर्ड के तहत चयनित हाई स्कूलों को सीबीएसई में स्थानांतरित किया जाएगा.

अंग्रेजी में गणित और विज्ञान के शिक्षण का विरोध करते हुए भट्टाचार्य ने कहा, ‘यह सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया जाता है कि मातृभाषा इन विषयों को सीखने के लिए सबसे अच्छी भाषा है, खासकर प्राथमिक स्तर पर. यहां तक ​​कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भी यह कहा है.’

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘सरकार का यह औचित्य कि वे इस निर्णय के माध्यम से छात्रों की अंग्रेजी भाषा पर पकड़ बनाना चाहते हैं, स्वीकार्य नहीं है. अगर वे अंग्रेजी में सुधार करना चाहते हैं, तो उस भाषा को ठीक से पढ़ाने पर जोर देना चाहिए.’

भट्टाचार्य ने कहा कि चारों संगठन प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के शिक्षकों के साथ विचार-विमर्श करेंगे और साथ ही इन मुद्दों पर विभिन्न जनजातियों के नेताओं के साथ अलग-अलग चर्चा करेंगे.

आसू नेता ने कहा, ‘हम जल्द ही इन मामलों पर चर्चा के लिए एक शैक्षिक सम्मेलन का आयोजन करेंगे.’

एबीएसयू के अध्यक्ष द्विपेन बोडो ने कहा कि यदि गणित और विज्ञान अंग्रेजी में पढ़ाया जाता है, तो इससे स्थानीय भाषा के स्कूलों के छात्र अंग्रेजी भाषा में तीन विषयों के लिए और केवल तीन अन्य शिक्षा के मूल माध्यम में उपस्थित होंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह तर्क कि इसकी आवश्यकता थी ताकि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें, असमिया, बोडो और अन्य माध्यम के स्कूलों के विद्यार्थियों ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है.

एएसएस अध्यक्ष कुलधर सैकिया ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘सरकार को छात्रों के लिए सर्वोत्तम सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए और छात्रों को ठीक से सीखने के लिए माहौल बनाना चाहिए.’

बीएसएस प्रमुख टोरेन बोडो ने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों के प्रांतीयकरण को रोकने का निर्णय जनवरी 2020 में हस्ताक्षरित बोडो समझौते के खिलाफ था.

उन्होंने कहा कि बीएसएस और एबीएसयू सरकार के फैसले के बारे में जनता से संपर्क करेंगे और अगर लोग चाहें तो इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे.

सत्र मुक्ति संग्राम समिति ने भी सरकार के इन हालिया फैसलों पर अपना विरोध जताया है.

कांग्रेस के देवव्रत सैकिया, जो राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, रायजोर दल और असम जातीय परिषद सहित विपक्षी राजनीतिक दलों और नेताओं ने कैबिनेट के फैसलों, विशेष रूप से अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में शामिल करने का विरोध किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)