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मध्य प्रदेश: स्थानीय मुद्दे उठाने वाले साहित्यिक सम्मान प्राप्त कवि को घर गिराने का नोटिस मिला

बीना नगर पालिका ने हिंदी और बुंदेली के जाने-माने कवि महेश कटारे ‘सुगम’ को नोटिस भेजते हुए दावा किया है कि उनका घर अवैध निर्माण है. वहीं, कटारे का कहना है कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज़ और अनुमतियां हैं और वे नियमित रूप से गृह कर भी जमा करवाते रहे हैं.

महेश कटारे ‘सुगम’. (फोटो साभार: फेसबुक/@maheshkatare.sugam)

भोपाल: मध्य प्रदेश के जाने-माने कवि महेश कटारे ‘सुगम’ को बीना नगर पालिका ने उनके एक दशक से पुराने घर को तोड़ने का नोटिस भेजा है. नगर पालिका का दावा है कि यह ‘अवैध’ रूप से बनाया गया है और कटारे के पास इससे संबंधित जरूरी कागज़ात नहीं हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, सागर जिले में आने वाले चंद्रशेखर वॉर्ड-7 की माथुर कॉलोनी के इस घर में कटारे ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ साल 2011 में रहना शुरू किया था.

हालांकि घर उनकी पत्नी मीरा कटारे के नाम पर है, नगर पालिका ने नोटिस उनके बेटे प्रभात के नाम पर भेजा है.

नोटिस में दावा किया गया है कि यह घर अवैध तरीके से बिना अनुमति के बनाया गया है जो नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 (8) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है. नोटिस में कटारे को घर से संबंधित दस्तावेजों के साथ पेश होने को भी कहा गया है.

महेश कटारे का कहना है कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज हैं. उन्होंने द वायर  से फोन पर हुई बातचीत में कहा, ‘जबकि घर प्रभात की मां के नाम पर पंजीकृत है, नोटिस मेरे बेटे प्रभात के नाम पर ही दिया गया है. 26 मार्च 2011 को इमारत का नक्शा नगर पालिका ने ही पास किया था और मैंने सभी जरूरी अनुमतियां ली थीं. इसके अलावा मैं तबसे नियमित रूप से हाउस टैक्स जमा करता रहा हूं.’

उनसे जब उन्हें नोटिस मिलने का कारण पूछा गया, तब उनका कहना था, ‘माथुर कॉलोनी में बने ज्यादातर घर अवैध हैं लेकिन नोटिस केवल मुझे ही मिला है. 2011 में जबसे मेरा घर बना है तब से मैं सड़क, पानी, बिजली और नाली आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर आवाज उठाता रहा हूं.’

कटारे परिवार को मिला नोटिस.

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ समय में मध्य प्रदेश में सांप्रदायिक झड़पों के आरोपियों के घर गिराए जाने के कई वाकये सामने आए हैं. कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों और प्रतिरोध करने वालों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई का पैटर्न देखा गया है.

कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित, बुंदेली और हिंदी में कविताएं लिखने वाले महेश कटारे एक जनकवि की पहचान रखते हैं जिन्होंने कई स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को उठाया है.

जनता के समर्थन के लिए उन्होंने ‘नगर पालिका सो रही भइया, बीना नगरी रो रही भइया’ जैसी कविता लिखी है और कई सार्वजनिक मंचों से इसका पाठ किया है. उनका कहना है कि शायद यही बात अधिकारियों को नागवार गुजरी हो.

कटारे ने पैथोलॉजी लैब चलाने वाले अपने बेटे प्रभात की मदद से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और स्थानीय स्तर पर कई शिकायतें भी दर्ज करवाई हैं.

उनका आरोप है कि कुछ हफ्ते पहले नगर पालिका के एक अफसर उनकी कॉलोनी में आए थे और उनसे हेल्पलाइन पर दर्ज करवाई गई शिकायत वापस लेने का आग्रह किया था. इसके बदले में उन्होंने कॉलोनी की समस्याओं को सुधारने की कोशिश करने की बात कही थी.

कटारे ने बताया, ‘मेरे शिकायत वापस लेने के कुछ रोज़ बाद ही मुझे यह नोटिस मिला.’

उधर, बीना नगर पालिका की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेखा जाटव ने मामले की जानकारी न होने की बात कहते हुए इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

हालांकि नगर पालिका के सब-इंजीनियर सत्यम देवलिया ने कहा, ‘बीना शहर में पिछले दो सप्ताह में ऐसे दर्जनों लोगों को नोटिस दिए गए हैं, जिन्होंने अवैध तरीके से घर बना रखे हैं. कटारे भी उनमें से एक हैं. वह एक अवैध कॉलोनी है.’

यह पूछे जाने पर कि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज होने पर भी ऐसा क्यों किया गया, देवलिया ने कहा, ‘अगर उनके पास सभी जरूरी कागज हैं तो उन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी.’

उन्होंने कटारे को निशाना बनाए जाने के आरोप का खंडन करते हुए कहा कि यह नियमित कार्रवाई है और इसके पीछे कोई साजिश नहीं है.

इस नोटिस को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने नाराजगी जाहिर की है.

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘महेश कटारे सुगम जनभाषा के कवि हैं. बुंदेली को उन्होंने ऊंचाई और देशव्यापी लोकप्रियता दिलाई है. कविता को उन्होंने जन भावनाओं की अभिव्यक्ति का जरिया और प्रतिरोध का औजार बनाया है. लिहाजा यह समझना होगा कि उनके विरुद्ध साजिश एक सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी महेश कटारे के विरुद्ध नहीं, यह कवि साहित्यकार महेश कटारे के साहित्य और सृजन पर हमला है.’

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान सरकार उन्हें चुप कराना चाहती है इसीलिए उन्हें यह नोटिस भेजा गया है. लेकिन वो किसी से नहीं डरते हैं और समूचा साहित्य समाज उनके साथ है.’

इस बारे में बात करने के लिए सागर के जिला कलेक्टर दीपक आर्य को कई बार कॉल किया गया, जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया.

(काशिफ ककवी के इनपुट्स के साथ)