भारत

बंगाल: दस दिनों में 4 विचाराधीन क़ैदियों की मौत, परिजनों ने जेल में प्रताड़ना का आरोप लगाया

ये सभी विचाराधीन क़ैदी दक्षिण 24 परगना ज़िले के बरुईपुर केंद्रीय सुधार गृह में न्यायिक हिरासत में थे. परिवारों द्वारा जेल प्रशासन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए जाने के बाद ज़िला कलेक्टर ने प्रत्येक मृतक के परिजन को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देते हुए सीआईडी जांच कराने की बात कही है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: Flickr/CC BY NC ND 2.0)

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बीते दस दिनों में चार विचाराधीन कैदियों की मौत हो गई है. परिजनों का आरोप है कि उन्हें जेल में प्रताड़ित किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चारों मौतें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर केंद्रीय सुधार गृह में न्यायिक हिरासत में हुई हैं. मृतकों के नाम जियाउल नस्कर, अब्दुल रज्जाक दीवान, अकबर खान उर्फ खोकन खान और सैदुल मुंशी हैं.

चारों को पुलिस द्वारा जुलाई के आखिरी हफ्ते में डकैती करने की तैयारी के आरोपों में अलग-अलग मामलों में पकड़ा गया था. उनके परिवारों ने हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाया है, जिससे उनकी मौत के कथित कारणों पर संदेह पैदा हो गया है.

खबर के मुताबिक, 28 जुलाई को 40 वर्षीय जियाउल हक ने जेल से अपनी पत्नी महरुफा बीवी से फोन पर बात की थी. उन्होंने अपनी पत्नी से अगले दिन वापस फोन करने का बोला था. लेकिन, महरुफा को अगले पांच दिन तक अपने पति का फोन नहीं आया. 2 अगस्त को जेल के अधिकारियों ने उन्हें सूचना दी कि जियाउल की पिछली रात मौत हो गई.

महरुफा बीवी (35) इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि उनके पति की प्राकृतिक मौत हुई थी.

महरुफा आरोप लगाती हैं, ‘मेरे पति ने मुझे बताया था कि उन्हें पुलिस थाने और जेल में बेरहमी से पीटा गया है. उनका शरीर चोट के निशानों से भरा हुआ था. इसलिए हम निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं और दोषियों की जल्द पहचान की जानी चाहिए.’

जियाउल के परिवार द्वारा गड़बड़ी का आरोप लगाने की शिकायत के बाद दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट ने प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया और आरोपों की सीआईडी जांच के अलावा सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया.

महरुफा ने कहा, ‘हमें बताया गया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डीएम से बात की है और सीआईडी जांच के आदेश के अलावा उन्हें हमें मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं.’

हालांकि, परिवार जेल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर वापस नहीं लेना चाहता है.

बरुईपुर पुलिस थाने के प्रभारी सौम्यदीप रॉय ने कहा, ‘चूंकि मामला विचाराधीन है, इसलिए हम कुछ नहीं कह सकते. जो मैं कह सकता हूं वो यह है कि उन्हें डकैती की तैयारी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जब उन्हें जेल भेजा गया, तो वे एकदम स्वस्थ थे. हमारे पास उनकी फिटनेस की मेडिकल रिपोर्ट है.’

अब्दुल रज्जाक दीवान की पत्नी सोहाना बीवी ने बताया कि उनके पति झारखंड और बिहार में काम किया करते थे और कुछ दिनों के लिए घर आए थे. उन्हें एक हफ्ते में काम के लिए फिर जाना था.

उन्होंने आगे बताया, ’25 जुलाई की शाम पुलिस उन्हें थाने ले गई. अगले दिन जेल भेजे जाने तक वे बिल्कुल ठीक थे. उसी दिन, उन्होंने मुझे फोन किया और मुझसे एक ऐप के जरिये एक नंबर पर 2,000 रुपये भेजने के लिए कहा. अगले दिन मैं उन्हें खाना देने के लिए जेल गई. लेकिन 30 जुलाई को पुलिस ने हमें सूचित किया कि वह ठीक नहीं हैं. जब हम थाने गए तो हमें बताया गया कि उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया.’

राज्य सुधार प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘यह मानक प्रोटोकॉल है. विभागीय जांच में किसी भी गड़बड़ी की बात से इनकार किया गया है.’

डीएम गुप्ता ने फोन और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया.

जेल मंत्री अखिल गिरी ने कहा, ‘नियमानुसार हम पहले ही मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे चुके हैं. अगर जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो हम दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे.’