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झारखंड: छात्रों द्वारा पीटे गए शिक्षक ने जातिसूचक शब्द कहे थे, डिमोशन भी हुआ था- अधिकारी

इस हफ्ते सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दुमका ज़िले के एक आवासीय विद्यालय के छात्रों द्वारा एक शिक्षक और एक अन्य व्यक्ति को पेड़ से बांधकर पीटा जा रहा था. बताया गया था कि छात्र उन्हें कम अंक मिलने को लेकर नाराज़ थे.

दुमका के एक आवासीय स्कूल में शिक्षक और लिपिक को पीटते छात्र. (स्क्रीनग्रैब साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: झारखंड के दुमका जिले के स्कूल शिक्षक, जिन्हें हाल ही में नौवीं कक्षा की प्रैक्टिकल परीक्षा में कथित रूप से ‘कम अंक’ देने के लिए छात्रों ने पीटा था, को कुछ महीने पहले छात्रों के खिलाफ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करने के बाद  प्रधानाध्यापक के पद से हटा दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, उप विकास आयुक्त कर्ण सत्यार्थी ने यह जानकारी दी है.

इस सप्ताह सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें छात्रों का एक समूह पेड़ से बंधे शिक्षक और एक स्कूल लिपिक को घेरते और पीटते हुए दिख रहा था है. बताया गया था कि जिले के गोपीकांदर थाना क्षेत्र के तहत सरकार द्वारा संचालित अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालय में सोमवार को यह घटना घटी थी.

शिक्षक की पहचान सुमन सिंह के रूप में और लिपिक की पहचान सोनेराम चौरे के तौर पर की गई है.

सत्यार्थी, जो जिले में एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी के परियोजना निदेशक भी हैं, के अनुसार, यह घटना ऐसे समय में हुई जब शिक्षक और छात्रों के बीच पहले से ही तनाव चल रहा था. उन्होंने कहा कि सुमन सिंह और छात्रों के बीच पिछले चार महीने से विवाद था.

आवासीय विद्यालय में 245 छात्र और अन्य पांच शिक्षक पहाड़िया समुदाय के हैं, जिन्हें विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों (पीवीटीजी) के तहत वर्गीकृत किया गया है.

सत्यार्थी ने बताया, ‘अप्रैल में एक समय छात्र प्रधानाध्यापक सुमन सिंह से नाखुश थे, क्योंकि वह जातिसूचक अपशब्द बोला करते थे. छात्रों के कहने पर एफआईआर दर्ज की गई थी और हमने उनके तबादले सिफारिश की थी. हालांकि, प्रधानाध्यापक को उसी स्कूल में एक शिक्षक के रूप में डिमोट (पदावनत) कर दिया गया था.’

सत्यार्थी ने कहा कि हालिया घटना ऐसे समय में हुई है जब पिछला मामला सुलझ चुका था. उन्होंने कहा, ‘लेकिन 29 अगस्त को शिक्षक के साथ मारपीट की गई. प्रथमदृष्टया, छात्रों के मूल्यांकन को लेकर कोई मसला हुआ था. हालांकि, हम मामले के बारे में पूछताछ कर रहे हैं.’

उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कुछ छात्र ‘अनुशासनहीन’ थे और ‘कुछ का व्यवहार एक हद तक आपराधिक था.’

एक सूत्र ने अख़बार से कहा, ‘हम नहीं चाहते कि छात्रों की पढ़ाई-लिखाई किसी मामले से प्रभावित हो और इसलिए हम उचित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. हालांकि मामला साफ़ होने के बाद हम छात्रों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे. हम उनमें से कुछ को अन्य स्कूलों में भेजने की भी योजना बना रहे हैं. हमने अभिभावक-शिक्षक बैठक बुलाई है और हम इस तरह के बर्ताव के पीछे के कारण को समझने की कोशिश कर रहे हैं.’

मालूम हो कि पुलिस ने मंगलवार को बताया था कि दुमका जिले में एक आवासीय विद्यालय में कक्षा नौवीं की प्रायोगिक परीक्षा में कम अंक मिलने पर कुछ छात्रों ने गणित के एक शिक्षक तथा स्कूल के एक लिपिक की कथित तौर पर एक पेड़ से बांधकर पिटाई की.

पुलिस ने बताया था कि स्कूल में नौवीं कक्षा के 32 में से 11 छात्रों को ग्रेड-डीडी प्राप्त हुए जिसे अनुत्तीर्ण के समकक्ष माना जाता है.

गोपीकांदर थाना प्रभारी नित्यानंद भोक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया था, ‘मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है क्योंकि स्कूल प्रबंधन ने घटना की कोई लिखित शिकायत नहीं की है. घटना के सत्यापन के बाद मैंने स्कूल अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना करते हुए कहा कि इससे छात्रों का करिअर बर्बाद हो सकता है.’

भोक्ता के अनुसार, शिक्षक और लिपिक ने भी पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी है.

गोपीकांदर के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अनंत झा भी मामले की पड़ताल के लिए भोक्ता के साथ स्कूल गए थे. उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालय में 200 छात्र पढ़ते हैं और इनमें से बड़ी संख्या में घटना में शामिल थे.

उन्होंने बताया था, ‘पीड़ित शिक्षक पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक थे लेकिन बाद में अज्ञात कारणों से उन्हें हटा दिया गया था. यह शिक्षकों के बीच प्रतिद्वंद्विता का मामला हो सकता है. स्कूल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नौवीं और दसवीं कक्षा की कक्षाओं को दो दिनों के लिए निलंबित कर छात्रों को उनके घरों में वापस भेज दिया गया था.’

उन्होंने आगे यह भी कहा था, ‘स्कूल प्रबंधन प्रायोगिक परीक्षाओं के अंक और जिस तारीख को अंक ऑनलाइन अपलोड किए गए थे, दिखाने में विफल रहा. यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि छात्र थ्योरी पेपर में फेल हुए या प्रैक्टिकल में. प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि छात्रों ने केवल अफवाह सुनकर ऐसा कदम उठाया.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)