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सितंबर में भारत की सेवा क्षेत्र की गतिविधि छह महीने के निचले स्तर पर पहुंची

अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ‘एसएंडपी ग्लोबल’ द्वारा जारी सेवा क्षेत्र के लिए क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अगस्त में 57.2 से घटकर सितंबर में 54.3 पर आ गया. यह मार्च के बाद सबसे धीमी दर से विस्तार को दर्शाता है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: भारत में सेवा क्षेत्र की गतिविधि सितंबर में छह महीने के निचले स्तर पर आ गई. इस दौरान मुद्रास्फीति के दबाव के बीच नए व्यापार में सबसे धीमी दर से बढ़ोतरी हुई.

अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ‘एसएंडपी ग्लोबल’ द्वारा जारी सेवा क्षेत्र के लिए क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) कारोबारी गतिविधि सूचकांक अगस्त में 57.2 से घटकर सितंबर में 54.3 पर आ गया. यह मार्च के बाद सबसे धीमी दर से विस्तार को दर्शाता है.

हालांकि, लगातार 14वें महीने सेवा क्षेत्र की गतिविधि में विस्तार देखा गया. पीएमआई की भाषा में 50 से अधिक अंक का मतलब विस्तार है, जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन को दर्शाता है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सर्वेक्षण में कहा गया है कि सितंबर के दौरान मुद्रास्फीति के दबाव और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों के बीच, मार्च के बाद से नए व्यापार प्रवाह और उत्पादन दोनों सबसे धीमी दरों पर बढ़े, जिससे रोजगार सृजन में कमी आई.

सर्वेक्षण में दिखाया गया है कि कीमतों के दबाव, तेजी से प्रतिस्पर्धी माहौल और प्रतिकूल सार्वजनिक नीतियों ने महीने में तेजी को बाधित कर दिया.

गिरावट के बावजूद आंकड़ों ने सितंबर में लगातार 14वें महीने वृद्धि का संकेत दिया.

बिजनेस स्टैंडर्स के मुताबिक, एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की संयुक्त निदेशक पोल्याना डी लीमा ने कहा, ‘भारतीय सेवा क्षेत्र ने हाल के महीनों में कई बाधाओं को पार किया है. ताजा पीएमआई आंकड़े सितंबर में वृद्धि की गति के कुछ धीमा पड़ने के बावजूद मजबूत प्रदर्शन को दर्शाते हैं.’

सर्वेक्षण में कहा गया है कि कीमतों के दबाव, प्रतिस्पर्धी माहौल और प्रतिकूल सार्वजनिक नीतियों के चलते वृद्धि बाधित हुई है.

लीमा ने आगे कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण रुपये में तेज गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा हुई हैं.

लीमा का कहना है कि मुद्रास्फीति में तेजी से उपभोक्ता खर्च को नुकसान हो सकता है, व्यापारिक विश्वास कम हो सकता है.

लीमा ने कहा, ‘मुद्रा अस्थिरता नए सिरे से मुद्रास्फीति की चिंता पैदा करती है, क्योंकि आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं और निस्संदेह इसका मतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये की रक्षा के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रखेगा और कीमतों के दबाव को नियंत्रित करेगा.’

सोमवार को जारी आंकड़ों से पता चला है कि मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई तीन महीने के निचले स्तर 55.1 पर आ गया है. वैश्विक प्रतिकूलताओं के बीच आरबीआई ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2023 के लिए अपने विकास अनुमान को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया, जो पहले अनुमानित 7.2 प्रतिशत था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)