नॉर्थ ईस्ट

मणिपुर सरकार का फैसला, चार बच्चों से अधिक होने पर सरकारी लाभ और नौकरी नहीं

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया है. इससे पहले ऐसा ही नियम असम सरकार द्वारा लागू किया जा चुका है.

इस सप्ताह हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक/@NongthombamBirensingh)

नई दिल्ली: मणिपुर मंत्रिमंडल ने गुरुवार को एक अध्यादेश के रूप में मणिपुर राज्य जनसंख्या आयोग की स्थापना को अपनी मंजूरी दे दी, जो नौकरियों सहित सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की पात्रता के लिए चार बच्चों के नियम की बात कहता है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिन्होंने शुक्रवार को कहा कि राज्य के सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

सिंह ने कहा, ‘अर्थव्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए हमें अपनी योजना बनानी होगी. यह निर्णय आगे बनने वाले राज्य जनसंख्या आयोग से भी संबंधित है.’

सरकार के प्रवक्ता डॉ. एस रंजन ने बताया कि मणिपुर राज्य जनसंख्या आयोग के तहत ‘यदि अब से कोई व्यक्ति चार से अधिक बच्चों का पिता है, तो परिवार के किसी भी सदस्य को कोई सरकारी लाभ नहीं दिया जाएगा.’

मणिपुर विधानसभा ने हाल ही में संपन्न हुए बजट सत्र में सर्वसम्मति से जनसंख्या आयोग की स्थापना के लिए एक निजी सदस्य के प्रस्ताव को स्वीकार किया था. तब जद (यू) विधायक खुमुक्चम जॉयकिसन (जो अब भाजपा में हैं) ने राज्य में बाहरी लोगों की कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाया था.

रंजन ने बताया कि विधायक ने दावा किया था कि 1971 से 2001 तक मणिपुर के पहाड़ी जिलों में 153.3 प्रतिशत की जनसंख्या वृद्धि हुई थी, जो 2001 और 2011 के बीच बढ़कर 250 प्रतिशत हो गई.

द हिंदू के मुताबिक, पहाड़ी जिलों में मुख्य रूप से नगा, कुकी और ज़ोमी के रूप में समुदाय रहते हैं.

उल्लेखनीय है कि कैबिनेट का फैसला मणिपुर में लगभग एक दशक पुरानी सालाना प्रतियोगिता से उलट है, जिसमें कम से कम 10 बच्चों वाली महिलाओं को नकद पुरस्कार दिए जाते हैं.

पुरस्कार समारोह शुरू में इरमदम कुनबा अपुनबा लुप द्वारा आयोजित किया गया था. यह एक ऐसा समूह जो मणिपुरी महिलाओं को अधिक से अधिक बच्चों को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित करता है.

ज्ञात हो कि मणिपुर से पहले इस तरह का फैसला असम सरकार द्वारा भी लिया जा चुका है. 2019 में तत्कालीन सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने कहा था कि एक या उससे अधिक साथी से अगर किसी के दो से ज़्यादा बच्चे हैं, तो उन्हें सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी.

उस समय बताया गया था कि सरकार का फ़ैसला सरकार के वर्तमान कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा. 2021 के बाद राज्य में नौकरी के लिए नए सिरे से आवेदन करने वाले लोग इस नए नियम के दायरे में आएंगे.