दुनिया

पाकिस्तान ने ऑस्कर में भेजी गई फिल्म ‘जॉयलैंड’ को देश में बैन किया

‘जॉयलैंड’ फिल्म ऑस्कर 2023 के लिए पाकिस्तान द्वारा भेजी गई आधिकारिक प्रविष्टि है, जो 18 नवंबर को पाकिस्तान के सिनेमाघरों रिलीज़ होनी थी. सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि फिल्म देश के ‘सामाजिक मूल्यों और नैतिक मानकों’ के अनुरूप नहीं है.

जॉयलैंड फिल्म का पोस्टर. (साभार: Khoosat Films)

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान के अधिकारियों ने साइम सादिक की फिल्म ‘जॉयलैंड’ को प्रतिबंधित कर दिया है. उनका आरोप है कि फिल्म में “ बेहद आपत्तिजनक सामग्री’ है. कुछ महीने पहले ही प्रमाण पत्र जारी कर फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन की मंजूरी दे दी गई थी.

‘जॉयलैंड’ ऑस्कर में पाकिस्तान की आधिकारिक प्रविष्टि है. इसे सरकार ने 17 अगस्त को प्रमाण पत्र दिया था. बहरहाल, इसकी सामग्री को लेकर हाल में ऐतराज़ जताया गया था.

आपत्ति के बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने देश के रूढ़िवादी तत्वों के साथ टकराव से बचने के लिए फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया.

मंत्रालय ने 11 नवंबर को जारी अधिसूचना में कहा कि यह फिल्म देश के ‘सामाजिक मूल्यों और नैतिक मानकों’ के अनुरूप नहीं है.

अधिसूचना में कहा गया है, ‘लिखित शिकायतें मिली हैं कि फिल्म में अत्यधिक आपत्तिजनक सामग्री है जो हमारे समाज के सामाजिक मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं है और स्पष्ट रूप से ‘शिष्टता और नैतिकता’ के मानदंडों के प्रतिकूल है.’

मंत्रालय ने अपने आदेश में देश में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है. फिल्म 18 नवंबर को पाकिस्तान के सिनेमाघरों रिलीज़ की जानी थी.

सादिक के निर्देशन में बनी पहली फिल्म 2023 अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर श्रेणी की अंतिम पांच में स्थान पाने की दौड़ में है.

‘जॉयलैंड’ में पितृसत्तात्मक परिवार की कहानी है जो चाहता है कि परिवार का वंश चलाने के लिए बेटा पैदा हो जबकि उनका छोटा बेटा चुपके से एक इरोटिक डांस थियेटर में शामिल हो जाता है और ट्रांसजेंडर महिला से प्रेम करने लगता है.

डीडब्ल्यू के अनुसार, धार्मिक समूहों द्वारा फिल्म पर समलैंगिकता का प्रचार करने का आरोप लगाने के बाद पाकिस्तान के सेंसर बोर्ड ने कहा था कि फिल्म में ‘बेहद आपत्तिजनक सामग्री’ है.

हालांकि, पाकिस्तान की सीनेट में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के एकमात्र सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि फिल्म इस्लाम के खिलाफ है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है और इसके खिलाफ किसी भी कानून, विचारधारा या गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती है.’

उल्लेखनीय है कि फिल्म को टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, अमेरिकन फिल्म इंस्टिट्यूट फेस्टिवल और बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी दिखाया गया था, जहां इसे काफी सराहना मिली थी. इसे बीते सप्ताह ‘एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड्स’ का युवा सिनेमा पुरस्कार भी मिला है.

फिल्म को कांन्स फिल्म महोत्सव का एलजीबीटीक्यू पुरस्कार क्वीर पाम भी मिला है.

फिल्म पर प्रतिबंध को फिल्म के निर्देशक साइम सादिक ने फिल्म पर रोक को असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी बताया है. 

प्रतिबंध की समीक्षा करेंगे प्रधानमंत्री

द हिंदू की खबर के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ के सलाहकार ने बताया है कि प्रधानमंत्री फिल्म पर बैन लगाए जाने के निर्णय की समीक्षा करेंगे.

सोमवार को प्रधानमंत्री के सलाहकार सलमान सूफी ने ट्विटर पर बताया कि फिल्म के लिए और इस पर लगाए प्रतिबंध की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई जा रही है.

उन्होंने लिखा, ‘मैं व्यक्तिगत तौर पर ऐसी फिल्मों को बैन करने का समर्थक नहीं हूं जो हमारे समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के मसलों की बात करती हैं. जनता पर इतना भरोसा किया जाना चाहिए कि वे इसे देखें और फिर अपना मन बनाएं.’

उन्होंने आगे बताया कि इस बारे में गठित होने वाली समिति फिल्म के गुण-दोष के अलावा इसे लेकर मिली शिकायतों पर भी गौर करेगी.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रांसजेंडर लोगों को तीसरे जेंडर के रूप में मान्यता और उनके पक्ष में कुछ कानून पारित होने के बावजूद इस समुदाय को समाज में बहिष्कृत समझा जाता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)