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मिज़ोरम: हिंसा के बाद बांग्लादेश से आए कुकी-चिन-मिज़ो शरणार्थियों की संख्या बढ़ी

कुकी-चिन-मिज़ो समुदाय के लोग बांग्लादेशी सेना और एक जातीय विद्रोही समूह कुकी-चिन नेशनल आर्मी के बीच सशस्त्र संघर्ष के बाद अपने घर छोड़कर मिज़ोरम आ रहे हैं. मिज़ोरम पहले से ही म्यांमार के 30,000 से अधिक शरणार्थियों को शरण दे रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

आइजोल: बांग्लादेश के ‘चटगांव हिल ट्रैक्ट’ में हिंसा से बचकर मिजोरम आने वाले कुकी-चिन-मिजो जनजातीय शरणार्थियों की संख्या बढ़कर 300 के करीब हो गई है. इस मामले की जानकारी रखने वाले एक स्थानीय नेता ने यह जानकारी दी.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि पहले 272 बांग्लादेशी नागरिक सशस्त्र संघर्ष के बाद भागकर मिजोरम में शरण ली थी. शुक्रवार (25 नवंबर) की रात 21 शरणार्थी और आए हैं.

रविवार को और शरणार्थियों के आने की सूचना नहीं है. अधिकारी ने इस बात पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या प्रशासन ने आगे शरणार्थियों को रोकने के लिए कोई कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बीएसएफ द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है.

स्थानीय शरणार्थी आयोजन समिति के अध्यक्ष गॉस्पेल हमांगईहजुआला ने बताया कि 21 शरणार्थियों ने शुक्रवार देर रात बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्ट (सीएचटी) से सीमा पार की.

सीएचटी में कथित हिंसा के कारण मिजोरम आए कुकी-चिन शरणार्थियों के मद्देनजर लवंगतलाई जिले के परवा गांव के ग्रामीण प्राधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने हाल ही में इस आयोजन समिति का गठन किया था. कुकी-चिन जनजाति बांग्लादेश, मिजोरम और म्यांमार के पहाड़ी इलाकों में फैली हुई है.

गॉस्पेल ने बताया कि 21 शरणार्थियों के सीमा पार करने के तुरंत बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सीमावर्ती गांव से लगभग 21 किलोमीटर दूर स्थित परवा गांव में इन्हें लेकर आए.

उन्होंने बताया कि इस समय बांग्लादेश के कुल 294 लोगों ने परवा के एक स्कूल, एक सामुदायिक सभागार, एक आंगनबाड़ी केंद्र और एक उप-केंद्र में शरण ले रखी है.

गॉस्पेल परवा ग्राम परिषद के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने बताया कि कुकी-चिन-मिजो शरणार्थियों को एनजीओ द्वारा भोजन, कपड़े और अन्य राहत सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही हैं.

उन्होंने बताया कि शरणार्थियों का पहला जत्था 20 नवंबर को लवंगतलाई जिले में दाखिल हुआ था.

कुकी-चिन समुदाय के लोग बांग्लादेशी सेना और एक जातीय विद्रोही समूह कुकी-चिन नेशनल आर्मी (केएनए) के बीच सशस्त्र संघर्ष के बाद अपने घर छोड़कर मिजोरम आ रहे हैं. राज्य सरकार के अधिकारियों ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है.

इससे पहले पिछले मंगलवार (22 नवंबर) को मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने इस मुद्दे पर एक बैठक कर कुकी-चिन-मिजो समुदायों के शरणार्थियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की थी. उन्होंने उन्हें ‘राज्य सरकार की सुविधा के अनुसार अस्थायी आश्रय, भोजन और अन्य राहत’ प्रदान करने की भी घोषणा की थी.

सेंट्रल यंग मिजोरम एसोसिएशन ने भी जातीय मिजो शरणार्थियों को मानवीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इससे पहले मिजोरम स्थित ज़ो री-यूनिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन (ZORO) ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश की सेना ने म्यांमार स्थित विद्रोही समूह अराकान आर्मी (एए) के साथ मिलकर कुकी-चिन नेशनल आर्मी के खिलाफ संयुक्त अभियान शुरू किया है. ज़ोरो सभी जातीय मिज़ो या ज़ो जनजातियों के पुन: एकीकरण के लिए लड़ रहा है.

इसने यह भी आरोप लगाया था कि अराकान आर्मी ने 16 नवंबर को कुकी-चिन नेशनल आर्मी के साथ मुठभेड़ के बाद नौ नागरिकों का अपहरण कर लिया था. कुकी-चिन नेशनल आर्मी, कुकी-चिन नेशनल फ्रंट (केएनएफ) की सशस्त्र शाखा है, जो बांग्लादेश में कुकी-चिन लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग कर रही है.

कुकी-चिन नेशनल फ्रंट के एक नेता ने यह भी आरोप लगाया कि अराकान आर्मी द्वारा अपहृत नौ लोगों के अलावा बांग्लादेश सेना द्वारा 17 वर्षीय लड़की सहित 5 नागरिकों का भी अपहरण कर लिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चटगांव हिल ट्रैक्ट बांग्लादेश के खगराचारी, रंगमती, और बंदरबन जिलों में 13,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है. यह पूर्वी तरफ मिजोरम, उत्तरी तरफ त्रिपुरा और दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्वी मोर्चे पर म्यांमार के साथ सीमाएं साझा करता है.

मिजोरम बांग्लादेश के साथ 318 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिसकी रक्षा भारत की ओर से बीएसएफ और दूसरी ओर बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश और बांग्लादेश सेना द्वारा की जाती है.

मिजोरम पहले से ही म्यांमार के 30,000 से अधिक शरणार्थियों को शरण दे रहा है, जिन्होंने पिछले साल फरवरी में इस देश में एक सैन्य तख्तापलट के बाद राज्य में शरण मांगी थी.

नॉर्थईस्ट नाउ के मुताबिक,  बांग्लादेश में कुकी-चिन समुदाय मिजोरम में मिजो लोगों के साथ जातीय संबंध और मूल साझा करते हैं और उनमें से कई के राज्य में रिश्तेदार हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)