कूनो नेशनल पार्क में चीतों की लगातार मौत पर विशेषज्ञ बोले- अभी और बुरा होना बाकी

मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में 25 मई को दो और चीता शावकों की मौत हो गई. इसके पहले 23 मई को एक शावक की मौत हो गई थी. प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद इस पार्क में अब तक तीन वयस्क और तीन शावक चीतों की जान जा चुकी है.

सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पहली खेप में दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया से 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया था. (फोटो साभार: kunonationalpark.org/)

मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में 25 मई को दो और चीता शावकों की मौत हो गई. इसके पहले 23 मई को एक शावक की मौत हो गई थी. प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद इस पार्क में अब तक तीन वयस्क और तीन शावक चीतों की जान जा चुकी है.

सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पहली खेप में दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया से 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया था. (फोटो साभार: kunonationalpark.org/)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में दो और चीता शावकों की मौत ने भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है. दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञ विंसेट वान डेर मर्व ने कहा कि आने वाले महीनों में चीतों को पार्क में छोड़े जाने के बीच इनकी मृत्यु दर में वृद्धि होने की संभावना है.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि संभावना है कि मृत्यु दर पहले वर्ष में 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. उन्होंने कहा, ‘हम पहले वर्ष में 50 प्रतिशत मृत्यु दर का अनुमान लगाते हैं, हम जानते हैं कि केवल 10 ही पार्क में छोड़े जाने की शुरुआती अवधि में बचने जा रहे हैं.’

उनके अनुसार, चीतों को फिर से बसाए जाने की परियोजना के दौरान आगामी कुछ महीनों में तब और मौत होने की आशंका है, जब चीते कूनो नेशनल पार्क में अपने क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश करेंगे और तेंदुओं एवं बाघों से उनका सामना होगा.

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि अभी तक चीतों की मौत की संख्या स्वीकार्य दायरे में है, प्रोजेक्ट की समीक्षा करने वाले विशेषज्ञों की एक टीम के आधार पर सहवास के दौरान नर चीते का मादा चीते को मारना (Killing) अनावश्यक है.

मर्व देश में चीतों को फिर से आबाद करने के लिए भारत सरकार की बहुप्रतीक्षित परियोजना से निकटता से जुड़े हुए हैं.

वन्यजीव विशेषज्ञ मर्व ने अन्य जानवरों को संसाधनों तक पहुंच को नियंत्रित करने और चीतों को पुन: बसाए जाने के लिए समग्र खतरे को कम करने के लिए बाड़ लगाने का सुझाव दिया.

उन्होंने कहा कि बिना बाड़ वाले अभ्यारण्य में चीतों को फिर से बसाना कभी भी सफल नहीं रहा है. अफ्रीका ने इसे 15 बार आजमाया और असफल रहा.

कई विशेषज्ञों, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कुनो नेशनल पार्क में जगह की कमी और रसद पर चिंता व्यक्त की है और चीतों को अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है.

मर्व ने मुकुंदरा हिल्स (राजस्थान) में कम से कम दो से तीन चीते लाने और उन्हें वहां प्रजनन करने की सलाह दी.

उन्होंने कहा, ‘मुकुंदरा हिल्स पूरी तरह से घिरी हुई है. हम जानते हैं कि चीते वहां बहुत अच्छा करेंगे. एकमात्र समस्या यह है कि यह इस समय पूरी तरह से स्टॉक (भोजन) नहीं है. इसलिए आपको कुछ काले हिरन और चिंकारा लाने होंगे. जब नौरादेही और गांधीसागर में बाड़ लगाने का काम पूरा हो जाएगा तो हमारे पास तीन फेंस रिजर्व होंगे और फिर हम बिल्कुल सफल रहेंगे.’

वन्य जीव विशेषज्ञ ने कहा कि चीतों को स्थानांतरित करने के बाद उनकी मौत सामान्य है. हालांकि, बाड़े के बाहर उनकी मौतें वहीं होती हैं, जहां असली खतरा होता है.

उन्होंने कहा, ‘यही वह जगह है, जहां आप शिकार के कारण मृत्यु दर की उम्मीद कर सकते हैं. चीते निश्चित रूप से अपने क्षेत्र स्थापित करना और अपने क्षेत्रों एवं मादा चीतों के लिए एक दूसरे के साथ लड़ना और एक दूसरे को मारना जारी रखेंगे. उनका तेंदुओं से आमना-सामना होगा. कूनो में अब बाघ घूम रहे हैं. मौत के मामले में सबसे बुरी स्थिति आनी अभी बाकी है.’

उन्होंने आश्वासन दिया कि तीन वयस्कों और तीन शावकों की मौत पूरी तरह से सामान्य और अनुमानित मृत्यु दर के दायरे में है.

कूनो नेशनल पार्क में गुरुवार (25 मई) को दो और चीता शावकों की मौत हो गई. मध्य प्रदेश के वन विभाग ने कहा कि इस साल मार्च के अंतिम सप्ताह में चीता ज्वाला ने दो और शावकों को जन्म दिया, जिनकी मौत हो गई.

एक प्रेस विज्ञप्ति में वन अधिकारियों ने कहा कि दो शावकों की मौत अत्यधिक गर्मी और शुष्क गर्म हवा के कारण हो सकती है, जिससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया. विभाग ने कहा कि कूनो में तापमान 46-47 डिग्री सेल्सियस है.

इसमें कहा गया है कि शावकों को पालपुर में तैनात वन्यजीव चिकित्सकों के पास भेजा गया, लेकिन उनकी हालत बिगड़ती चली गई और वे बच नहीं सके.

प्रेस नोट में कहा गया है कि ज्यादातर चीता शावक कमजोर, कम वजन वाले थे और उनमें पानी की भी बेहद कमी पाई गई. वन विभाग ने कहा कि चीता शावकों की जीवित रहने की दर भी कम है.

ज्वाला ने जिन चार शावकों को जन्म दिया, उनमें से अब केवल एक ही जीवित है. इसके पहले 23 मई को एक शावक की मौत हो गई थी.

बीते 9 मई को द वायर ने रिपोर्ट किया था कि कूनो नेशनल पार्क में भारत लाए गए तीसरे अफ्रीकी मादा चीते ‘दक्षा’ की मौत हो गई. ऐसा माना जाता है कि उनके बाड़े में सहवास (Mating) के दौरान एक नर चीते द्वारा पहुंचाई गई चोट के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी.

इससे पहले बीते 27 मार्च को (नामीबिया से लाई गई) साशा नाम की एक मादा चीता की किडनी की बीमारी और बीते 23 अप्रैल को (दक्षिण अफ्रीका से लाए गए) उदय नामक चीते की कार्डियो-पल्मोनरी फेल्योर के कारण मौत हो गई थी.

इस तरह अब तक कूनो नेशनल पार्क में कुल छह चीतों- तीन वयस्क और तीन शावकों की मौत हो चुकी है.

बीते 18 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से कूनो लाए गए तीन चीतों की दो महीने से भी कम समय में मौत पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से उन्हें राजस्थान स्थानांतरित करने पर विचार करने को कहा था.

शीर्ष अदालत ने यह चिंता ऐसे समय व्य​क्त की थी, जब पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि मानसून आने से पहले कूनो में पांच और चीतों को छोड़ा जाएगा. इनमें तीन मादा और दो नर चीते हैं.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को बताया था कि टास्क फोर्स उन्हें अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने सहित सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है.

उन्होंने यह भी कहा था, ‘भारत में कोई चीता विशेषज्ञ नहीं हैं, क्योंकि 1947-48 में चीता देश से विलुप्त हो गए थे. तब से हमारे अधिकारी दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया गए हैं और चीता प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है.’

मालूम हो कि सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पहली खेप में दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया से 8 चीतों को कूनो लाया गया था. इसके बाद 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कूनो लाए गए थे. इसी दौरान पहली खेप में नामीबिया से आई ‘ज्वाला’ ने चार शावकों को जन्म दिया था.

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