न्यूज़क्लिक पर छापेमारी को पत्रकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों ने प्रेस फ्रीडम पर हमला बताया

यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले में पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने बीते 3 अक्टूबर को समाचार वेबसाइट न्यूज़क्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और प्रशासक अमित चक्रवर्ती को गिरफ़्तार कर लिया था. वर्तमान एफ़आईआर की जड़ें कथित तौर पर बीते अगस्त माह में न्यूयॉर्क टाइम्स में आई एक रिपोर्ट से जुड़ी हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक)

यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले में पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने बीते 3 अक्टूबर को समाचार वेबसाइट न्यूज़क्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और प्रशासक अमित चक्रवर्ती को गिरफ़्तार कर लिया था. वर्तमान एफ़आईआर की जड़ें कथित तौर पर बीते अगस्त माह में न्यूयॉर्क टाइम्स में आई एक रिपोर्ट से जुड़ी हुई है.

न्यूज़क्लिक समाचार पोर्टल का लोगो. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: दुनिया भर के 230 से अधिक पत्रकारों, समाचार संगठनों, शिक्षाविदों और कलाकारों ने न्यूज़क्लिक पर दिल्ली पुलिस की छापेमारी की निंदा करते हुए कहा है कि यह ‘प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर चिंताजनक हमला’ है.

उन्होंने कहा कि न्यूज़क्लिक जैसे मीडिया आउटलेट ‘समाज के उन हाशिये पर पड़े और खामोश क्षेत्रों को रोशनी देकर और आवाज देकर लोकतंत्र को मजबूत करते हैं जो सम्मान और बदलाव की मांग करते हैं.’

उन्होंने एकजुटता दिखाते हुए न्यूज़क्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती की तत्काल रिहाई की मांग की, जिन्हें कठोर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया है.

इन लोगों द्वारा जारी बयान इस प्रकार है:

हम, दुनिया भर के पत्रकार, प्रगतिशील समाचार प्रकाशन, शिक्षाविद, कलाकार और राजनेता 3 अक्टूबर 2023 को भारत में न्यूज़क्लिक और पीपल्स डिस्पैच (Peoples Dispatch) में हमारे सहयोगियों द्वारा सामना किए गए भयानक दमन की निंदा करने के लिए एक साथ आगे आते हैं.

न्यूज़क्लिक से जुड़े पत्रकारों, टिप्पणीकारों, कार्टूनिस्ट और हास्य कलाकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापे और हिरासत, साथ ही इसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती की यूएपीए के तहत गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर एक चिंताजनक हमला है.

न्यूज़क्लिक ठीक उसी तरह का मीडिया आउटलेट है, जो लोकतंत्र को मजबूत करता है, रोशनी फैलाता है और समाज के उन हाशिये पर पड़े और खामोश क्षेत्रों को आवाज देता है जो सम्मान और बदलाव की मांग करते हैं.

हम न्यूज़क्लिक और पीपल्स डिस्पैच के अपने साथियों के साथ खड़े हैं और गिरफ्तार किए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग करते हैं.

मालूम हो कि बीते 3 अक्टूबर को समाचार वेबसाइट न्यूज़क्लिक से जुड़े कर्मचारियों और टिप्पणीकारों के यहां छापेमारी और पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने इसके संपादक प्रबीर पुरस्कायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को गिरफ़्तार कर लिया था.

इससे पहले इसी दिन सुबह पुलिस ने अगस्त माह में यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले के संबंध में कुल 37 पुरुषों और 9 महिलाओं के खिलाफ छापेमारी और पूछताछ की थी. उनके मोबाइल-लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त कर लिए गए थे.

एफआईआर में कठोर यूएपीए की कई धाराओं (13, 16, 17, 18 और 22) के अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना) और धारा 120बी (आपराधिक साजिश में शामिल होना) को शामिल किया गया है.

प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती के अलावा संस्थान से जुड़े वीडियो पत्रकार अभिसार शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह, अनुभवी पत्रकार उर्मिलेश, लेखक गीता हरिहरन, प्रसिद्ध पत्रकार और टिप्पणीकार औनिंद्यो चक्रवर्ती, कार्यकर्ता और इतिहासकार सोहेल हाशमी के अलावा व्यंग्यकार और स्टैंड-अप कॉमेडियन संजय राजौरा कुछ प्रमुख लोग थे, जिनके यहां ‘छापेमारी’ की गई थी.

वर्तमान एफआईआर की जड़ें कथित तौर पर बीते अगस्त माह में न्यूयॉर्क टाइम्स में आई एक रिपोर्ट से जुड़ी हुई है. द वायर ने रिपोर्ट किया था कि कैसे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया था कि कांग्रेस नेताओं और न्यूज़क्लिक को ‘भारत विरोधी’ माहौल बनाने के लिए चीन से धन मिला है.

यह पत्र और इसके सभी हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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