ज्ञानवापी पर एएसआई रिपोर्ट अंतिम फैसला नहीं, मस्जिद की सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी: मुस्लिम पक्ष

ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि संस्था एएसआई सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन कर विशेषज्ञों से परामर्श करेगी और फिर अगले कदम पर कोई फैसला लेगी. 

ज्ञानवापी मस्जिद. (फोटो साभार: Paul Simpson/Flickr (CC BY-NC-ND 2.0)

ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि संस्था एएसआई सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन कर विशेषज्ञों से परामर्श करेगी और फिर अगले कदम पर कोई फैसला लेगी.

ज्ञानवापी मस्जिद. (फोटो साभार: Paul Simpson/Flickr (CC BY-NC-ND 2.0)

नई दिल्ली: दशकों पुराने मामले में मुस्लिम याचिकाकर्ताओं ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का एक सर्वेक्षण, जिसमें कहा गया है कि वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण से पहले एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था, केवल एक रिपोर्ट है, निर्णय नहीं.

उन्होंने कहा कि वे अपने अगले कदम पर निर्णय लेने से पहले दस्तावेज़ का अध्ययन करेंगे.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बयान तब आया है जब वकील विष्णु शंकर जैन के नेतृत्व में हिंदू याचिकाकर्ताओं ने गुरुवार रात एएसआई रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए कहा था कि वे मस्जिद के सीलबंद क्षेत्र के नए सिरे से सर्वेक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे, जिसमें एक विवादित ढांचा है. इसे हिंदुओं द्वारा शिवलिंग और मुसलमानों द्वारा वजूखाना माना जाता है.

‘वजूखाना’ एक छोटा जलाशय होता है, जिसका इस्तेमाल नमाज अदा करने से पहले वजू (हाथ-पांव धोने आदि) करने के लिए किया जाता है.

15वीं सदी की मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी (एआईएमसी) के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि संस्था एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट का अध्ययन कर विश्लेषण करेगी, विशेषज्ञों से परामर्श करेगी और फिर अपने अगले कदम पर फैसला करेगी.

यासीन ने कहा, ‘वर्तमान परिस्थितियों में मस्जिद को सुरक्षित रखना हमारी पहली और सबसे महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है… एएसआई ने अपनी प्रतिष्ठा के अनुसार रिपोर्ट दी है. यह एक रिपोर्ट है, फैसला नहीं.’

एएसआई सर्वेक्षण – जिसमें वास्तुशिल्प अवशेषों, उजागर विशेषताओं और कलाकृतियों, शिलालेखों, कला और मूर्तियों का अध्ययन किया गया, यह निष्कर्ष निकालने के लिए कि मौजूदा संरचना के निर्माण से पहले एक हिंदू मंदिर मौजूद था – ने इस विवाद में एक निर्णायक मोड़ ला दिया है. यह निष्कर्ष हिंदू याचिकाकर्ताओं के लिए एक झटका है, जो तर्क देते हैं कि मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राटों ने एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद किया था और परिसर पर अधिकार की मांग कर रहे हैं.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मंदिर को मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान नष्ट कर दिया गया था. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एक कमरे के अंदर पाए गए अरबी-फ़ारसी शिलालेख में उल्लेख है कि मस्जिद औरंगजेब के 20वें शासनकाल में बनाई गई थी…इसलिए, ऐसा प्रतीत होता है कि पहले से मौजूद संरचना 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान नष्ट हो गई थी और इसका कुछ हिस्सा इसे संशोधित किया गया और मौजूदा संरचना में पुन: उपयोग किया गया.’

लेकिन यासीन को इस पर आपत्ति है. उन्होंने कहा, ‘ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण 600 साल पहले जौनपुर के एक जमींदार ने कराया था. इसका जीर्णोद्धार मुगल सम्राट अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान करवाया था. फिर ज्ञानवापी मस्जिद का विस्तार और नवीनीकरण मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा किया गया था.’

उन्होंने कहा, ‘मुसलमान लगभग 600 साल पहले से नमाज़ पढ़ते आ रहे हैं…और भविष्य में भी ऐसा करते रहेंगे.’

यासीन ने कहा कि समिति रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है. उन्होंने कहा, ‘रिपोर्ट में 839 पृष्ठ हैं. हम एएसआई सर्वे रिपोर्ट पढ़ेंगे. हमारे वकील की टीम इसका अध्ययन करेगी. इसके अध्ययन और विश्लेषण में समय लगेगा. रिपोर्ट में चर्चा की गई सभी बातों का विश्लेषण करने के बाद विशेषज्ञों से राय ली जाएगी. हम अपना आगे का कानूनी कदम तय करेंगे.’

मस्जिद परिसर में नियमित पूजा के अधिकार की मांग करने वाली चार हिंदू महिला याचिकाकर्ताओं के मुख्य वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वह मस्जिद के सीलबंद वजूखाने में एएसआई सर्वेक्षण के आदेश की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करेंगे. वर्तमान सर्वेक्षण ने उस हिस्से को बाहर कर दिया था.

जैन ने कहा, ‘यह स्पष्ट करने के लिए सर्वेक्षण आवश्यक है कि संरचना एक शिवलिंग है या एक फव्वारा.’

ज्ञानवापी विवाद दशकों पुराना है, लेकिन अगस्त 2021 में पांच महिलाओं ने एक स्थानीय अदालत में याचिका दायर कर परिसर के अंदर स्थित मां श्रृंगार गौरी स्थल पर निर्बाध पूजा के अधिकार की मांग की, जिसमें हिंदू देवताओं की मूर्तियां हैं.

अप्रैल 2022 में स्थानीय अदालत ने परिसर के एक विवादास्पद सर्वेक्षण का आदेश दिया, जिसका तुरंत विरोध हुआ. सर्वेक्षण अंततः उस वर्ष मई में पूरा हुआ, लेकिन इससे पहले हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि कवायद के अंतिम घंटों में शिवलिंग पाया गया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया था. अदालत ने पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और मस्जिद परिसर के अंदर वज़ूखाना क्षेत्र को सील करने का आदेश दिया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया कि जो संरचना मिली वह एक फव्वारा है.

एएसआई द्वारा परिसर के सर्वेक्षण के वाराणसी जिला न्यायाधीश के 21 जुलाई 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका को खारिज करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 2023 में ज्ञानवापी मस्जिद का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था.

जिला न्यायाधीश ने एएसआई निदेशक को 2022 सुप्रीम कोर्ट द्वारा मस्जिद के सील किए गए क्षेत्रों (वज़ूखाना) को छोड़कर, साइट पर वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण या खुदाई करने का निर्देश दिया था.

जिला अदालत ने एएसआई को जीपीआर सर्वेक्षण, उत्खनन, डेटिंग पद्धति और वर्तमान संरचना की अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके एक विस्तृत वैज्ञानिक जांच करने का भी निर्देश दिया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसका निर्माण किसी हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना के ऊपर किया गया था.

एएसआई ने 18 दिसंबर 2023 को वाराणसी जिला अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी.

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