उत्तर प्रदेश: मस्जिद के लाउडस्पीकर पर इफ्तार की घोषणा करने पर इमाम समेत नौ लोग गिरफ़्तार

रामपुर ज़िले के एक गांव में मस्जिद के इमाम द्वारा लाउडस्पीकर पर इफ्तार का ऐलान करने पर एक हिंदुत्ववादी संगठन ने आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत की थी. पुलिस ने इमाम सहित नौ मुस्लिमों को गिरफ़्तार किया और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए मस्जिद से लाउडस्पीकर हटा दिया.

(प्रतीकात्मक फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक मस्जिद के इमाम द्वारा इफ्तार की घोषणा करने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने पर सांप्रदायिक विवाद खड़ा हो गया है. एक हिंदुत्ववादी संगठन ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते पुलिस ने हस्तक्षेप कर इमाम सहित नौ मुसलमानों को गिरफ्तार किया.

खबरों के अनुसार, पुलिस ने इस कृत्य को ‘नई परंपरा’ करार दिया और सार्वजनिक व्यवस्था पर चिंताओं का हवाला देते हुए मस्जिद से लाउडस्पीकर हटा दिया.

यह घटना टांडा पुलिस थाने के अंतर्गत सैयद नगर चौकी क्षेत्र में स्थित मानकपुर बजरिया गांव में हुई. रविवार (2 मार्च) को इमाम ने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके इफ्तार की घोषणा की थी, जिस पर हिंदू समुदाय के सदस्यों ने आपत्ति जताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

टांडा पुलिस थाने और अन्य इकाइयों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत करने और मध्यस्थता करने का प्रयास किया, लेकिन तनाव बना रहा.

मामले पर बोलते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा, ‘मानकपुर बजरिया गांव में एक मस्जिद के लाउडस्पीकर से की गई घोषणा के बाद दो समूहों के बीच विवाद पैदा हो गया. तत्काल कार्रवाई की गई और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया.’

गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है, जिन्हें अब जेल भेज दिया गया है.

यह मस्जिद करीब 15 से 20 सालों से मौजूद है और गांव के करीब 20 मुस्लिम परिवार यहां नमाज पढ़ते है.

स्थानीय मौलवी मौलाना रशीद अहमद ने इस घटना पर निराशा व्यक्त करते हुए दावा किया, ‘यह एक समुदाय को निशाना बनाने का स्पष्ट मामला है. पूजा स्थलों से घोषणाएं हमेशा से धार्मिक प्रथा का हिस्सा रही हैं, तो फिर इसे ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?’

कानूनी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट शारिक अनवर ने भी पुलिस की कार्रवाई की निंदा की. उन्होंने कहा, ‘गिरफ़्तारी और लाउडस्पीकर को हटाना एक ख़तरनाक मिसाल कायम करता है. ऐसी घटनाएं धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के तहत समान व्यवहार के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं.’

इस घटना पर धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से व्यापक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिनमें से कुछ ने गिरफ़्तार किए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की है और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.