नई दिल्ली: 106 साल पुराने अखिल भारतीय कैथोलिक संघ ने एक बयान में कहा है कि वह भारत भर में ईसाई समुदायों को डराने-धमकाने की घटनाओं से चिंतित है.
रिपोर्ट के अनुसार, एआईसीयू ने कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश के घटनाक्रम से ‘बहुत परेशान’ है, जहां अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1978 को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो पिछले 47 वर्षों से निष्क्रिय पड़ा हुआ था.
इस साल की शुरुआत में यह बताया गया था कि अरुणाचल प्रदेश सरकार इस अधिनियम को वापस लाने के लिए काम कर रही है, जिसका उद्देश्य ‘जबरन’ धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाना है.
एआईसीयू ने कहा कि राज्य के ईसाइयों को डर है कि एक बार कानून लागू हो जाने के बाद जनजातियों और समुदायों के बीच स्वदेशी सह-अस्तित्व में बाधा उत्पन्न होने की संभावना है.
एआईसीयू ने यह भी उल्लेख किया है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि उनका प्रशासन धर्मांतरण विरोधी कानून में संशोधन करने की योजना बना रहा है ताकि लड़कियों के धर्मांतरण को मृत्युदंड के साथ दंडनीय अपराध बनाया जा सके.
एआईसीयू ने मणिपुर का भी उल्लेख किया, जहां इस वर्ष फरवरी में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है और जहां 60,000 से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जाने बाकी हैं, जो अभी भी अस्थायी गैर-सरकारी शिविरों में रह रहे हैं.
बयान में उल्लेख किया गया है कि हेट क्राइम दस्तावेजीकरण समूहों ने दिसंबर 2024 तक विभिन्न राज्यों में ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा की 834 घटनाएं दर्ज की हैं.
इसमें कहा गया है, ‘उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ वायरल नफरत, क्रूर भीड़ हिंसा, बड़े पैमाने पर सामाजिक बहिष्कार के केंद्र बन गए हैं, जिसमें कानून और न्याय तंत्र के तत्व शामिल हैं.’
इसमें आगे कहा गया है कि दंड से मुक्ति और राजनीतिक संरक्षण के माहौल में प्रतिशोध के डर से कई हमले रिपोर्ट नहीं किए जाते.
समूह ने कहा, ‘इसके बावजूद अखिल भारतीय कैथोलिक संघ का नेतृत्व इस बात पर स्पष्ट है कि देश के आम लोग इन नफरती अभियानों और हिंसा में शामिल नहीं हैं.’
इसने प्राधिकारियों से इसमें शामिल व्यक्तियों, समूहों या संगठनों की पहचान करने तथा उन पर कार्रवाई करने का आह्वान किया.
