नई दिल्ली: पिछले दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की थी क्योंकि तमिलनाडु सरकार ने अपने राज्य बजट में आधिकारिक रूप से स्वीकृत रुपए के सिंबल ‘₹’ की बजाय तमिल के रुपया चिह्न ‘ரூ’ का उपयोग किया था.
हालांकि, खुद सीतारमण भी कई बार इस तमिल चिह्न का इस्तेमाल कर चुकी हैं.
तमिल भाषा में रुपया चिह्न के उपयोग को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और त्रिभाषा फार्मूला के खिलाफ राज्य के प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन सीतारमण ने इसे संविधान की शपथ का उल्लंघन कह दिया.
उन्होंने अपने एक एक्स पोस्ट में लिखा है, ‘सभी निर्वाचित प्रतिनिधि और अधिकारी संविधान के तहत राष्ट्र की संप्रभुता और एकता की रक्षा करने की शपथ लेते हैं. राज्य बजट दस्तावेजों से एक राष्ट्रीय प्रतीक, यानी ‘₹’ को हटाना उसी शपथ के विरुद्ध जाता है और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोर करता है.’
सीतारमण के इस पोस्ट के नीचे ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर ने ऐसे कई उदाहरण साझा किए हैं जब 2017 में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहते हुए खुद सीतारमण ने कम से कम चार बार तमिल रुपया चिह्न का उपयोग किया था.
But why ma’am why. pic.twitter.com/Xfh8yk9Nxb
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) March 13, 2025
जब तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने डीएमके सरकार पर इस मुद्दे को लेकर हमला बोला, तब भी फैक्ट-चेकर जुबैर ने ऐसे कई उदाहरण दिखाए जब अन्नामलाई ने खुद इस चिह्न का उपयोग किया था.
Thiru @annamalai_k Why use ‘ரூ’ symbol in your tweets instead of ₹ rupee symbol sir? https://t.co/Fxls2yytjz pic.twitter.com/UXrUsz7fxW
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) March 13, 2025
दिलचस्प बात यह है कि ओडिशा में भाजपा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बजट भाषण में भी यह चिह्न (₹) नहीं देखा गया. यहां तक कि भाषण के अंग्रेजी संस्करण में भी आधिकारिक रुपया चिह्न का उपयोग नहीं किया गया.
असम सरकार ने भी 2024-25 और 2025-26 के बजट भाषणों में इस चिह्न का उपयोग नहीं किया. भाजपा शासित त्रिपुरा का इस साल का बजट आना बाकी है, लेकिन पिछले साल के बजट में आधिकारिक रुपया चिह्न नहीं था.
यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण अपने ही दल की सरकारों द्वारा इस चिह्न का उपयोग न करने को ‘संवैधानिक शपथ का उल्लंघन’ और ‘राष्ट्रीय एकता की प्रतिबद्धता को कमजोर करने’ वाला मानती हैं या नहीं.
वामपंथी शासन वाले केरल राज्य ने भी अपने बजट में आधिकारिक रुपया चिह्न का उपयोग नहीं किया है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रुख पर सवाल उठाने की कोशिश करते हुए सीतारमण ने यहां तक कह दिया है कि, ‘यह केवल प्रतीकात्मकता से अधिक है—यह एक खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है जो भारतीय एकता को कमजोर करता है और क्षेत्रीय गर्व के नाम पर अलगाववादी भावनाओं को बढ़ावा देता है.’
भाजपा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा त्रिभाषा फार्मूला को ‘संवैधानिक’ कहकर भ्रामक रूप से पेश करने के चलते तमिलनाडु में विवाद खड़ा हो गया है. इससे भाजपा की दीर्घकालिक योजना को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं कि वह हिंदी को थोपना चाहती है और इसके साथ-साथ हिंदुत्व और हिंदी के अपने केंद्रीकरण की नीति को आगे बढ़ाना चाहती है.
भारत के विविध राज्यों में इन दोनों को आगे बढ़ाने की कोशिश को राज्यों के संघीय अधिकारों और हिंदी क्षेत्र से बाहर के लोगों की सांस्कृतिक पहचान और अभिव्यक्ति को कमजोर करने के रूप में देखा जा रहा है.
दूसरी तरफ़ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बात पर आश्वासन देने में विफल रहा है कि परिसीमन से उत्तरी और पश्चिमी भारत का वर्चस्व नहीं बढ़ेगा और अन्य राज्यों का प्रभाव कम नहीं होगा. इस बात ने तमिलनाडु की चिंता को और बढ़ा दिया है.
