नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ की बीजापुर पुलिस ने मंगलवार को पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के मामले में चार आरोपियों के खिलाफ अदालत में 1,200 पन्नों से अधिक का आरोपपत्र दाखिल किया है.
पुलिस के अनुसार, मुकेश की हत्या मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर द्वारा किए गए घटिया सड़क निर्माण कार्य को उजागर करने के कारण की गई, जो उसका रिश्तेदार भी था.
मालूम हो कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 33 वर्षीय स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव 3 जनवरी को बीजापुर के छतनपारा में सुरेश चंद्राकर की एक संपत्ति पर बने सेप्टिक टैंक से बरामद किया गया था. इससे पहले वे एक जनवरी से लापता थे. उनके भाई द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बीजापुर में मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष आरोपपत्र दायर किया है. पुलिस के अनुसार, सुरेश के भाई रितेश और एक कर्मचारी महेंद्र रामटेके ने कथित तौर पर हत्या को अंजाम दिया.
पुलिस का कहना है कि मुकेश को लोहे की रॉड से कई बार मारा गया और उसके शव को टैंक में फेंक दिया गया, जिसे बाद में कंक्रीट से ढक दिया गया.
आरोप पत्र के अनुसार, 2 जनवरी को गुमशुदगी की शिकायत की जांच करते समय पुलिस को पता चला कि उसके फोन की आखिरी लोकेशन सुरेश की प्रॉपर्टी पर थी. प्रॉपर्टी में 14 कमरे और एक बैडमिंटन कोर्ट है, जिसकी तलाशी के दौरान टैंक पर हाल ही में बिछाए गए कंक्रीट के कवर से संदेह हुआ और वहां से मुकेश का शव बरामद हुआ.
पुलिस ने फिर रितेश की तलाश शुरू की, जिसने उस रात मुकेश को मिलने के लिए बुलाया था. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी मुकेश से नाराज थे क्योंकि उसने बीजापुर में घटिया सड़क निर्माण कार्य के बारे में एनडीटीवी द्वारा प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट पर काम किया था, जहां सुरेश मुख्य ठेकेदार था.
इस खबर के बाद न केवल इस सड़क निर्माण परियोजना पर बल्कि सुरेश द्वारा संचालित दो अन्य परियोजनाओं पर भी जांच शुरू हुई. तीनों सड़क परियोजनाओं की अनुमानित लागत लगभग 170 करोड़ रुपये थी.
सुरेश, रितेश और महेंद्र के अलावा आरोपपत्र में ठेकेदार के भाई दिनेश का भी नाम है. इस मामले में 72 गवाह हैं और साक्ष्य में सीसीटीवी फुटेज और कॉल डेटा रिकॉर्ड विश्लेषण शामिल हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख गुर्जर ने बताया कि चारों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 (हत्या), 238 (अपराध के साक्ष्य को गायब करना या अपराधी को छिपाने के लिए गलत सूचना देना), 61 (आपराधिक साजिश), 239 (सूचना देने के लिए बाध्य व्यक्ति द्वारा अपराध की सूचना देने में जानबूझकर चूक) और 249 (अपराधी को शरण देना) के तहत आरोप लगाए गए हैं.
गुर्जर ने कहा, ‘जांच के दौरान डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की बारीकी से निगरानी की गई और उन्हें आरोपपत्र में उचित रूप से शामिल किया गया. चारों आरोपियों को अदालत से कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं.’
मकसद के बारे में पूछे जाने पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सुरेश मुकेश से इसलिए नाराज थे क्योंकि उन्होंने घटिया सड़क निर्माण कार्य को उजागर किया था. उनके खिलाफ जांच के कारण उनके परिसरों पर जीएसटी छापे भी पड़े और उन पर करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.’
अधिकारी ने बताया, ‘हत्या से पहले सुरेश ने मुकेश को कई बार फोन किया था. उसे चिंता थी… उसका साम्राज्य टूट जाएगा.’
अधिकारी ने बताया, ‘हत्या से कुछ दिन पहले सुरेश ने मुकेश को बीजापुर स्थित अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया था. यहां कुछ लोगों की मौजूदगी में सुरेश ने मुकेश को धमकाया और इस मामले पर आगे कोई रिपोर्ट न करने को कहा. जीएसटी छापे 27 दिसंबर को पड़े और सुरेश मुकेश की रिपोर्ट को ही दोषी ठहराता रहा.’
मुकेश बस्तर के जाने-माने पत्रकार थे, जिन्होंने माओवाद प्रभावित क्षेत्र से अपनी फील्ड रिपोर्ट और आदिवासियों के अधिकारों पर रिपोर्टिंग के लिए पहचान बनाई थी. उन्होंने बस्तर जंक्शन नाम से अपना खुद का यूट्यूब चैनल शुरू किया था. उनकी मौत के समय- इसके 1.59 लाख सब्सक्राइबर और 2.87 करोड़ व्यूज थे, जो अब बढ़कर 2.01 लाख सब्सक्राइबर और 3.6 करोड़ हो गए हैं.
