महाराष्ट्र: सरकार ने प्रशासन से जुड़े ‘भ्रामक ख़बरों’ से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए

महाराष्ट्र सरकार ने विभिन्न मीडिया संस्थानों में प्रशासन और राज्य से संबंधित ख़बरों का विश्लेषण करने और किसी भी ख़बर के ‘गलत या भ्रामक’ होने की स्थिति में तुरंत स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया जारी करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं.

द वायर इलस्ट्रेशन

नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने विभिन्न मीडिया संस्थानों में प्रशासन और राज्य से संबंधित खबरों का विश्लेषण करने और किसी भी खबर के ‘गलत या भ्रामक’ होने की स्थिति में तुरंत स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया जारी करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं.  

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शुक्रवार (28 मार्च) को जारी एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) अथवा आदेश में कहा गया है कि सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (डीजीआईपीआर) प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया सहित विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों में ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ ख़बरों को एकत्रित करेगा. 

प्रिंट मीडिया में ऐसी रिपोर्ट आने पर डीजीआईपीआर को इसे संबंधित सरकारी विभाग के साथ साझा करना होगा, जो इसके बाद आवश्यक जानकारी एकत्र करेगा और इसे 12 घंटे के भीतर डीजीआईपीआर को भेजेगा. 

आदेश में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल मीडिया द्वारा प्रकाशित किसी भी गलत खबर के मामले में संबंधित मंत्री या अधिकारी की प्रतिक्रिया या साउंड बाइट दो घंटे के भीतर डीजीआईपीआर को उपलब्ध कराई जानी चाहिए. 

आदेश के अनुसार, प्रत्येक विभाग को एक संयुक्त सचिव या उप सचिव स्तर के अधिकारी को नियुक्त करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सूचना को जल्द से जल्द एकत्रित कर डीजीआईपीआर को भेजा जाए.  इसके बाद सूचना उसी दिन डीजीआईपीआर की वेबसाइट और ब्लॉग पर प्रकाशित की जाएगी और स्पष्टीकरण जारी करने के लिए संबंधित मीडिया संगठन को भी भेजी जाएगी.

जीआर में कहा गया है कि डीजीआईपीआर यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कार्रवाई भी करेगा कि संबंधित मीडिया संस्थान द्वारा स्पष्टीकरण जारी किया जाए, और राज्य से संबंधित जानकारी को प्रेस सूचना ब्यूरो के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा. 

सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशक बृजेश सिंह ने कहा, ‘इस परिपत्र (जीआर) के माध्यम से सरकार का उद्देश्य शासन से संबंधित महत्वपूर्ण समाचारों का संज्ञान लेकर अपनी दक्षता को बढ़ाना और नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है.’