नई दिल्ली: मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1-5 में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने के अपने फैसले पर भारी आलोचना झेलने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार (22 अप्रैल) को इस कदम को वापस ले लिया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा, ‘अनिवार्य शब्द को हटा दिया जाएगा… त्रि-भाषा का फॉर्मूला बना रहेगा, लेकिन अगर किसी कक्षा में छात्रों की संख्या काफी अधिक है, तो स्कूलों को अन्य भाषा विकल्पों को शामिल करना होगा.’
मालूम हो कि 17 अप्रैल को भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा बनाया जाएगा. एनईपी के अनुसार, इस निर्णय के परिणामस्वरूप हिंदी को मराठी और अंग्रेजी के साथ पढ़ाया जाएगा.
इसके परिणामस्वरूप विपक्षी दलों द्वारा आलोचना के साथ सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. घोषणा के बाद से ही इस फैसले की कई राजनीतिक दलों ने आलोचना की थी.
राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अलावा, जो इस फैसले का सबसे मुखर विरोध कर रही थी, उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) ने भाजपा पर लोगों को भाषाई आधार पर बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया था.
कांग्रेस ने इस कदम को ‘मराठी भाषा पर हमला’ और राज्य की स्वायत्तता को खत्म करने का प्रयास करार दिया था. महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त भाषा परामर्श समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत देशमुख ने भी इस कदम का विरोध किया था.
