नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में ‘आतंकी ढांचे’ पर किए गए सैन्य हमलों – के बाद गुरुवार (8 मई) हुई सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार ने बताया कि इन हमलों में लगभग 100 आतंकियों और उनके सहयोगियों को मार गिराया गया है. सरकार ने यह भी कहा कि अभियान अभी जारी है.
द वायर को पता चला है कि बैठक में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर हुई नागरिकों की मौतों पर भी चर्चा हुई. सरकार ने पार्टी नेताओं को आश्वस्त किया कि हमारी सेना तैयार है और तेजी से जवाब दे रही है. इस बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार और सेना को समर्थन देने का वादा किया, जिसे सरकार ने सराहा और इसे एकता का सकारात्मक संदेश माना.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे) के बाद हुई पहली सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए थे, इस बैठक में भी मौजूद नहीं थे. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को बैठक में उठाया.
इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की. सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा उपस्थित थे. यह पिछले दो हफ्तों में दूसरी सर्वदलीय बैठक थी – पहली बैठक 24 अप्रैल को पहलगाम हमले के दो दिन बाद हुई थी.
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार ने बताया कि बुधवार तड़के पीओके और पाकिस्तान के अंदर नौ ठिकानों पर किए गए सैन्य हमलों में 100 आतंकियों और उनके सहयोगियों को मारा गया. साथ ही बताया गया कि अभियान अभी भी जारी है. बैठक के दौरान पूंछ और अखनूर जैसे इलाकों में पाकिस्तान की गोलीबारी में मारे गए नागरिकों का मुद्दा भी उठा.
विपक्षी नेताओं ने इन इलाकों से लोगों को बाहर निकालने और पीड़ितों को मुआवज़ा देने की बात कही.
‘नेताओं ने समझदारी दिखाई’
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह बैठक बहुत ‘सार्थक’ रही, जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने ‘परिपक्वता’ दिखाई और सरकार को समर्थन दिया.
उन्होंने कहा, ‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई. चूंकि मामला गंभीर था, सभी ने गंभीरता से बात की. राजनाथ सिंह ने नेताओं को ऑपरेशन और सरकार की मंशा की जानकारी दी. सभी नेताओं ने अपनी-अपनी बात रखी और सुझाव भी दिए. मैं मानता हूं कि सभी ने समझदारी दिखाई.’
रिजिजू ने कहा, ‘जब देश बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, तब राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. सभी राजनीतिक दलों ने यही दिखाया और सभी नेताओं ने एक सुर में हमारी सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की. उन्होंने कहा कि वे सरकार और सेना के हर फैसले का समर्थन करेंगे. कुछ सांसदों ने सुझाव दिए कि हमें सतर्क और जागरूक रहना चाहिए. सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, पूरा देश एकजुट है.’
रिजिजू ने आगे कहा, ‘रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की बैठक दिखाती है कि हम सिर्फ सरकार बनाने के लिए राजनीति नहीं करते, बल्कि देश बनाने के लिए करते हैं. यह एक परिपक्व लोकतंत्र की मिसाल है. सभी राजनीतिक दलों का एक सुर में बोलना स्वागतयोग्य है. चूंकि यह ऑपरेशन अभी जारी है, इसलिए कोई अलग ब्रीफिंग नहीं दी जा रही. मैं सभी नेताओं का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने सरकार का साथ दिया और यह एक संवेदनशील और सार्थक बैठक रही.’
‘पीएम मोदी की अनुपस्थिति’
बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री की लगातार दूसरी बार अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर देश को सकारात्मक संदेश देने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए.
बैठक के बाद खरगे ने कहा, ‘हम चाहते थे कि प्रधानमंत्री भी इस सर्वदलीय बैठक में आएं और यह बताएं कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कैसे कदम उठाया और हमारे सैनिकों ने कैसे बहादुरी दिखाई. हम अपने सैनिकों को सलाम करते हैं और उन्हें बधाई देते हैं. हम चाहते थे कि प्रधानमंत्री खुद आकर सबको जानकारी दें. लेकिन वे मौजूद नहीं थे, पिछली बार भी नहीं थे.’
पाकिस्तान की गोलीबारी में नागरिकों की मौत
विपक्षी दलों ने एक सुर में कहा कि सीमा पर बसे नागरिकों को पाकिस्तान की तरफ से हो रही गोलीबारी से सुरक्षा दी जानी चाहिए. रक्षा मंत्रालय ने आज एक अलग बयान में कहा कि पाकिस्तान की गोलीबारी में अब तक 16 लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं.
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बैठक के बाद कहा कि उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पाकिस्तान की गोलीबारी में मारे गए लोगों को ‘आतंकवाद के शिकार’ माना जाए. उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा से संबंधित खर्चों के तहत उन्हें मुआवज़ा दिया जाए और उनके घरों का पुनर्निर्माण किया जाए.’
इसके अलावा, ओवैसी ने बैठक में यह भी कहा कि ‘द रेज़िस्टेंस फ्रंट’ (लश्कर ए तैयबा का एक सहयोगी संगठन, जिसने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी) के खिलाफ वैश्विक स्तर पर अभियान चलाया जाए और पाकिस्तान को फिर से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में डालने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया जाए.
कौन-कौन मौजूद रहा?
विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और असदुद्दीन ओवैसी के अलावा बैठक में सुदीप बंदोपाध्याय (टीएमसी), संजय सिंह (आप), जॉन ब्रिटास (माकपा), ईटी मोहम्मद बशीर (आईयूएमएल), सुप्रिया सुले (एनसीपी), संजय कुमार झा (एनसीपी-एसपी), टीआर बालू (डीएमके), राम गोपाल यादव (सपा), सस्मित पात्रा (बीजद), और पीसी गुप्ता (राजद) शामिल थे.
एनडीए सहयोगी दलों में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (लोजपा), प्रफुल पटेल (एनसीपी), श्रीकांत शिंदे (शिवसेना), लवु श्रीकृष्ण देवरायलु (तेदेपा) और संजय कुमार झा (जदयू) भी मौजूद थे.
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