नई दिल्ली: बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने शुक्रवार (6 जून) को घोषणा की है कि देश में अगला आम चुनाव अप्रैल 2026 के पहले पखवाड़े में होगा. यह चुनाव शेख हसीना को हिंसक तरीके से सत्ता से हटाए जाने के बाद पहला आम चुनाव होगा.
ईद-उल-अजहा से एक दिन पहले यूनुस ने एक घोषणा में कहा, ‘अगला राष्ट्रीय चुनाव अप्रैल 2026 के पहले पखवाड़े के किसी दिन होगा.’
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध है, जब तक कि उसके और उसकी नेतृत्व की कानूनी मामलों का निपटारा नहीं हो जाता.
अन्य अहम पक्षों जैसे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और सेना प्रमुख ने इस साल के अंत तक चुनाव कराने की मांग की है.
हसीना की अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के कारण अब मुख्य चुनावी मुकाबला खालिदा जिया की बीएनपी, जुलाई 2024 के आंदोलन के नेताओं द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है.
यूनुस ने कहा कि उनकी अंतरिम सरकार को ‘तीन जनादेशों’ — ‘सुधार, न्याय और चुनाव’ — के आधार पर सत्ता मिली थी और उन्हें उम्मीद है कि देश अगले ईद-उल-फितर तक सुधार और न्याय के मामले में एक स्वीकार्य स्थिति तक पहुंच जाएंगा. यह बात उन्होंने सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस से कही.
विशेष रूप से उन्होंने कहा, ‘जुलाई के जन आंदोलन में शहीद हुए लोगों के प्रति सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी के तहत, मानवता के खिलाफ अपराधों के मुकदमों में सभी को प्रगति साफ तौर पर दिखेगी.’
उन्होंने बताया, ‘चुनाव आयोग उपयुक्त समय पर विस्तृत रोडमैप पेश करेगा.’
यूनुस ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने ‘सभी दलों से चर्चा की है’ ताकि ‘इतिहास के सबसे स्वतंत्र, निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धी और स्वीकार्य चुनाव’ कराए जा सकें.
उन्होंने आगे कहा, ‘हम ऐसा चुनाव चाहते हैं जो जन आंदोलन के शहीदों की आत्मा को सुकून दे. हम चाहते हैं कि अगली बार सबसे ज़्यादा संख्या में मतदाता, उम्मीदवार और पार्टियां चुनाव में हिस्सा लें.’
हालांकि उन्होंने शेख हसीना या अवामी लीग का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने उनके ‘फासीवादी शासन’ पर परोक्ष रूप से हमला किया. उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता के बाद हर बार जब बांग्लादेश गहरे संकट में गया, तो उसका मुख्य कारण रहा है दोषपूर्ण चुनाव.’
बीबीसी बांग्ला के अनुसार, यूनुस ने कहा, ‘एक राजनीतिक पार्टी बार-बार सत्ता में आने के लिए चुनाव प्रक्रिया का दुरुपयोग कर बर्बर फासीवाद में बदल गई. जो लोग ऐसे चुनाव कराते हैं, वे देश के सामने अपराधी बन जाते हैं. जो पार्टी ऐसे चुनावों से सत्ता में आती है, जनता उसे नापसंद करती है.’
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और अर्थशास्त्री यूनुस ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि वे सभी राजनीतिक दलों से ‘ठोस वादे लें’ कि जब वे संसद में बैठेंगे, तो तय सुधारों को लागू करेंगे और ‘कभी भी, किसी भी परिस्थिति में, आपके लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन नहीं करेंगे.’
यूनुस की अंतरिम सरकार ने अगस्त में सत्ता संभाली, जब शेख हसीना को विरोध प्रदर्शनों के बीच राजधानी ढाका से भागना पड़ा था. शेख हसीना के शासन के खिलाफ दो महीने चले प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबरें थीं.
तब से हसीना भारत में रह रही हैं, जबकि ढाका ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने का अनुरोध किया है. ये मुकदमे बांग्लादेश के तथाकथित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल में चल रहे हैं.
यूनुस ने पिछले साल के अंत में कहा था कि बांग्लादेश में आम चुनाव 2025 के अंत तक या 2026 के पहले हिस्से में कराए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा था कि अगर वोटर लिस्ट को न्यूनतम सुधार के साथ तैयार किया जा सका तो चुनाव 2025 में हो सकते हैं. लेकिन अगर राष्ट्रीय सहमति पर आधारित व्यापक सुधार करने हैं, तो समयसीमा बढ़कर 2026 के पहले हिस्से तक जा सकती है.
इस बीच, देश के सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान ने पिछले महीने कहा था कि आम चुनाव इस साल के अंत तक कराए जाने चाहिए और केवल एक निर्वाचित सरकार ही बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता ला सकती है.
