दिल्ली में दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता और छह छात्रों समेत कई लोग ‘उठाए’ गए, अब तक लापता: छात्र संगठन का आरोप

कैम्पेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं, दो विस्थापन-विरोधी कार्यकर्ताओं और छह छात्रों को 'अधिकारियों' ने उठा लिया है और उनका अब तक कोई पता नहीं है. संगठन ने उनके ठिकाने की जानकारी, सुरक्षा की गारंटी और कानूनी सहायता सुनिश्चित करने की मांग की है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: एक छत्र संगठन कैम्पेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने आरोप लगाया है कि दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं, दो विस्थापन-विरोधी कार्यकर्ताओं और छह छात्रों सहित कई व्यक्तियों को ‘अधिकारियों’ ने उठा लिया है और वे अब तक लापता हैं. इनमें से किसी ने भी अभी तक अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों या सहकर्मियों से संपर्क नहीं किया है.

अपने बयान में सीएएसआर ने इन लोगों के ठिकाने के बारे तुरंत जानकारी देने, उनके शारीरिक रूप से सुरक्षित होने का आश्वासन देने, कानूनी सलाह तक पहुंच सुनिश्चित करने और इस मामले में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है.

सीएएसआर की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इलाक्किया, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान में मास्टर्स की छात्रा हैं, और शिव कुमार, जो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता हैं, को 12 मार्च को उठा लिया गया. वे दयानंद सिंह कॉलेज में फैकल्टी सदस्य सचिन एन. से मिलने गए थे, जो दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डीयूटीए) के पूर्व निर्वाचित कार्यकारी सदस्य, अकादमिक काउंसिल के सदस्य और कॉमन टीचर्स फोरम का हिस्सा हैं. वे ‘साम्राज्यवाद-विरोधी सप्ताह’ की गतिविधियों पर चर्चा करने के लिए वहां गए थे.

समूह के अनुसार, वे लगभग दोपहर 12 बजे कैंपस पहुंचे थे, क्योंकि फैकल्टी सदस्य देर से आने वाले थे, उन्होंने कॉलेज कैंटीन में भोजन किया.

प्रेस नोट में दुकानदारों के हवाले से बताया गया है कि दोपहर 1 बजे के आसपास जेएलएन मेट्रो स्टेशन के पास कॉलेज गेट के बाहर एक महिला एजेंट और सादे कपड़ों में तीन-चार अज्ञात लोगों ने वीआईपी लाइट लगी एक गाड़ी में इलाक्किया को जबरन बैठा लिया. बताया गया कि इलाक्किया ने चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन यह घटना इतनी तेज़ी से हुई कि उन्हें मौका ही नहीं मिला. उसी वाहन में शिव कुमार पहले से मौजूद बताए गए.

बयान के अनुसार, इलाक्किया ने लगभग 1 बजे फैकल्टी सदस्य को मैसेज भेजकर पूछा था कि उन्हें पहुंचने में कितना समय लगेगा. जब उन्होंने 1:30 बजे वापस फोन किया तो उनका मोबाइल पहले ही बंद हो चुका था. संगठन का कहना है कि बाद में स्थानीय दुकानदारों ने इस घटना की जानकारी क्षेत्र के बीट पुलिस अधिकारी को दी.

बयान में यह भी कहा गया है कि एक अन्य कार्यकर्ता मनजीत 13 मार्च से लापता है. वह उसी दिन भीमा कोरेगांव मामले में जेल में बंद वकील सुरेंद्र गाडलिंग की रिहाई की मांग को लेकर आयोजित सीएएसआर कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

इसके अलावा प्रेस नोट में स्थानीय निवासियों के हवाले से कहा गया है कि 13 मार्च की रात 8 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के पास विजय नगर में स्थित भगत सिंह छात्र एकता मंच (bsCEM) के कार्यालय से दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने सात अन्य लोगों को भी उठा लिया.

पहले भी हुई थीं गिरफ्तारियां

अधिकार समूह ने बताया कि शिव कुमार को पहले सिंघु बॉर्डर किसान आंदोलन के दौरान मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर के साथ गिरफ्तार किया गया था. सोनीपत में क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) कार्यालय में हिरासत के दौरान कथित यातना और बाद में पुलिस रिमांड के दौरान हुई घटनाओं से जुड़ा उनका मामला अभी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है.

सीएएसआर के प्रेस नोट के अनुसार, जस्टिस दीपक गुप्ता ने पहले यह टिप्पणी की थी कि शिव कुमार को 16 जनवरी से 23 जनवरी तक अवैध हिरासत में रखा गया था. औपचारिक रूप से गिरफ्तारी दिखाए जाने के लगभग एक महीने बाद उनका जीएमसीएच-32 में मेडिकल जांच हुआ था, इससे पहले उनका पांच बार जांच किया गया था.

हाईकोर्ट के आदेश पर हुए इस जांच में इंस्पेक्टर रविंदर को चोटों के लिए जिम्मेदार माना गया, जबकि अधिकारी ने यह कहकर इनकार किया था कि कुमार को उस केंद्र में लाया ही नहीं गया था.

बयान में कहा गया है कि शिव कुमार अभी तक उन चोटों से पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं, जिससे उनकी वर्तमान सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा होती है.

सीएएसआर ने यह भी कहा कि इलाक्किया, किरण और अक्षय को पिछले वर्ष नवंबर में इंडिया गेट पर वायु प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के बाद एक महीने तक तिहाड़ जेल में रखा गया था.

इसके अलावा बयान में आरोप लगाया गया है कि एहतमाम, बादल और गौरव को लगभग आठ महीने पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सप्ताह से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा और उनके साथ कथित रूप से यातना भी की गई.