श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना कोई लिखित कारण बताए शनिवार (7 जून) को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में सामूहिक ईद की नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को भी कथित तौर पर घर में नज़रबंद कर दिया गया है.
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज ने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में कश्मीर की सबसे बड़ी मस्जिद जामिया मस्जिद को भी अधिकारियों ने बंद कर दिया है, जहां शनिवार सुबह ईद की नमाज़ का आयोजन होना था.
मीरवाइज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद लगातार सातवें साल ईद की पूर्व संध्या पर इस ऐतिहासिक मस्जिद को बंद कर दिया गया.
उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम बहुल क्षेत्र में मुसलमानों को प्रार्थना करने के उनके मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है – यहां तक कि दुनिया भर में मनाए जाने वाले उनके सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर पर भी! ये हम पर शासन करने वालों और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के लिए कितनी शर्म की बात है, जो हमारे अधिकारों को बार-बार कुचले जाने पर भी चुप रहना पसंद करते हैं.’
Eid Mubarak! Yet again, Kashmir wakes up to the sad reality: no Eid prayers at Eidgah, and Jama Masjid locked down — for the 7th straight year. I too have been detained at my home.
In a Muslim-majority region, Muslims are deprived of their fundamental right to pray — even on… pic.twitter.com/DFM1y0t9ce— Mirwaiz Umar Farooq (@MirwaizKashmir) June 7, 2025
मीरवाइज ने द वायर को बताया कि सुरक्षा बलों ने शनिवार सुबह बिना किसी आधिकारिक सूचना के उनके घर में प्रवेश पर बैरिकेडिंग कर दी.
उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मुझे ईद की नमाज़ अदा करने के लिए बाहर नहीं आने दिया. यह कश्मीर के मुसलमानों के बुनियादी धार्मिक अधिकार पर हमला है.’
ईदगाह मैदान में ईद की नमाज़ आयोजित करने की अनुमति नहीं
शुक्रवार (6 जून) को एक बयान में ऐतिहासिक मस्जिद के प्रबंध निकाय अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद ने कहा कि अधिकारियों ने ईदगाह मैदान में ईद की नमाज़ आयोजित करने की अनुमति नहीं दी, जहां कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से हज़ारों लोग सामूहिक नमाज़ में भाग लेने के लिए इकट्ठा होते थे, जब जम्मू-कश्मीर एक राज्य था.
प्रबंध निकाय के बयान में कहा गया कि ईदगाह मैदान में नमाज़ के आयोजन की अनुमति न दिए जाने पर उसे ‘गहरा अफसोस’ है, जिसकी योजना ‘दीर्घकालिक इस्लामी परंपरा और लोगों की सामूहिक धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए’ बनाई गई थी.
बयान में कहा गया था कि इस इनकार के कारण शनिवार की सुबह सामूहिक नमाज़ जामिया मस्जिद में आयोजित की जाएगी, जहां मीरवाइज़ ‘ईद और कुर्बानी (बलिदान) के दर्शन और भावना’ पर अपनी बात रखेंगे.
बयान में कहा गया है, ‘औकाफ सभी नमाज़ियों से बड़ी संख्या में जामा मस्जिद में ईद की नमाज़ में शामिल होने और एकता, त्याग और अल्लाह की इच्छा के प्रति समर्पण के संदेश में भाग लेने का आग्रह करता है, जिसका ईद-उल-अजहा में समावेश है.’

हालांकि, श्रीनगर के डाउनटाउन के नौहट्टा इलाके में स्थित 14वीं सदी की इस मस्जिद को शनिवार को बंद कर दिया गया और पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने ईद की नमाज़ के लिए इकट्ठा होने की कोशिश करने वाले नमाज़ियों को वापस भेज दिया. मीरवाइज को भी उनके घर में नजरबंद कर दिया गया.
इस्लामी कैलेंडर के पवित्र दिनों में मस्जिद में सामूहिक नमाज़ की अनुमति नहीं
मालूम हो कि यह पहली बार नहीं है कि अधिकारियों ने ईद की पूर्व संध्या पर लिखित में कोई कारण बताए बिना कश्मीर की सबसे बड़ी मस्जिद को नमाज़ियों के लिए बंद कर दिया है.
जम्मू-कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के बाद अधिकारियों ने अंजुमन को इस्लामी कैलेंडर के पवित्र दिनों में मस्जिद में सामूहिक नमाज़ आयोजित करने की अनुमति नहीं दी है.
इससे पहले 31 मार्च को ईद-उल-फितर के दिन अधिकारियों ने मस्जिद को बंद कर दिया था, जबकि मीरवाइज को भी घर में नज़रबंद कर दिया गया था.
अधिकारियों ने शुक्रवार, शब-ए-कद्र और जुम्मत-उल-विदा सहित महत्वपूर्ण इस्लामी अवसरों पर भी मस्जिद को बंद रखा है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा प्रशासन ने अनौपचारिक रूप से संवेदनशील शहर के इलाके में कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की आशंकाओं का हवाला देते हुए सामूहिक नमाज़ पर प्रतिबंध को उचित ठहराया है.
गौरतलब है कि यह इलाका भारत विरोधी और स्वतंत्रता समर्थक प्रदर्शनों का केंद्र रहा है.
इस बीच केंद्र शासित प्रदेश के बाकी हिस्सों में ईद की नमाज़ अदा की गई और शनिवार को श्रीनगर के हज़रतबल में असर-ए-शरीफ़, बडगाम जिले के चरारी शरीफ़ में खानकाह-ए-मौला और अन्य मस्जिदों और धार्मिक स्थलों सहित प्रमुख धर्मस्थलों और मस्जिदों में हज़ारों लोग एकत्र हुए.
गौरतलब है कि 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के भाजपा के नेतृत्व वाले वक्फ बोर्ड ने केंद्र शासित प्रदेश के अधिकांश धर्मस्थलों और मस्जिदों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है. इस निर्णय की मीरवाइज और अन्य राजनीतिक दलों ने आलोचना की है.
