तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के विदेश दौरे पर उठाए सवाल

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि पहलगाम हमले के बाद पिछले एक महीने में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 33 देशों की यात्रा पर गया, लेकिन इनमें से कितने देशों ने भारत को खुलकर समर्थन दिया? चूंकि बनर्जी खुद इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, उनका बयान सरकारी दावों पर प्रश्नचिह्न लगाता है.

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भारत सरकार के सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में दक्षिण कोरिया में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी. (फोटो साभार: एक्स/@abhishekaitc)

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश दौरों पर भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पर गहरे सवाल उठाए हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या 33 देशों का दौरा करने के बाद भी भारत को कोई ठोस समर्थन हासिल हुआ है? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिनिधिमंडलों के सभी सदस्यों से मुलाकात के कुछ ही दिन बाद, अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया, ‘पहलगाम हमले के बाद पिछले एक महीने में 33 देशों से संपर्क किया गया, लेकिन इनमें से कितने देशों ने भारत को खुलकर समर्थन दिया?’ 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भारत के पक्ष में समर्थन हासिल करने के लिए 33 देशों के दौरे पर केंद्र सरकार द्वारा भेजा गया था. टीएमसी सांसद बनर्जी भी उस प्रतिनिधमंडल का हिस्सा थे. उनके द्वारा उठाये प्रश्न प्रतिनिधमंडल की सफलता पर सरकारी दावों को झुठलाते हैं. 

बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए पांच अहम बिंदुओं पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की.

बनर्जी ने लिखा कि पहलगाम हमले के बाद भारत ने 33 देशों से संपर्क किया, लेकिन अब तक कितनों ने भारत को स्पष्ट समर्थन दिया, यह सवाल अनुत्तरित है. उन्होंने कहा, ‘अगर हम सच में ‘विश्वगुरु’ हैं और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, तो फिर आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक ने हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान को $1 बिलियन और $40 बिलियन की मदद और निवेश कैसे स्वीकृत कर दी?’

उन्होंने यह भी पूछा कि ‘बार-बार आतंकवाद में लिप्त रहने वाला देश वैश्विक दंड पाने से कैसे बच गया? और उल्टा उसे इनाम भी मिला. और आश्चर्यजनक रूप से पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की काउंटर टेररिज़्म कमेटी का उपाध्यक्ष कैसे बन गया?’

उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए. बनर्जी ने पूछा कि ‘आखिर चार आतंकी भारत की सीमाओं में कैसे घुस आए और इतने बड़े पैमाने पर हमला करने में सफल कैसे हो गए, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई.’ 

उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की गंभीर विफलता बताया और पूछा कि इस चूक के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई है. ‘राष्ट्रीय सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक की जवाबदेही सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही?’

आईबी प्रमुख को इनाम क्यों?

बनर्जी ने खुफिया तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ‘अगर यह हमला खुफिया जानकारी के अभाव का नतीजा था, तो खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख को हमले के एक महीने बाद एक साल का सेवा विस्तार कैसे और क्यों दिया गया? क्या विफलता पर इनाम दिया जा रहा है?’ 

उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब सरकार पेगासस जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और यहां तक कि न्यायाधीशों के खिलाफ कर सकती है, तो फिर आतंकियों के खिलाफ ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया?

तीसरे सवाल में बनर्जी ने उन चार आतंकियों के बारे में जानकारी मांगी, जिन्होंने पहलगाम में हमला किया था. उन्होंने पूछा, ‘क्या वे मारे गए हैं या अब भी ज़िंदा हैं? और अगर उन्हें मार गिराया गया है, तो सरकार ने इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा क्यों नहीं की? वहीं अगर वे अब भी फरार हैं, तो सरकार की चुप्पी क्यों है? क्या देश को यह जानने का अधिकार नहीं है?’

बनर्जी ने यह भी पूछा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत कब वापिस लेगा? 

अमेरिका की मध्यस्थता पर सरकार की चुप्पी

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का हवाला दिया कि उन्होंने भारत को व्यापार के वादे के साथ सीज़फायर के लिए राज़ी किया. बनर्जी ने पूछा कि ‘क्या 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं को दरकिनार कर इस तरह का कोई समझौता किया गया?’

उन्होंने कहा कि सरकार बताये कि ऐसा फैसला किन परिस्थितियों में और किस दबाव में लिया गया.