नई दिल्ली: जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में 11 जून को लापता हुए मेईतेई-पंगल समुदाय के 22 वर्षीय अब्दुल कादिर का शव 17 जून को पश्चिमी इंफाल में दफनाया हुआ मिला.
रिपोर्ट के मुताबिक, मिलिशिया समूह अरमबाई तेंग्गोल ने एक बयान में स्वीकार किया है कि उनके सदस्य हत्या में शामिल थे.
इस संबंध में कादिर के चाचा नजीर खान ने 11 जून को वांगोई पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद 17 जून को पुलिस द्वारा कादिर का शव जमीन खोदकर निकाला गया.
मालूम हो कि मणिपुर में इस साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है, लेकिन 2023 से भयंकर जातीय हिंसा की चपेट में आए इस राज्य में शांति बहाल नहीं हुई है. 25 महीने से ज़्यादा समय से चल रही जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और हज़ारों लोग विस्थापित हुए हैं.
जहां राज्य प्रशासन का दावा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है, वहीं इस तरह की घटनाएं इस दावे पर सवालिया-निशान खड़े करती हैं.

उल्लेखनीय है कि कादिर इंफाल पश्चिम में पाओबिटेक मायाई लीकाई के निवासी थे और मुस्लिम मेईतेई-पंगल समुदाय के सदस्य थे. यूनाइटेड मेईतेई पंगल समुदाय (यूएमपीसी) ने बताया कि उनके पास सरकार द्वारा जारी किया गया ‘65% मानसिक रूप से विकलांग’ प्रमाण पत्र था.
कादिर का परिवार बीपीएल यानी गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आता है. उनकी मां मीना बीबी सब्जी बेचने का काम करती हैं.
इस बीच 17 जून को जारी एक प्रेस नोट में अरमबाई तेंग्गोल ने पुष्टि की कि उनके कुछ सदस्य, जिनमें उनकी क्विक रिस्पांस टीम यूनिट 27 के सदस्य भी शामिल हैं, कथित तौर पर इस हत्या में शामिल थे. हालांकि, संगठन ने इस संलिप्तता के पीछे कोई कारण नहीं बताया.
इस प्रेस नोट में कहा गया है, ‘यह बात सामने आई है कि पाओबिटेक मायाई लीकाई के चेसाम अब्दुल कादिर नामक व्यक्ति की हत्या कर दी गई है. युमनाम हुइड्रोम माखा लीकाई के कुछ लोग और एटी यूनिट 27 क्यूआरटी क्षेत्र में रहने वाले युमनाम हुइड्रोम के कुछ सदस्य कथित तौर पर इसमें शामिल हैं. पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है.’
बयान में आगे लिखा है, ‘क्यूआरटी टीम के कुछ सदस्यों ने पहले ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. अरमबाई तेंग्गोल ने पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के साथ पूरा सहयोग जाहिर किया है. हम आम जनता, खासकर हमारे मेईतेई और मेईतेई पंगल भाइयों और बहनों से भी ईमानदारी से अपील करते हैं कि वे इस मुद्दे को सांप्रदायिक न बनाएं और शांति और सद्भाव बनाए रखें.’
मालूम हो कि मेईतेई सशस्त्र समूह अरमबाई तेंग्गोल का नाम पिछले साल घाटी के जिलों में हिंसा, अपहरण और आगजनी से संबंधित कई एफआईआर में दर्ज किया गया है.
मणिपुर पुलिस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘चेसम अब्दुल कादिर के लापता होने के मामले की आगे की जांच में पता चला कि उन्हें मार कर कहीं और दफना दिया गया था. 17 जून को एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट, फॉरेंसिक टीम और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में उनका शव को निकाला गया. इस संबंध में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है. नौ संदिग्धों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है… इसमें शामिल सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.’

मौके पर मौजूद सूत्रों ने द वायर को बताया कि 17 जून को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी नौ संदिग्ध अरमबाई तेंग्गोल के सदस्य हैं. इसे और कई अन्य दावों की पुष्टि करने के लिए द वायर ने मणिपुर पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पुलिस द्वारा आधिकारिक नोट का हवाला देने के लिए कहा गया.
वहीं, इस घटनाक्रम के बाद राज्य के मुस्लिम इलाकों में न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है. पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और जांच में सहयोग करने का आग्रह किया है.
यूनाइटेड मीतेई-पंगल कमेटी (यूएमपीसी) ने इस कृत्य को ‘बर्बर’ और विकलांगों के लिए संवैधानिक और मानवाधिकार सुरक्षा का घोर उल्लंघन बताया है.
यूएमपीसी ने सभी शेष अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी, आरोपियों को फांसी की सज़ा, उनके खिलाफ हत्या और अपहरण की धाराएं लगाने के साथ ही विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत प्रावधानों को लागू करने, मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को हस्तांतरित करने और कादिर के परिवार को अनुग्रह मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है.
गौरतलब है कि 13 और 14 जून को मणिपुर पुलिस ने शांति बहाल करने के अपने प्रयासों में घाटी के कई जिलों में रात भर संयुक्त अभियान में 300 से अधिक लूटे गए हथियार, 10,000 राउंड गोला-बारूद, हथगोले और विस्फोटक बरामद किए थे.
