व्हाइट हाउस में पाक सेना प्रमुख की मेज़बानी कर ट्रंप ने कहा: युद्ध रोकने के लिए आभार व्यक्त करना चाहता था

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ह्वाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को आमंत्रित कर भारत-पाक युद्ध रोकने में उनकी भूमिका के लिए आभार जताया.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जून को ह्वाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की दोपहर के भोजन पर मेजबानी की. यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बिना पाकिस्तानी सेना प्रमुख की मेजबानी की.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप से जब बाद में पत्रकारों ने इस मुलाकात के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि उन्हें मुनीर से मिलकर ‘सम्मानित’ महसूस हुआ.

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को ह्वाइट हाउस में इसलिए आमंत्रित किया था, ताकि पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध को रोकने में उनकी भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया जा सके.

मालूम हो कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे. इसके बाद संघर्ष विराम की घोषणा किए जाने तक करीब चार दिन सीमा पर गोलीबारी और हमले जारी रहे.

ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें यहां आमंत्रित किया क्योंकि मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता था कि उन्होंने जंग की ओर कदम नहीं बढ़ाया. और मैं प्रधानमंत्री मोदी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जो कुछ दिन पहले ही यहां से गए हैं.’

ज्ञात हो कि ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उनके प्रयासों से पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध का खतरा टल गया.

उन्होंने आगे कहा, ‘हम भारत और पाकिस्तान के साथ व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं. इन दो बहुत ही समझदार लोगों ने एक ऐसे युद्ध को आगे न बढ़ाने का फैसला किया, जो संभावित रूप से परमाणु युद्ध बन सकता था. पाकिस्तान और भारत दोनों बड़ी परमाणु शक्तियां हैं.’

पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का आह्वान किया

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ह्वाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि ट्रंप मुनीर की मेजबानी कर रहे थे, क्योंकि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को रोकने के लिए राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का आह्वान किया था.

ट्रंप ने ईरान और इज़रायल के मुद्दे पर पाकिस्तानी जनरल से बातचीत के सवाल पर कहा, ‘वे (पाकिस्तान) ईरान को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, शायद दूसरों से बेहतर और वह मौजूदा हालात से ख़ुश नहीं हैं. ऐसा नहीं है कि उनके इज़रायल से संबंध ख़राब हैं. वे दोनों को जानते हैं और वास्तव में शायद ईरान को बेहतर जानते हैं.  जो कुछ हो रहा है, वह उसे देख रहे हैं और मुझसे सहमत हैं.’

रॉयटर्स ने बताया है कि मुनीर से उम्मीद की जा रही थी कि वह ट्रंप पर दबाव डालेंगे कि वे ईरान के साथ इज़रायल के युद्ध में शामिल न हों. वाशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास का एक हिस्सा अमेरिका में ईरान के हितों का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि तेहरान के अमेरिका के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं.

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने बताया कि आंतरिक सूत्रों की मानें, तो यह बैठक नियमित राजनयिक चैनलों के माध्यम से आयोजित नहीं की गई थी, बल्कि सलाहकारों, व्यापारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के एक समूह द्वारा ‘अपरंपरागत प्रयासों’ का परिणाम थी.

गौरतलब है कि भारत के इस आयोजन से खुश होने की संभावना नहीं है. खास तौर पर यह देखते हुए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिकी मध्यस्थता के दावों को नकारने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने फिर से जोर देकर कहा कि उन्होंने दक्षिण एशियाई देशों के बीच ‘युद्ध रोका है.’

इस दोपहर भोज से पहले एक रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘ठीक है, मैंने युद्ध रोक दिया है… मैं पाकिस्तान से प्यार करता हूं. मुझे लगता है कि मोदी एक शानदार इंसान हैं. मैंने कल रात उनसे बात की. हम भारत के मोदी के साथ व्यापार समझौता करने जा रहे हैं, लेकिन मैंने पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध रोक दिया है.’