गृह मंत्री अमित शाह के अंग्रेज़ी को लेकर शर्मिंदगी वाले बयान की विपक्ष ने आलोचना की

एक पुस्तक विमोचन के अवसर पर अमित शाह ने कहा था कि 'देश में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म महसूस होगी.' विपक्ष के नेताओं ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा है कि अंग्रेजी सीखना आर्थिक रूप से उपयोगी है और आरोप लगाया कि शाह भारत की भाषाई बहुलता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं.

अमित शाह. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार (20 जून) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अंग्रेज़ी को शर्मिंदगी से जोड़ने वाली उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि जल्द ही भारत में लोगों को अंग्रेजी बोलने में शर्म महसूस होगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दल के नेताओं का कहना है कि अंग्रेजी सीखना आर्थिक रूप से उपयोगी है. साथ ही आरोप लगाया कि इस तरह के बयान से शाह भारत की भाषाई बहुलता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं.

मालूम हो कि दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन के अवसर पर बोलते हुए अमित शाह ने गुरुवार को कहा था कि ‘अब एक ऐसे समाज का निर्माण अब दूर नहीं है, जहां इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म महसूस होगी.’

शाह ने आगे कहा था कि हमारे देश, इसके इतिहास, इसकी परंपराओं और हमारे धर्मों’ को समझने के लिए ‘विदेशी भाषा’ का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

गृह मंत्री ने उम्मीद जताई थी कि ऐसा करने में कठिनाई के बावजूद भारतीय समाज ‘एक बार फिर’ अपनी भाषा का उपयोग करके अपने देश को चलाएगा, सोचेगा, शोध करेगा, समाधान निकालेगा और दुनिया का नेतृत्व भी करेगा.’

विपक्ष की आलोचना

हालांकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अंग्रेजी आपकी मातृभाषा जितनी ही आवश्यक है, क्योंकि इससे रोज़गार मिलेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा.

उन्होंने अंग्रेजी पढ़ाते समय भारतीय भाषाओं को संजोने की भी वकालत की.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नहीं चाहते कि भारत का गरीब बच्चा अंग्रेजी सीखे, क्योंकि वो नहीं चाहते कि लोग सवाल पूछें, आगे बढ़ें, बराबरी करें.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘अंग्रेजी बांध नहीं, पुल है. अंग्रेजी शर्म नहीं, शक्ति है. अंग्रेजी जंजीर नहीं – जंजीरें तोड़ने का औजार है.’

तमिलनाडु स्थित द्रविड़ मुनेत्र कषगम पार्टी की राज्यसभा सांसद के कनिमोझी ने भी राज्य पर हिंदी को ‘थोपने’ का विरोध किया है.

उन्होंने कहा कि केवल एक चीज जिस पर (किसी को) शर्म आनी चाहिए’ वह है, वह ‘अपनी इच्छा को लोगों पर थोपना और भारत की बहुलतावाद को नष्ट करने की कोशिश करना.’

वहीं, पड़ोसी राज्य केरल के शिक्षा मंत्री आर. बिंदु ने आरोप लगाया कि शाह अंग्रेजी के खिलाफ बोलकर हिंदी थोपने की कोशिश कर रहे हैं.

द हिंदू ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता के हवाले से कहा कि गृह मंत्री की टिप्पणी उनकी ‘संकीर्ण राजनीति’ को दर्शाती है और ‘जितनी संभव हो उतनी भाषाएं सीखने से ज्ञान में वृद्धि होती है. इस तरह के बयान से ‘छात्रों का वैश्विक दृष्टिकोण संकीर्ण हो जाएगा.’

केरल से राज्यसभा सांसद और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य पी. संदोष कुमार ने पीटीआई से कहा कि शाह ‘भारत की भाषाई विविधता को कलंकित करने और आरएसएस-भाजपा के सांस्कृतिक बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा देने’ की कोशिश कर रहे हैं.

इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस की नेता और राज्यसभा में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने वाली सांसद सागरिका घोष ने कहा कि भारतीयों को ‘किसी भी भाषा पर शर्म नहीं आनी चाहिए’.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘श्री अमित शाह की बेतुकी बकवास. अंग्रेजी पूरे भारत में एक संपर्क भाषा है, (यह) उत्साहवादी है, वैश्विक लाभ प्रदान करती है और लाखों लोग अंग्रेजी के ज्ञान की मांग करते हैं.’