असम-मेघालय सीमा पर ताज़ा भूमि विवाद के बाद तनाव बढ़ा

असम-मेघालय सीमा पर बुधवार को मेघालय के पश्चिमी जयंतिया हिल्स में लापांगप और आसपास के क्षेत्रों से 400 से अधिक ग्रामीणों ने अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए असम के कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद द्वारा बनाए गए एक बागान पर धावा बोल दिया, जिसके बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: X/@karbianglongpol)

नई दिल्ली: असम-मेघालय सीमा पर बुधवार (25 जून) को एक बार फिर तनाव पैदा हो गया, जब मेघालय के पश्चिमी जयंतिया हिल्स में लापांगप और आसपास के क्षेत्रों से 400 से अधिक ग्रामीणों की भीड़ ने छात्र संघों और अन्य समूहों के समर्थन से असम के कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (केएएसी) द्वारा बनाए गए एक बागान पर धावा बोल दिया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केएएसी पर मेघालय क्षेत्र में अवैध रूप से अतिक्रमण करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने लकड़ी के शेड को तोड़ दिया और सैकड़ों पौधों को उखाड़ दिया, जिससे टकराव शुरू हो गया. इसके बाद असम पुलिस द्वारा आंसू गैस के पांच राउंड फायर किए जाने से स्थिति और बिगड़ गई. कथित तौर पर कार्बी के स्थानीय लोगों ने खेतों में बने दो अस्थायी ढांचों को भी आग लगा दिया.

जिला एसपी चेम्फांग सिरती ने कहा, ‘करीब 400 लोगों की भीड़ ने बागान क्षेत्र में प्रवेश किया और पौधे उखाड़ दिए. दोनों प्रशासनों ने भीड़ को नियंत्रित करने और तितर-बितर करने का प्रयास किया. स्थिति अब नियंत्रण में है.’

यह घटना ब्लॉक I में हुई, जो 884.9 किलोमीटर लंबी असम-मेघालय सीमा पर लंबे समय से विवादित क्षेत्र है. पश्चिमी जयंतिया हिल्स के डिप्टी कमिश्नर अभिनव कुमार सिंह ने पुष्टि की कि केएएसी द्वारा ‘बिना किसी पूर्व समन्वय के’ और चल रहे शांति प्रयासों के बावजूद वृक्षारोपण किया गया.

सिंह ने कहा, ‘हमने संयम बरतने की सलाह दी थी क्योंकि सुबह तहपत गांव में शांति बैठक होनी थी. लेकिन असम की तरफ से कोई नहीं आया, जिससे ग्रामीणों को मामले को अपने हाथों में लेना पड़ा. अब पौधरोपण रोक दिया गया है और स्थिति पर नज़र रखने के लिए पुलिस के साथ-साथ तीन सीमा मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं.’

इस विरोध प्रदर्शन को नागरिक समाज और छात्र समूहों का पुरज़ोर समर्थन मिला है. खासी छात्र संघ (केएसयू) के एक नेता ने चेतावनी दी, ‘यह एक संदेश है. अगर राज्य नहीं कर सकता तो हम अपनी ज़मीन की रक्षा करेंगे. आंसू गैस के बावजूद हम पीछे नहीं हटे.’

जयंतिया छात्र संघ (जेएसयू) के महासचिव नीलकी मुखिम ने कार्बी पक्ष पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए 2023 के समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने पूर्व सहमति के बावजूद फिर से पौधे लगाना शुरू कर दिया. आज की कार्रवाई ज़रूरी थी.’

यह विरोध प्रदर्शन 2 जून को गुवाहाटी में मेघालय के सीएम कॉनराड के संगमा और असम के सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा के बीच सीमा वार्ता के दूसरे मुख्यमंत्री-स्तरीय दौर के कुछ ही हफ्तों बाद हुआ है. यह बैठक लंबे समय से लंबित थी – मूल रूप से 17 मई, 2022 को वार्ता के पहले दौर के बाद योजना बनाई गई थी, जहां दोनों नेता ब्लॉक I और ब्लॉक II सहित विवादित क्षेत्रों का संयुक्त रूप से दौरा करने के लिए सहमत हुए थे.

लेकिन 22 नवंबर, 2022 को मुकरोह गोलीबारी से यह गति टूट गई, जिसमें कथित तौर पर अवैध लकड़ी ले जा रहे एक ट्रक को रोके जाने के बाद छह लोग मारे गए – उनमें से एक वन रक्षक था. ब्लॉक I के दूसरे हिस्से में हुई हत्याओं ने व्यापक आक्रोश और अशांति को जन्म दिया, जिससे सभी संवाद रुक गए.

असम-मेघालय सीमा विवाद

असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद करीब 50 साल पुराना है. हालांकि हाल के वर्षों में इसे हल करने के प्रयासों में तेजी लाई गई है. दोनों राज्यों की सीमा करीब 884.9 किमी लंबी है.

मालूम हो कि मेघालय को असम से अलग करके 1972 में गठन किया गया था, लेकिन नए राज्य ने असम पुनर्गठन अधिनियम 1971 को चुनौती दी थी, जिसने मिकिर हिल्स या वर्तमान कार्बी आंगलोंग क्षेत्र के ब्लॉक एक और दो को असम को दे दिया. जिसके बाद 12 सीमावर्ती स्थानों को लेकर विवाद शुरू हुआ.

मेघालय का तर्क है कि ये दोनों ब्लॉक तत्कालीन यूनाइटेड खासी और जयंतिया हिल्स जिले का हिस्सा थे, जब इसे 1835 में अधिसूचित किया गया था. वर्तमान में 733 किलोमीटर असम-मेघालय सीमा पर विवाद के 12 बिंदु हैं.

मार्च 2022 में हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार, पहले चरण में निपटारे के वास्ते लिए गए 36.79 वर्ग किमी विवादित क्षेत्र में से असम को 18.46 वर्ग किमी और मेघालय को 18.33 वर्ग किमी का पूर्ण नियंत्रण मिलेगा.

मेघालय मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने विधानसभा में बताया था कि मेघालय-असम सीमा पर 36 विवादित गांवों में से 30 गांवों को दोनों राज्यों की क्षेत्रीय समितियों ने मेघालय में रहने देने की सिफारिश की थी.

19 जनवरी 2022 को असम और मेघालय मंत्रिमंडलों ने दो पूर्वोत्तर राज्यों के बीच पांच दशक पुराने सीमा विवाद को हल करने के लिए ‘गिव-एंड-टेक’ फॉर्मूले को मंजूरी दी थी. दोनों पक्षों ने 12 विवादित क्षेत्रों में विवाद को चरणबद्ध तरीके से सुलझाने का संकल्प लिया था.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने हुई दूसरे दौर की वार्ता के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने 15 अगस्त 2025 तक छह क्षेत्रों में सीमा स्तंभों का निर्माण शुरू करने पर सहमति जताई थी.

सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों के बीच झड़पें

पिछले कुछ वर्षों में दोनों पड़ोसी राज्यों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले विभिन्न समुदायों के बीच कई झड़पें देखी हैं.

नवंबर 2022 में सीमा में असम-मेघालय अंतरराज्यीय सीमा पर हुई हिंसा के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गए थे. असम ने मेघालय के यात्रा प्रतिबंध लगा दिया था.

22 नवंबर 2022 को कथित तौर पर अवैध लकड़ी ले जा रहे एक ट्रक को तड़के असम के वनकर्मियों द्वारा रोकने के बाद असम-मेघालय सीमा पर मुकरोह गांव में भड़की हिंसा में एक वनकर्मी सहित छह लोगों की मौत हो गई थी. इनमें मेघालय के पांच नागरिक और असम वन सुरक्षा बल के कर्मचारी बिद्यासिंह लख्ते शामिल थे.

इससे पहले अगस्त 2021 में असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले और मेघालय के री-भोई जिले के बीच का क्षेत्र तनावपूर्ण हो गया था.

25 अगस्त, 2021 को स्थिति तब गंभीर हो गई थी, जब मेघालय के कुछ लोगों ने स्थानीय पुलिस के साथ पश्चिम कार्बी आंगलोंग के उमलाफेर इलाके के पास कथित रूप से असम सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की थी. उसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस आमने-सामने आ गई थीं.