नई दिल्ली: मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाकर्मियों के यौन उत्पीड़न से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डालने वाली जस्टिस हेमा समिति की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज सभी 35 मामलों में आगे की कार्रवाई रोक दी है.
इस मामले को लेकर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार (25 जून) को केरल हाईकोर्ट को सूचित किया कि क्योंकि कोई भी पीड़िता अपना बयान देने के लिए आगे नहीं आई, इसलिए सभी यौन उत्पीड़न संबंधी केस वापस ले लिए गए हैं.
मालूम हो कि जस्टिस हेमा समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि मलयालम फिल्म उद्योग (मॉलीवुड) में महिला अभिनेत्रियों को काम के बदले अक्सर ‘समझौता’ करने का दबाव जाता है. इस पुरुष वर्चस्ववादी उद्योग में महिला कलाकारों का यौन शोषण और उत्पीड़न करने के बाद उन्हें मुंह न खोलने की धमकी भी दी जाती है.
किसी को भी बयान देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट
इस रिपोर्ट में यौन शोषण, अवैध प्रतिबंध, भेदभाव, नशीली दवाओं और शराब का दुरुपयोग, वेतन में असमानता और कुछ मामलों में अमानवीय कामकाजी परिस्थिति की भयानक कहानियां बताई गई थीं.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, एसआईटी की नई रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस सीएस सुधा की पीठ ने कहा कि एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए अपराधों में फिलहाल आगे कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है.
ज्ञात हो कि हाईकोर्ट हेमा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. नए आदेश के बाद अब सभी मामले खत्म हो गए हैं.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल हाई कोर्ट में जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस सीएस सुधा की स्पेशल बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी को भी बयान देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी उल्लेख किया कि केरल सरकार ने अगस्त 2025 के पहले सप्ताह में एक फिल्म कॉन्क्लेव आयोजित करने का निर्णय लिया है. इसमें फिल्म नीति और उद्योग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी.
कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की है. अदालत ने ये भी निर्देश दिया कि यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के लिए गठित एसआईटी की नोडल एजेंसी का संचालन जारी रहेगा. और मौजूदा दिशा-निर्देश तब तक लागू रहेंगे जब तक कि नया कानून लागू नहीं हो जाता.
जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट को पांच साल बाद सार्वजनिक किया गया था
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में एक अभिनेत्री के अपहरण और यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं की समस्याओं, सुरक्षा, वेतन और काम करने की स्थितियों तथा अन्य मुद्दों पर प्रकाश डालने के लिए इस समिति का गठन किया था.
कमेटी ने दिसंबर 2019 में सरकार को सौंपी गई थी, जिसे अदालत के हस्तक्षेप के बाद करीब पांच सालों बाद 2024 में सार्वजनिक किया गया. इस रिपोर्ट को लेकर काफ़ी हंगामा देखने को मिला और मलयालम सिनेमा के सभी शक्तिशाली अभिनेताओं के निकाय को भंग कर दिया गया.
पैनल की पूरी रिपोर्ट केरल उच्च न्यायालय को सौंपी गई थी, जिसने निर्देश दिया था कि इसे फिल्म उद्योग में यौन शोषण की शिकायतों की जांच के लिए एसआईटी को सौंप दिया जाए.
