नई दिल्ली: इंदौर प्रेस क्लब में गुरुवार (24 जुलाई) की सुबह आयोजित ग़ैर सरकारी संगठन- हाउल ग्रुप की प्रेस वार्ता में कुछ अज्ञात लोगों ने धर्मांतरण के आरोप लगाते हुए हंगामा किया और समूह के सदस्यों के साथ कथित तौर पर मारपीट की.
ग्रुप के मुताबिक, यह व्यवधान अचानक उग्र हो गया और इसके संस्थापक सौरव बनर्जी सहित कई सदस्यों को धक्का दिया गया और परेशान किया गया. समूह ने आरोप लगाया है कि हमलावर संभवतः दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं.
यह प्रेस वार्ता देवास ज़िले के शुक्रवासा गांव में बीते कुछ महीनों से हाउल ग्रुप के खिलाफ चल रहे कथित दुष्प्रचार, डराने-धमकाने और प्रशासनिक दखल के विरोध में बुलाई गई थी. समूह वहां पिछले पांच वर्षों से सामाजिक और सांस्कृतिक कार्य कर रहा है.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों ने प्रेस वार्ता के दौरान हंगामा किया और उसे बाधित किया. वीडियो में यह भी साफ दिखाई देता है कि जब हाउल ग्रुप के सदस्य प्रेस क्लब से बाहर निकले, तो वे लोग उनके पीछे गए और उनके साथ मारपीट की. हमलावरों ने उन पर जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए.
इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों और पुलिस के सामने बजरंग दल गुंडई पर उतर आया, इसे गुंडई से कम और क्या कहेंगे … सौरभ पेशे से पत्रकार हैं, वो और उनके कुछ साथी धर्मातरण के आरोपों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए थे लोकतंत्र में क्या आरोपों का जवाब देना तक गुनाह है pic.twitter.com/MiO00Uk3jK
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) July 24, 2025
हाउल ग्रुप के सदस्य सौरव बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, ‘हम पिछले पांच वर्षों से देवास ज़िले के शुक्रवासा गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और क़ानूनी सहायता जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. धर्मांतरण को लेकर जो शक जताया जा रहा है, वह पूरी तरह से बेबुनियाद है.’
उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी समूहों ने बिना किसी सबूत के एनजीओ के सदस्यों पर हमला किया. बनर्जी ने चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर हमारा संगठन धर्मांतरण करवा रहा है तो एक भी ऐसा व्यक्ति सामने लाकर दिखाएं जिसका हमने जबरन धर्म बदलवाया हो.’
23 जुलाई को जारी एक प्रेस नोट में समूह ने लिखा था, ‘गरीब जनता की उन्नति देख शुक्रवासा गांव के कुछ भ्रष्ट और असामाजिक तत्व हाउल संगठन के हर सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लगातार रोकने में लगे हुए हैं… इसके चलते वे संगठन के संस्थापक सौरव बनर्जी और अन्य सदस्यों के विरुद्ध अनर्गल अफ़वाह फैला कर छवि धूमिल और प्रताड़ित कर रहे हैं.’
इस प्रेस नोट में पत्रकारों और आम नागरिकों को 25 जुलाई की सुबह 11:30 बजे प्रेस क्लब पहुंचने का न्योता दिया गया था.
22 जुलाई को पुलिस छापा
प्रेस वार्ता से दो दिन पहले, 22 जुलाई को समूह ने एक अन्य प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया गया था कि पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना या वॉरंट के शुक्रवासा स्थित उनके परिसर पर छापा मारा.
प्रेस नोट में कहा गया था, ‘पुलिस द्वारा ग्रुप के सभी सदस्यों से बिना किसी सूचना या वॉरंट के पूछताछ और छानबीन की गई, उनके निजी दस्तावेज़ और कॉपियां बिना इजाज़त जांची गईं, बिना किसी वॉरंट या जुर्म बताए ग्रुप के पांच सदस्यों को अरेस्ट कर ले गए.’
पांच गिरफ्तार सदस्यों में प्रणय त्रिपाठी (पत्रकार), ताशिव पटेल (पत्रकारिता छात्र), ब्रिजेन्द्र राठौर (इंजीनियरिंग छात्र), युवराज सिंह चौहान (फिल्मकार) और नीलाद्रि मुखोपाध्याय (लेखक-निर्देशक) शामिल हैं.
उन्हें उसी दिन बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन समूह का कहना है कि उनके मोबाइल फोन और अन्य सामान अब भी पुलिस की हिरासत में हैं.
