नई दिल्ली: द वायर के 10 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 1 और 2 अगस्त को जवाहर भवन, नई दिल्ली में दो दिवसीय उर्दू फेस्ट का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में उर्दू के इतिहास और अनुवाद से लेकर ग़ाज़ा में इज़रायली हिंसा और मीम संस्कृति तक कई मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही बच्चों के लिए एक किस्सागोई और मुशायरा भी होगा.
इस आयोजन स्थल पर किताबें, कैलीग्राफी और अन्य सामान बेचने वाले स्टॉल भी लगाए जाएंगे. आप इस दस साल के सफ़र के उपलक्ष्य में द वायर द्वारा लॉन्च किए गए कुछ बेहद खास सामान भी खरीद सकते हैं.
यह फेस्ट शुक्रवार (1 अगस्त) को शाम 4 बजे उर्दू के इतिहास और विरासत पर एक पैनल चर्चा के साथ शुरू होगा, जिसमें प्रसिद्ध वक्ता सैयदा सैय्यदैन हमीद (पूर्व चांसलर, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद), पेग्गी मोहन (लेखक, फादर टंग, मदरलैंड: द बर्थ ऑफ लैंग्वेजेज इन साउथ एशिया) और अतहर फारूकी (महासचिव, अंजुमन तरक्की उर्दू हिंद) शामिल होंगे. द वायर उर्दू के संपादक फैयाज अहमद वजीह पैनल का संचालन करेंगे.
शाम का समापन एक बेहद खास प्रस्तुति के साथ होगा– जिसमें दाग़ देहलवी की विरासत को कहानी और ग़ज़ल के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा. यह प्रस्तुति शिवांगिनी यशु युवराज और अशहर हक़ द्वारा दी जाएगी. उनके साथ तबले पर ईशान शर्मा और सारंगी पर तनिश धौलपुरी साथ देंगे.

अगले दिन (शनिवार, 2 अगस्त) सुबह 11 बजे भाषा, लेखन, स्वामित्व और पहचान पर एक पैनल चर्चा के साथ शुरू होगा. द वायर उर्दू के पूर्व कार्यकारी संपादक और फेस्टिवल क्यूरेटर महताब आलम, रख्शंदा जलील (लेखिका एवं अनुवादक) और सुहैल अंजुम (पत्रकार एवं लेखक) के साथ बातचीत करेंगे.
इसके बाद लोकप्रिय इंस्टाग्राम पेज ‘इश्क उर्दू’ की संस्थापक नशीत शादानी द्वारा उर्दू और मीम संस्कृति पर एक प्रस्तुति दी जाएगी, जिसका संचालन द वायर की मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर मीनल सईद खान करेंगी.
दोपहर 2 बजे एक लघु फिल्म दिखाने के लिए ब्रेक के बाद फिर से इकट्ठा होंगे. यहां दिखाई जाने वाली फिल्म ‘ज़बान’ ख्वाजा अहमद अब्बास की कहानी पर आधारित है.
दोपहर 2:30 बजे द वायर की वरिष्ठ संपादक आरफा खानम शेरवानी के साथ वक्ताओं का एक प्रतिष्ठित पैनल शामिल होगा – विवेक काटजू (पूर्व सचिव, विदेश मंत्रालय), ज़ोया हसन (प्रोफेसर एमेरिटा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय), सबिका अब्बास (कवि और अधिकार कार्यकर्ता) और सिद्धार्थ वरदराजन (संस्थापक संपादक, द वायर) – जो ग़ाज़ा में इज़रायल के चल रहे अत्याचारों के बारे में बात करेंगे.
इसके बाद उर्दू में और उर्दू से अनुवाद पर एक चर्चा होगी, जिसका संचालन सैयद काशिफ (अनुवादक एवं लेखक) करेंगे. अर्जुमंद आरा (शिक्षाविद एवं अनुवादक), राना सफ़वी (लेखिका एवं अनुवादक) और शुभम मिश्रा (अर्बन प्लानर एवं अनुवादक) अपने काम, भाषा और अनुवाद की जटिलताओं, और अन्य विषयों पर चर्चा करेंगे.
इसके बाद दो समानांतर कार्यक्रम होंगे – अशहर हक द्वारा बच्चों के लिए एक क़िस्सागोई सत्र और द वायर हिंदी की डिप्टी एडिटर मीनाक्षी तिवारी के साथ एक खुली चर्चा, जिसमें हिंदी और उर्दू के बीच संबंधों, हमारी रोजमर्रा की बोली जाने वाली भाषा में किस तरह बदलाव आया है और किस तरह नहीं आया है, तथा हमारे आसपास की भाषाओं के साथ हमारे संबंधों पर चर्चा होगी.
कार्यक्रम का समापन एक मुशायरे के साथ होगा, जिसमें जाने-माने कवि फरहत एहसास, आलम खुर्शीद, नोमान शौक, अलीना इतरत रिज़वी और मोइद रशीदी शामिल होंगे.
प्रवेश निःशुल्क है, और हमें आशा है कि आप सभी भाषा और संस्कृति के इस कार्यक्रम में हमारे साथ शामिल होंगे. हमें आपका इंतज़ार रहेगा.
