उत्तराखंड: उत्तरकाशी में बादल फटने से आई बाढ़ में चार लोगों की मौत, कई सैनिक समेत 50 से अधिक लापता

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मंगलवार (5 अगस्त, 2025) को बादल फटने से आई अचानक बाढ़ ने धराली गांव में भारी तबाही मचा दी, जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य मलबे में दब गए. सेना के हर्षिल स्थित कैंप में भी पानी घुसने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद से 9 जवान लापता बताए जा रहे हैं.

धराली गांव में भारी तबाही. (फोटो साभार: X/@RohanSingh4BJP)

नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मंगलवार (5 अगस्त) को बादल फटने से आई अचानक बाढ़ ने ऊंचाई पर स्थित धराली गांव में भारी तबाही मचा दी, जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य मलबे में दब गए.

द टेलीग्राफ के मुताबिक, इस घटना में 40 से 50 घर बह गए हैं और 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं.

बादल फटने की घटना में भारतीय सेना के नौ जवानों के लापता होने की जानकारी सामने आ रही है.

भारतीय सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया कि धराली के खीर गंगा में आए विनाशकारी मलबे से मची तबाही के बाद भारतीय सेना राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई है.

हालांकि, 14 राजपूताना राइफ़ल्स की यूनिट भी इस भारी बारिश से प्रभावित हुई है और उनके नौ जवान अब भी लापता हैं. भारतीय सेना के ये जवान उस समय लापता हुए थे जब सेना के हर्षिल स्थित कैंप में पानी घुसा था.

उन्होंने बताया कि दरअसल कैंप में पानी घुसने के बाद कुल 11 सैनिक लापता हो गए थे लेकिन बाद में दो जवान सुरक्षित मिल गए. बाक़ी के नौ जवान अभी भी लापता हैं. इनकी तलाश जारी है.

जान-माल का व्यापक नुकसान

इस बीच स्थानीय लोगों ने द टेलीग्राफ को बताया कि हर्षिल क्षेत्र में खीर गंगा गदेरे (गहरी खाई या नाला) के पास बादल फटने से आए सैलाब ने घरों, दुकानों और होटलों को तहस-नहस कर दिया. लोगों का दावा है कि तबाही का स्तर बेहद बड़ा है और इससे जान-माल का व्यापक नुकसान हुआ है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस घटना पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि वो वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर गहन निगरानी रखी जा रही है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि 70 लोगों को बचा लिया गया है और अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

मालूम हो कि गंगोत्री के रास्ते में पड़ने वाला धराली चार धाम यात्रा का अहम पड़ाव है. ये जगह हर्षिल वैली के पास है. कल्प केदार यहां का स्थानीय मंदिर है, जहां श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं. श्रद्धालु कई बार धराली के होटलों में भी रुकते हैं.

इस घटना को लेकर एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसेन शाहेदी ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना में 40 से 50 घर बह गए हैं और 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं.

वहीं, उत्तरकाशी के ज़िला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य ने संवाददाताओं को बताया कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है और अन्य कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.

आर्य ने आगे कहा, ‘आकस्मिक बाढ़ ने धराली बाज़ार में घर, गेस्टहाउस, होटल, होमस्टे और होटल बहा दिए हैं. नुकसान इतना ज़्यादा है कि अभी उसका आकलन नहीं किया जा सकता. हमने भारतीय वायु सेना से मदद मांगी है और कुछ हेलीकॉप्टरों का अनुरोध किया है. ऐसा लगता है कि धराली पूरी तरह तबाह हो गया है.’

सरकारी सूत्रों के अनुसार, चारधाम यात्रा के दौरान धराली बाज़ार में हर रोज़ 200 से ज़्यादा लोग आते हैं.

वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि राहत कार्यों के लिए चंडीगढ़ एयरबेस पर भारतीय वायुसेना के चिनूक एमआई-17 वी5, चीता और एएलएच हेलीकॉप्टर सक्रिय रूप से तैयार हैं.

एक आपदा प्रबंधन अधिकारी ने अखबार से नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘फिलहाल हमें जान-माल के नुकसान का अंदाज़ा नहीं है, लेकिन घरों, दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंट और आने-जाने वालों की संख्या को देखते हुए, हम मान सकते हैं कि यह नुकसान काफ़ी ज़्यादा होगा. पिछले एक दशक में इस इलाके में अंधाधुंध निर्माण गतिविधियों ने धराली को एक भू-खतरे वाले हॉटस्पॉट में बदल दिया है.’

एक अन्य आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि दुर्गम पहाड़ी इलाके में अचानक पानी, कीचड़ और पत्थरों का एक ऐसा सैलाब आया कि 10 मिनट के अंदर ही बस्ती का नामोनिशान मिट गया.

उन्होंने बताया कि सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कई जवान बचाव कार्य में लगे हुए हैं.

अधिकारी ने आगे कहा, ‘जब हम शाम 6 बजे धराली पहुंचे, तब तक अंधेरा हो चुका था और कुछ खास नहीं किया जा सकता था. फिर भी, बचाव दल ने लगभग 20 लोगों को जीवित बाहर निकाल लिया.’

गढ़वाल के महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि 150 से ज़्यादा बचाव दल  के सदस्य रात भर लापता लोगों की तलाश जारी रखेंगे.

प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने घटना पर शोक व्यक्त किया

उत्तराखंड में आई इस बड़ी प्राकृतिक आपदा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘उत्तरकाशी के धराली में हुई इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं. साथ ही सभी पीड़ितों की कुशलता की कामना करता हूं. मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी से बात कर मैंने हालात की जानकारी ली है. राज्य सरकार की निगरानी में राहत और बचाव की टीमें हरसंभव प्रयास में जुटी हैं. लोगों तक मदद पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है.’

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि आईटीबीपी की तीन टीमों को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है. इसके साथ ही एनडीआरएफ़ की चार टीमें भी घटनास्थल के लिए रवाना की गई हैं.

वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से ज़रूरतमंदों की हर संभव मदद करने की अपील की है.

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘उत्तराखंड के धराली में बादल फटने से आई भारी तबाही के कारण कई लोगों की मौत और कई अन्य के लापता होने की खबर बेहद दुखद और चिंताजनक है. मैं प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और लापता लोगों के जल्द से जल्द मिलने की आशा करता हूं.’

पौड़ी गढ़वाल से भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘हम बद्रीनाथ से प्रार्थना करते हैं कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो.’

वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, ‘धराली एक आधुनिक गांव था ,जहां बड़ी संख्या में लोग रहते थे. कई प्रवासी मज़दूर भी वहां रहा करते थे. जब हम मलबे में तब्दील हो चुके घरों और बचे हुए लोगों की गिनती शुरू करेंगे, तब हमें हताहतों की वास्तविक संख्या का पता चल पाएगा.’

उन्होंने कहा कि धराली चारधाम मार्ग पर है और गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालु वहां रुकते थे.

रावत ने कहा, ‘आकस्मिक बाढ़ के बाद धराली बाज़ार मलबे और मलबे की 20 मीटर ऊंची परत के नीचे दब गया है. पूरी संभावना है कि कई लोग इसके नीचे दबे हों.’

पर्यावरण विशेषज्ञों ने लापरवाह निर्माण गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया 

ज्ञात हो कि धराली गंगोत्री से 19 किमी, केदारनाथ से 270 किमी और बद्रीनाथ से 402 किमी दूर स्थित है.

उल्लेखनीय है कि बीते कई सालों से विशेषज्ञ पहाड़ियों की नाजुकता और उससे सटी हिमालय श्रृंखला में पिघलते ग्लेशियरों के कारण राज्य में निर्माण गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं.

पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा ने अखबार को बताया, ‘बादल फटने से थोड़े समय में ही सीमित क्षेत्र में भारी बारिश हो जाती है. लेकिन पहाड़ियों में घने जंगलों के कारण अचानक आई बाढ़ का असर कम हो सकता था. मेरा मानना है कि हिमालय के ऊपरी इलाकों में एक विशाल हिमनद की दीवार पिघल गई होगी और अचानक आई बाढ़ का कारण बनी होगी.’

उन्होंने कहा कि 2013 के केदारनाथ जलप्रलय के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नदियों, नालों और पहाड़ियों के पास किसी भी निर्माण कार्य की अनुमति न देने का निर्देश दिया था, लेकिन न तो सरकार और न ही निवासियों ने इसे गंभीरता से लिया.

भूविज्ञानी अजय पॉल कहते हैं, ‘इतने बड़े नुकसान से बचने के लिए हम बस इतना कर सकते हैं कि नियमों का पालन करें और उन नदियों और नालों से दूर रहें जहां अचानक बाढ़ आने की संभावना रहती है. पिछले कुछ दिनों से इस इलाके में लगातार बारिश हो रही है.’

पर्यावरणविद् एस.पी. सती ने कहा कि धराली 1835 में आई अचानक बाढ़ में तबाह हो गया था.

उन्होंने बताया, ‘मौजूदा धराली का निर्माण इसके मलबे पर हुआ था. लेकिन हम अभी भी हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को समझ नहीं पा रहे हैं. सरकार विकास के नाम पर ज़मीन अधिग्रहण करती है और लोग पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के बिना इमारतें खड़ी कर देते हैं.’