नई दिल्ली: बिहार के ‘गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे’ के लिए इस्तेमाल होने वाले अंतरराष्ट्रीय कोड ‘गे’ [GAY] को लेकर राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद भीम सिंह ने आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि क्या सरकार इस कोड को बदलकर कुछ ‘अधिक सम्मानजनक और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त’ करने पर विचार कर रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि यह कोड अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) द्वारा जारी किया गया है और ऐसे कोड आमतौर पर स्थायी होते हैं, जिन्हें केवल असाधारण परिस्थितियों में ही बदला जा सकता है.
मंत्रालय से पूछे गए अपने सवाल में बिहार से राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने दावा किया कि ‘लोग’ गया हवाई अड्डे के आईएटीए या अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ के कोड ‘गे’ को ‘सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अपमानजनक’ मानते हैं.
उन्होंने पूछा कि क्या सरकार को इस कोड के बारे में शिकायत या सुझाव मिले हैं, क्या सरकार इसे बदलने पर विचार कर रही है, यदि हां, तो इस संबंध में क्या कदम उठाए गए हैं, और यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं.
इस संबंध में सोमवार (4 जुलाई) को जवाब देते हुए नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि किसी हवाई अड्डे का आईएटीए कोड आमतौर पर उस स्थान के पहले तीन अक्षरों से बना होता है ,जहां वह स्थित है.
मोहोल ने कहा कि मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को पहले भी गया हवाई अड्डे के आईएटीए कोड को बदलने के अनुरोध प्राप्त हुए हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि एयर इंडिया ने भी एसोसिएशन से संपर्क करके इसे संशोधित करने का प्रयास किया था. हालांकि, मोहोल ने याद दिलाया कि आईएटीए ने एयरलाइन को सूचित किया था कि उसके कोड ‘स्थायी’ माने जाते हैं और केवल ‘असाधारण परिस्थितियों’ में ही बदले जाते हैं, जो आमतौर पर हवाई सुरक्षा से संबंधित होती हैं.
यही जवाब नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सार्वजनिक उपक्रमों पर संसदीय स्थायी समिति को भी दिया था, जब समिति ने गया हवाई अड्डे के आईएटीए कोड में बदलाव की सिफ़ारिश की थी.
समिति को आशंका थी कि गया के एक पवित्र शहर होने के नाते स्थानीय लोगों को यह अपमानजनक या शर्मनाक लग सकता है कि उनके शहर को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ‘गे’ कोड नाम से पहचाना जा रहा है. समिति ने इस कोड को ‘अनुचित और अनुपयुक्त’ बताया था.
इस मामले पर की गई कार्रवाई के संबंध में मंत्रालय ने सितंबर 2021 में समिति को सूचित किया था कि एयर इंडिया ने बदलाव के लिए आईएटीए से संपर्क किया था, लेकिन आईएटीए ने ‘मुख्य रूप से हवाई सुरक्षा से संबंधित किसी उचित कारण के बिना’ कोड को बदलने में अपनी असमर्थता व्यक्त की.
उस दौरान समिति ने एयर इंडिया के प्रयासों की ‘सराहना’ तो की, लेकिन फरवरी 2022 में पेश अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि सरकार को ‘इस मामले को आईएटीए और संबंधित संगठन के साथ उठाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि यह मुद्दा हमारे देश के एक पवित्र शहर के हवाई अड्डे के अनुचित कोड नामकरण से जुड़ा है.’
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने चार साल पहले 2018 में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था.
दक्षिणी बिहार में स्थित गया हिंदू और बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों का घर है. ऐसा कहा जाता है कि बुद्ध को यहीं ज्ञान की प्राप्ति हुई थी.
