नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को अपने प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानू को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया. जानू ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल दिवंगत सत्यपाल मलिक और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ पार्टी नेतृत्व के कथित व्यवहार की आलोचना की थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, आधिकारिक तौर पर जानू को जून में हर्षिनी कुल्हारी की भाजपा झुंझुनू जिला अध्यक्ष पद पर नियुक्ति पर आपत्ति जताने वाली उनकी टिप्पणियों के लिए निष्कासित कर दिया गया है.
शुक्रवार को जारी आदेश में भाजपा की राज्य अनुशासन समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि जानू 20 जून को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में अपने कार्यों को उचित ठहराने में विफल रहे, जिसके बाद उनके निष्कासन पर छह साल की मुहर लग गई.
पिछले कुछ दिनों में वायरल हुए एक वीडियो में जानू को पूर्व राज्यपाल मलिक के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार और जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से अनौपचारिक तरीके से हटाए जाने को लेकर भाजपा के जाट नेताओं की आलोचना करते सुना जा सकता है – दोनों ही जाट हैं.
वीडियो में जानू कहते हैं कि पूर्व राज्यपाल जो पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी थे, के अंतिम संस्कार और उनके प्रति सरकार के तिरस्कार को देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ है और वह पार्टी में काम करने वाले जाटों से सवाल पूछना चाहते हैं, चाहे वे सांसद हों, विधायक हों या अन्य पदधारी हों.
उन्होंने उनसे पूछा कि वे कैसे सोच सकते हैं कि मलिक के साथ जो हुआ, वह उनके साथ नहीं होगा और जिस तरह से तिरस्कार का उदाहरण दिया गया, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने कहा कि पार्टी का मौजूदा नेतृत्व लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, प्रवीण तोगड़िया, संजय जोशी और वसुंधरा राजे जैसे दिग्गज नेताओं को किनारे करने के लिए जिम्मेदार है और अब मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को कठपुतली बना दिया है.
उन्होंने कहा, ‘भाजपा ज़मीनी स्तर पर लोकप्रिय जननेताओं के साथ जो कर रही है, वह बेहद दुखद है. पार्टी इन सबके ज़रिए ग़लत दिशा में जा रही है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि लोग चुप क्यों हैं.’
उन्होंने कहा कि भाजपा के जाट नेता उस समुदाय से आते हैं जो सनातन धर्म की विसंगतियों पर बोलते हैं और अतीत में उन्होंने गुरु नानक देव, जम्भोजी महाराज और दयानंद सरस्वती का पक्ष लिया है, फिर वे बोलने से क्यों हिचकिचा रहे हैं.
जानू ने कहा, ‘सत्यपाल मलिक के अंतिम संस्कार के दौरान जो अपमान हुआ – एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार नहीं दिया गया – यह इस बात का संकेत है कि सरकार पूर्वाग्रह से ग्रस्त है और डर के मारे ऐसा व्यवहार कर रही है.’ उन्होंने आगे कहा कि जो डर के कारण अपने सिद्धांतों से समझौता करता है, वह जाट नहीं है.
उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के असामान्य तरीके से पार्टी छोड़ने पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनके लिए कोई विदाई भाषण या विदाई पार्टी नहीं थी और कहा कि ‘एक अहंकारी सरकार से टकराव करना जाटों का संस्कार है.’ उन्होंने भाजपा के भीतर जाटों की आलोचना की और उनसे गलत के खिलाफ बोलने का आग्रह किया.
पूर्वोत्तर से भाजपा के एकमात्र राष्ट्रीय प्रवक्ता ने इस्तीफा दिया
इस बीच, पूर्वोत्तर में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता म्होनलुमो किकोन ने गुरुवार (7 अगस्त) को पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.
किकोन, जो मूल रूप से नगा समुदाय से हैं और नगालैंड में विधानसभा के पूर्व सदस्य हैं, पूर्वोत्तर से भाजपा के एकमात्र राष्ट्रीय प्रवक्ता थे.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे एक पत्र में किकोन ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अब समय आ गया है कि मैं एक कदम पीछे हटकर अपनी यात्रा को नए सिरे से तय करूं. मेरा यह निर्णय जनभागीदारी और नीतिगत कार्यों के नए रास्ते तलाशने की आवश्यकता से प्रेरित है, जिससे मुझे विश्वास है कि मैं विभिन्न तरीकों से समाज में योगदान देना जारी रख पाऊंगा.’
उन्होंने मिज़ोरम में भाजपा के प्रभारी के रूप में भी कार्य किया था.
उन्होंने कहा, ‘एक दशक से भी ज़्यादा समय पहले भाजपा में शामिल होने के बाद से मुझे पार्टी की सेवा करने और मुझे सौंपी गई विभिन्न क्षमताओं और ज़िम्मेदारियों के साथ इसके विकास और गतिविधियों में योगदान देने का सम्मान मिला है. पार्टी के साथ मेरा जुड़ाव एक बेहद समृद्ध अनुभव रहा है, क्योंकि मैंने मिज़ोरम राज्य के प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी काम किया है.’
एक पार्टी सूत्र ने कहा कि रचनात्मक राय के लिए जगह की कमी और पूर्वोत्तर में अल्पसंख्यक ईसाई समूहों के साथ कथित दुर्व्यवहार ने इस्तीफे में योगदान दिया होगा.
