नई दिल्ली: आईआईएसईआर कोलकाता के छात्रों ने शनिवार (9 अगस्त) को संस्थान की एंटी-रैगिंग समिति के सदस्यों के खिलाफ जांच की मांग की.
द टेलीग्राफ के मुताबिक, छात्रों ने आरोप लगाया कि समिति ने अप्रैल में शोध छात्र अनामित्रा रॉय द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का कोई जवाब नहीं दिया, जिसके चलते उन्होंने गुरुवार (7 अगस्त) रात आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया.
आईआईएसईआर के छात्रों ने एंटी-रैगिंग समिति को तत्काल भंग करने और रॉय की मौत का कारण बनी लापरवाही के लिए समिति के सदस्यों से माफी की मांग की है.
उन्होंने तीसरे वर्ष के पीएचडी स्कॉलर की मौत की जांच के लिए बाहरी सदस्यों और एक छात्र प्रतिनिधि वाली एक विशेष जांच टीम के गठन की भी मांग रखी.
छात्रों का आरोप है कि वरिष्ठ शोध छात्र सौरभ बिस्वास, जिन्हें अपनी पर्यवेक्षक अनिंदिता भद्रा का संरक्षण प्राप्त था, उनके द्वारा रॉय को बार-बार धमकाया और दुर्व्यवहार किया गया.
सूत्रों ने अखबार को बताया कि संस्थान ने अब एम्स कल्याणी के एक प्रतिनिधि सहित बाहरी और आंतरिक दोनों सदस्यों वाली एक फैक्ट फाइंडिंग समिति का गठन किया है और उसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है.
इस संबंध में आईआईएसईआर के प्रवक्ता ने जांच दल के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया.
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी फैक्ट फाइंडिंग टीम भेज सकता है
हालांंकि, सूत्रों ने ये भी संकेत दिया कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी एक फैक्ट फाइंडिंग दल भेजने की संभावना है.
मालूम हो कि शनिवार को छात्रों ने 16-सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें प्रोफेसरों और कर्मचारियों के लिए एक अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति का गठन, बिस्वास की पीएचडी थीसिस में कथित वैज्ञानिक कदाचार की जांच के लिए एक बाहरी पैनल का गठन, जैसा कि मृतक ने फेसबुक पर अपनी आत्महत्या संबंधी पोस्ट में दावा किया था, और 2022 में शोधार्थी सुभादीप रॉय की आत्महत्या की जांच शामिल थी.
बता दें कि इस मामले को लेकर शनिवार को परिसर में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया, जब छात्रों ने एम्स कल्याणी में पोस्टमार्टम के बाद अनामित्रा रॉय के शव को मोहनपुर स्थित आईआईएसईआर अनुसंधान परिसर में ले आए. वहीं, अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था की समस्या की आशंका से पुलिस को बुला लिया.
एक वरिष्ठ शोधार्थी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्र मामलों के निदेशक (डीओएसए), जो अपने पद के कारण एंटी-रैगिंग समिति के अध्यक्ष हैं, ने रॉय की शिकायत को गंभीरता से लेने की ज़हमत नहीं उठाई. यह सिर्फ़ अक्षमता ही नहीं, बल्कि उदासीनता भी है, क्योंकि लापरवाही के आरोप न केवल एक वरिष्ठ शोधार्थी पर थे, बल्कि पर्यवेक्षक, जो संयोग से उनकी पत्नी हैं, पर भी थे.’
‘रैगिंग के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी’
एक अन्य छात्र ने कहा, ‘डीओएसए और एंटी-रैगिंग कमेटी के अध्यक्ष को रैगिंग पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विचार करना चाहिए था और शिकायत मिलने के तुरंत बाद छात्र से संपर्क करके एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी.’
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, रैगिंग की हर शिकायत पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, चाहे पीड़ित या संस्थान आंतरिक उपायों से संतुष्ट हो या नहीं.
इस मामले पर कलकत्ता के एक वकील ने कहा, ‘एफआईआर दर्ज न करना या संस्थागत अधिकारियों द्वारा जानबूझकर की गई देरी को दोषपूर्ण लापरवाही माना जाता है.’
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘भविष्य में होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए अनुकरणीय और कठोर दंड’ की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया है.
आईआईएसईआर कोलकाता के डीओएसए और अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं आउटरीच के डीन अयान बनर्जी ने पुलिस की चल रही जांच का हवाला देते हुए रॉय की मौत पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
एंटी-रैगिंग समिति के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि रॉय की शिकायत में ‘रैगिंग’ का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं था.
सदस्य ने कहा, ‘उनकी शिकायत में रैगिंग जैसा कोई शब्द नहीं था. इसलिए रैगिंग के आरोपों को उचित नहीं ठहराया जा सकता. फिर भी, शिकायत को गंभीरता से लिया गया और पर्यवेक्षक को मौखिक रूप से समस्या का समाधान करने की सलाह दी गई. चूंकि शिकायत अप्रैल में दर्ज की गई थी और आगे कोई मामला नहीं उठाया गया था, इसलिए यह मान लिया गया कि मामला सुलझ गया है. दुर्भाग्य से, चीजें अलग थीं, जो हमारी जानकारी से परे थीं.’
हालांकि, छात्रों और पीड़िता के परिवार के सदस्यों ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया.
आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप
शनिवार को रॉय के चचेरे भाई ऋषिकेश रॉय ने बिस्वास और भद्रा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए हरिणघाटा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.
इस बारे में ऋषिकेश ने बताया, ‘दोनों ने अनमित्रा को बुरी तरह परेशान किया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. यह आत्महत्या का कोई साधारण मामला नहीं है. उसने स्पष्ट रूप से बताया कि उसने अपनी जान क्यों दी.’
पीड़िता के एक रिश्तेदार ने आरोप लगाया कि आईआईएसईआर के अधिकारी ‘स्थिति की गलत व्याख्या करके और अनमित्रा के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाकर मामले से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि उनकी शिकायत को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं और एफआईआर दर्ज करने में विफल रहे हैं.’
रिश्तेदार ने कहा, ‘अगर ऐसा है भी, तो भी उन्होंने कभी उसकी बीमारी का ध्यान रखने की ज़हमत नहीं उठाई.’
उन्होंने आगे कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार रैगिंग की हर घटना के लिए स्थानीय पुलिस में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है. इस मामले में, आईआईएसईआर की ओर से डीओएसए को एफआईआर दर्ज कराना ज़रूरी था और वह सिर्फ़ पर्यवेक्षक की टिप्पणियों पर निर्भर नहीं रह सकता था. यह सरासर लापरवाही है.’
शनिवार को छात्रों ने रॉय के पार्थिव शरीर के साथ परिसर में न्याय और प्रशासन के रवैये में बदलाव की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया.
उल्लेखनीय है कि उत्तर 24 परगना के श्यामनगर के साहेबबागन स्थित उनके घर ले जाए जाने से पहले रॉय के पार्थिव शरीर को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए लगभग 500 छात्र शोध परिसर में एकत्रित हुए.
एंटी-रैगिंग समिति को भंग कर एक नई जांच टीम के गठन की घोषणा
दोपहर बाद आईआईएसईआर कोलकाता के निदेशक सुनील कुमार खरे ने रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में छात्रों को संबोधित किया.
उन्होंने कथित तौर पर एंटी-रैगिंग समिति की ‘चूक’ को स्वीकार किया और उनकी चिंताओं का पूरा समर्थन किया.
उन्होंने एंटी-रैगिंग समिति को भंग करने और एक नई जांच टीम के गठन की घोषणा की, जिसमें किसी अन्य आईआईएसईआर या समकक्ष संस्थान से निदेशक स्तर से नीचे का एक अधिकारी और एक छात्र प्रतिनिधि शामिल होगा.
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण केंद्र का पुनर्गठन किया जाएगा.
खरे ने अखबार द्वारा संपर्क करने पर विस्तार से बताने से इनकार कर दिया, लेकिन फोन काटने से पहले कहा, ‘मैं बहुत तनावपूर्ण स्थिति में हूं.’
इससे पहले, राज्य समिति सचिव देबांजन डे के नेतृत्व में एसएफआई के एक प्रतिनिधिमंडल ने हरिंघटा पुलिस स्टेशन में शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की.
डे ने रॉय की मौत को ‘संस्थागत लापरवाही’ का मामला बताया और एंटी-रैगिंग समिति की ईमानदारी पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, ‘यह चौंकाने वाला है कि समिति के अध्यक्ष ने छात्र को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर आरोपों के बारे में पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई. ऐसी चूक को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.’
