गाज़ा: इज़रायल द्वारा निशाना बनाकर किए गए हमले में अल जज़ीरा के पांच पत्रकारों की मौत

इज़रायल ने गाज़ा में अल-शिफ़ा अस्पताल के ठीक बाहर स्थित एक टेंट पर हमला किया, जिसमें अल जज़ीरा के पांच और दो अन्य पत्रकार मारे गए. अल जज़ीरा ने बताया कि इन पांचों को महीनों से धमकियां मिल रही थीं. उसने इन हत्याओं की निंदा करते हुए इसे प्रेस की आज़ादी पर पूर्वनियोजित हमला बताया.

अनस अल शरीफ. (फोटो: एक्स/अलजज़ीरा)

नई दिल्ली: इज़रायल ने गाजा में पत्रकारों के एक तंबू पर निशाना साधकर हमला किया, जिसमें अल जज़ीरा के पांच पत्रकार – अनस अल-शरीफ़, मोहम्मद क़रीक़ेह, इब्राहिम ज़हीर, मोहम्मद नौफ़ल और मोआमेन अलीवा मारे गए.

गाजा में अल-शिफ़ा अस्पताल के ठीक बाहर स्थित तंबू पर हुए हमले में दो अन्य पत्रकार भी मारे गए.

उल्लेखनीय है कि अल जज़ीरा गाजा के खिलाफ इजरायल के युद्ध की भयावहता को उजागर करने वाले प्रमुख चैनलों में से एक रहा है, जहां संवाददाताओं ने हमलों, जख्मों, मौंतों और भुखमरी के बीच लगातार रिपोर्टिंग की है.

अल जज़ीरा ने बताया कि इन पांच पत्रकारों को महीनों से धमकियां मिल रही थीं.

अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क ने एक बयान में इन हत्याओं की निंदा करते हुए इसे ‘प्रेस की आज़ादी पर एक और ज़बरदस्त और पूर्वनियोजित हमला’ बताया.

नेटवर्क ने कहा, ‘यह हमला गाजा पर जारी इज़रायली हमले के भयावह परिणामों के बीच हुआ है, जिसमें नागरिकों का लगातार कत्लेआम, जबरन भुखमरी और पूरे समुदायों का विनाश देखा गया है. अब अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क ने ‘अपने बेहतरीन पत्रकारों के एक और समूह को विदाई दी, जिन्होंने युद्ध की शुरुआत से ही गाजा और उसके लोगों की दुर्दशा का साहस और बहादुरी से दस्तावेजीकरण किया.’

नेटवर्क ने आगे कहा, ‘गाजा के सबसे बहादुर पत्रकारों में से एक अनस अल शरीफ़ और उनके सहयोगियों की हत्या का आदेश, गाजा पर आसन्न कब्ज़े और इसका पर्दाफ़ाश करने वाली आवाज़ों को दबाने का एक हताश प्रयास है.’

बयान में कहा गया, ‘यह इज़रायली कब्ज़ाकारी सेना और सरकार को, जानबूझकर अपने पत्रकारों को निशाना बनाने और उनकी हत्या करने के लिए ज़िम्मेदार ठहराता है. यह कई इज़रायली अधिकारियों और प्रवक्ताओं द्वारा निडर पत्रकार अनस अल शरीफ़ और उनके सहयोगियों को निशाना बनाने के लिए बार-बार उकसाने और आह्वान करने के बाद हुआ है.’

मालूम हो कि मौत से कुछ समय पहले 28 वर्षीय अल जज़ीरा अरबी के जाने-माने संवाददाता अल-शरीफ, जो कथित तौर पर उत्तरी गाजा से काफ़ी सक्रिय थे, ने एक्स पर लिखा था कि इज़रायल ने गाजा शहर के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों पर तीव्र, केंद्रित बमबारी – जिसे ‘फायर बेल्ट भी कहा जाता है – शुरू की है.

उनके आखिरी वीडियो के पृष्ठभूमि में इज़रायल की मिसाइल बमबारी की तेज़ आवाज़ें सुनी जा सकती हैं, जबकि अंधेरे में आसमान में आग से उठ रही नारंगी रोशनी दिख रही है.

अब वे पत्रकार उन 230 से अधिक मीडियाकर्मियों में शामिल हो गए, जो गाजा पर इज़रायल के युद्ध की शुरुआत के बाद से इज़रायली हथियारों से मारे गए हैं.

ई-ज़िन जदालिया के सह-संपादक, मौइन रब्बानी ने समाचार एजेंसी को बताया कि पत्रकारों को ‘अपनी पेशेवर और पत्रकारिता गतिविधियां’ बंद करने के लिए ‘बार-बार धमकियां’ दी गई थी. उन्होंने कहा, ‘फिर भी, असाधारण साहस और दृढ़ता के साथ वे दुनिया को गाजा नरसंहार के बारे में जानकारी देते रहे.’