नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती विश्वविद्यालय ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन पर आयोजित व्याख्यान की अनुमति नहीं दी है. 14 अगस्त को यह व्याख्यान विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी ऑडिटोरियम में होना था.
इस व्याख्यान को प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज देने वाले थे. इसे अनुष्टुप नाम की एक बंगाली लघु पत्रिका ने आयोजित किया था, जिसने हाल ही में प्रो. सेन पर एक विशेषांक निकाला है.
इस आयोजन में विश्व भारती के अर्थशास्त्र और राजनीति विभाग और एके दासगुप्ता सेंटर फॉर प्लानिंग एंड डेवलपमेंट का सहयोग भी शामिल था.
विश्व भारती से अनुमति न मिलने के बाद यह कार्यक्रम उसी दिन ‘गीतांजलि’ नामक एक निजी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया. विश्व भारती के इस कृत्य पर द हिंदू से बात करते हुए ज्यां द्रेज ने कहा है:
अमर्त्य सेन शांतिनिकेतन लाइब्रेरी के सपूत हैं और भारत के सबसे बड़े विद्वानों में एक हैं. यह विडंबना है कि उनके काम पर आधारित कार्यक्रम को विश्वविद्यालय से बाहर करना पड़ा. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हालत यहीं से समझी जा सकती है.
विश्व भारती का क्या कहना है?
विश्व भारती विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) अतीग घोष ने कार्यक्रम को अनुमति न देने पर कहा:
जब भी विश्वविद्यालय में कोई हेरिटेज इवेंट चल रहा होता है, उसी समय किसी और कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाती. इस मामले में ‘रवींद्र सप्ताह’ का व्याख्यान 14 अगस्त की शाम 7 बजे लिपिका ऑडिटोरियम में होना तय था, इसलिए कोई दूसरा कार्यक्रम साथ में नहीं हो सकता था.
हालांकि, कई प्रोफेसरों ने इस दलील पर सवाल उठाया. उनका कहना है कि रवींद्र सप्ताह की शुरुआत तो 8 अगस्त को केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने की थी और अमर्त्य सेन पर व्याख्यान इससे किसी भी तरह टकरा नहीं रहा था.
एक शिक्षक ने कहा:
असल वजह यह है कि अमर्त्य सेन और ज्यां द्रेज़ दोनों ही केंद्र की भाजपा सरकार को ‘अप्रिय’ लगते हैं. इसी कारण विश्वविद्यालय ने लाइब्रेरी में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जैसे ही ज्यां द्रेज़ का व्याख्यान खत्म हुआ, विश्वविद्यालय ने एक अधिसूचना जारी कर प्रोफेसर अपूर्व कुमार चट्टोपाध्याय को उनके पद से हटा दिया. वह इस व्याख्यान के आयोजकों में शामिल थे और इसी साल 21 मई को ही एके दासगुप्ता सेंटर के चेयरपर्सन बनाए गए थे.
सरकार के आलोचकों को संस्थानों में जगह नहीं?
क्या नरेंद्र मोदी सरकार के आलोचकों को आमंत्रित करने वाले संस्थानों को सज़ा मिल रही है? इस आशंका को तमाम घटनाओं से बल मिल रहा है. ऐसी घटना हाल में दिल्ली में इटालियन कल्चरल सेंटर के साथ घटी है.
विदेश मंत्रालय के ताजा दिशानिर्देश के बाद उन्हें अपने लैंग्वेज कोर्स की शुरुआत को सितंबर तक के लिए टालना पड़ा है. अब सवाल उठ रहे हैं क्या इटालियन कल्चरल सेंटर के साथ ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके यहां आयोजित 28 जुलाई के एक कार्यक्रम में प्रख्यात इतिहासकार रोमिला थापर को आमंत्रित किया गया था.
प्रोफेसर थापर मोदी सरकार की नीतियों की आलोचक रही हैं. कई मौकों पर सरकार की तरफ से भी थापर की आलोचना है, इतिहास के उनके दृष्टिकोण को लेकर हुई है.

विदेश मंत्रालय की ओर से सांस्कृतिक केंद्रों के कामकाज को लेकर जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के बाद इटालियन कल्चरल सेंटर ने अचानक पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) रोक दिए हैं और अपने लैंग्वेज कोर्स की शुरुआत टाल दी है.
छात्रों को जारी एक नोटिस में सेंटर ने कहा, ‘यह सूचित किया जाता है कि हमारे लैंग्वेज कोर्स के लिए पंजीकरण अस्थायी रूप से निलंबित किया जा रहा है और कक्षाओं की शुरुआत को सितंबर तक टाल दिया गया है. यह बदलाव भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा हाल ही में साझा किए गए नए निर्देशों के कारण है, जो सांस्कृतिक केंद्रों के संचालन से संबंधित हैं.’
इटालियन कल्चरल सेंटर ने आगे कहा कि वह जल्द ही नई तारीख की जानकारी देगा और फिलहाल मंत्रालय से आगे की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहा है ताकि इन दिशानिर्देशों के अनुसार आगे बढ़ा जा सके.
इटालियन कल्चरल सेंटर, राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद कई विदेशी सांस्कृतिक संस्थानों में से एक है, जो अपने-अपने देशों की भाषा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं. अपने समकक्ष संस्थानों – जैसे फ्रांस का अलायंस फ़्रांसेज़, जर्मनी का मैक्स म्यूलर भवन, कोरिया का कोरियन कल्चरल सेंटर और अन्य – की तरह, यह भी इटालियन भाषा और संस्कृति पर कई तरह के कोर्स कराता है.
इसके साथ ही यह जगह चर्चाओं, कला प्रदर्शनियों, फिल्म स्क्रीनिंग और फूड फेस्टिवल जैसी गतिविधियों की मेज़बानी भी करती है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अन्य सांस्कृतिक केंद्रों में किसी भी तरह की क्लास को निलंबित नहीं किया गया है. अलायंस फ़्रांसेज़ और मैक्स म्यूलर भवन – दोनों ने पुष्टि की कि उनका संचालन सामान्य रूप से जारी है.
ध्यान दें कि इटालियन कल्चरल सेंटर ने 28 जुलाई को अपने हुमायूंज़ टूम ऑडिटोरियम में एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसका शीर्षक था ‘बियॉन्ड बाउंड्रीज़’, जिसमें प्रख्यात इतिहासकार रोमिला थापर और कला इतिहासकार नमन आहूजा ने ‘प्राचीन रोम और भारतीय प्रायद्वीप’ विषय पर संवाद किया.
