नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (31 अगस्त) को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि पिछले एक साल से भारत-चीन सीमा पर शांति बनी हुई है, जबकि शी ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य ‘अराजक’ है और दोनों देशों के लिए मित्रता बनाए रखना ‘सही विकल्प’ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर तियानजिन में रविवार सुबह लगभग एक घंटे की मुलाकात की.
यह बैठक सात वर्षों में मोदी की पहली चीन यात्रा और 2018 के बाद से दोनों नेताओं की एक-दूसरे के देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी.
मालूम हो कि दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात अक्टूबर 2024 में कज़ान में हुई थी, जो भारत-चीन सीमा गतिरोध के औपचारिक रूप से समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी.
अपने शुरुआती भाषण में पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कज़ान में हुई उनकी बातचीत ने दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘सकारात्मक दिशा’ दी है.
उन्होंने कहा, ‘सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है.’
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक साल से सीमा पर शांति बनी हुई है.
पीएम मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन पर सहमति बन गई है और कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है. वहीं, भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो रही हैं.
पीएम मोदी ने कहा, ‘दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित हमारे सहयोग से जुड़े हैं. इससे संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा. हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’
चीनी राष्ट्रपति शी ने पिछले साल कज़ान में हुई अपनी मुलाकात को संबंधों में एक ‘पुनर्स्थापना’ बताया और कहा कि उस समय बनी महत्वपूर्ण सहमति के बाद से दोनों पक्षों ने आदान-प्रदान और सहयोग में नई प्रगति की है.
ज्ञात हो कि कज़ान बैठक के बाद से विभिन्न स्तरों पर लगातार बैठकें हुई हैं, जिनमें से आखिरी बैठक इसी महीने की शुरुआत में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा थी.
शी ने सीमा का ज़िक्र नहीं किया, बल्कि संबंधों को व्यापक संदर्भ में रखा
मोदी के उलट शी ने सीमा का ज़िक्र नहीं किया, बल्कि संबंधों को व्यापक संदर्भ में रखा.
उन्होंने कहा, ‘आज दुनिया सदी में एक बार होने वाले बदलावों से गुज़र रही है. अंतरराष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक दोनों है.’
हालांकि, यूक्रेन और गाजा में युद्धों ने इसे प्रभावित किया है, लेकिन ज़्यादा व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी टैरिफ़ के कारण आया है जो उसके सभी व्यापारिक साझेदारों पर लगाया गया है.
उल्लेखनीय है कि भारत और ब्राज़ील अब अमेरिका की सबसे ज़्यादा 50% टैरिफ दर का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वाशिंगटन ने रूसी तेल ख़रीदने पर दंड स्वरूप अपने पहले के ‘पारस्परिक टैरिफ’ को दोगुना कर दिया है.
वहीं, चीन जो कभी 145% की उच्चतम दर का सामना कर रहा था, मई में हुए एक समझौते के तहत इसे घटाकर 30% कर दिया गया, हालांकि बातचीत अभी भी जारी है.
चीनी राष्ट्रपति ने चीन और भारत को ‘पूर्व की दो प्राचीन सभ्यताएं’ और ‘दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश’ बताते हुए कहा कि दोनों ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं.
उन्होंने कहा कि दोनों देश ‘अपने लोगों की भलाई में सुधार लाने, विकासशील देशों की एकजुटता और कायाकल्प को बढ़ावा देने, और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी उठाते हैं.’
शी ने आगे कहा कि ‘हम दोनों के लिए दोस्त बनना, अच्छे पड़ोसी और सौहार्दपूर्ण संबंध रखना, एक-दूसरे की सफलता में सहायक साझेदार बनना, और ड्रैगन और हाथी का एक साथ आना सही विकल्प है.’
