नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में कथित रूप से एक सरकारी स्कूल पर फिलीस्तीन झंडा फहराने का मामला सामने आया है. इसे लेकर तीन नामजद समेत सात लोगों पर पर मुक़दमा दर्ज किया गया है.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला फूलबेहड़ कोतवाली क्षेत्र के लखहा गांव के स्कूल का है, जहां रविवार (31 अगस्त) को कुछ लोगों ने तिरंगा झंडा उतारकर कथित रूप से फिलीस्तीन झंडा लगा दिया.
इसे लेकर लखहा गांव के ही एक शख़्स संजय त्रिवेदी ने वीडियो बनाकर फूलबेहड़ थाने में शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.
इस संबंध में गांव के निवासी संजय त्रिपाठी ने अपनी शिकायत में बताया है कि सद्दाम, बाउरा, अन्ने और एक अज्ञात व्यक्ति स्कूल की छत पर पहुंचे. इन लोगों ने तिरंगे को उतारकर फेंक दिया. त्रिपाठी ने जब इस घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया तो आरोपियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, और मारपीट कर मौके से फरार हो गए.
पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा. घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है. हिंदू संगठनों में इस घटना को लेकर आक्रोश है.
पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में एक अभियुक्त सद्दाम की गिरफ़्तारी हुई है और अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी है.
पुलिस का कहना है कि जांच से ही पता चलेगा कि झंडा कहां से आया और किस उद्देश्य से लगाया गया.
गौरतलब है कि इजरायल फिलीस्तीन संघर्ष के शुरू होने के बाद से देश से अलग-अलग राज्यों मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फिलीस्तीन के झंडे लहराने के लिए कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया, हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की गई, जिसके बाद कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने इन गिरफ़्तारियों के आधार पर सवाल उठाए थे क्योंकि भारत के फिलीस्तीन के साथ राजनयिक संबंध हैं.
इस संबंध में कुछ मामलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों द्वारा शिकायतें की गई थीं और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे.
एक सरकारी वेबसाइट के अनुसार, ‘फिलीस्तीन के मुद्दे के लिए भारत का समर्थन देश की विदेश नीति का एक अभिन्न अंग है.’ 1974 में भारत फिलीस्तीन मुक्ति संगठन को मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब राज्य बना था और 1988 में भारत फिलीस्तीन को सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में से एक बना.
गौरतलब है कि बीते साल 15 जुलाई को भारत ने फिलीस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी को 25 लाख डॉलर का योगदान दिया था. हमास द्वारा अक्टूबर 2023 के हमले के बाद फिलीस्तीन के गाजा में इजरायल के युद्ध ने 63,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है और गाजा के अधिकांश हिस्से को नष्ट कर दिया है.
