श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर स्थित हज़रतबल दरगाह को लेकर भाजपा और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग शुक्रवार (5 सितंबर) को तब खुलकर सामने आ गई जब वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता दरख्शां अंद्राबी ने श्रीनगर के एक विधायक की गिरफ्तारी की मांग की.
आनन-फानन में बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंद्राबी ने सत्तारूढ़ पार्टी पर भी निशाना साधा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला पर निजी हमले किए. यह हमला श्रीनगर के ज़दीबल निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी विधायक तनवीर सादिक द्वारा दरगाह की एक पट्टिका पर राष्ट्रीय प्रतीक होने पर आपत्ति जताने के बाद हुआ.
इस पट्टिका को इस हफ़्ते की शुरुआत में अंद्राबी ने हज़रतबल दरगाह के फिर से खुलने के उपलक्ष्य में लगाया गया था. हाल ही में दरगाह का जीर्णोद्धार जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने कराया है. सत्तारूढ़ दल के नेता, जिनके लिए यह दरगाह पारंपरिक रूप से सत्ता का केंद्र रहा है, बुधवार को हुए इस कार्यक्रम में अनुपस्थित रहे.
यह विवाद शुक्रवार को तब शुरू हुआ जब यह बात सामने आई कि अंद्राबी, वक्फ बोर्ड के सदस्यों सैयद मोहम्मद हुसैन और गुलाम नबी हलीम, बोर्ड के तहसीलदार इश्तियाक मोहिउद्दीन और इंजीनियर सैयद गुलाम-ए-मुर्तजा के नाम वाली ग्रेनाइट पट्टिका को अज्ञात लोगों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है.
द वायर को प्राप्त एक वीडियो में एक अधेड़ उम्र का दाढ़ी वाला आदमी दर्जनों लोगों से घिरा हुआ दिखाई दे रहा है, जो उस पट्टिका के ऊपरी बाएं कोने में बार-बार ईंट मार रहा है, जहां चार एशियाई शेरों वाले राष्ट्रीय प्रतीक को उकेरा गया था, जिससे उसमें एक खुरदुरा छेद हो गया है. इस बीच ‘यहां क्या चलेगा, निजाम-ए-मुस्तफा’ (हम इस्लामी शासन की स्थापना चाहते हैं) के जोरदार नारे लग रहे हैं.
एक तस्वीर में दिखाया गया है कि पट्टिका के ऊपरी दाहिने हिस्से पर उकेरा गया वक्फ बोर्ड का लोगो और बीच में अरबी में कुरान की पहली आयत ‘बिस्मिल्लाह-उर-रहमान-उर-रहीम’, उन लोगों के नामों के साथ बरकरार हैं, जो तोड़फोड़ की घटना के बाद बुधवार को पुनः उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे.
सोशल मीडिया पर फोटो प्रसारित होने के तुरंत बाद सादिक ने एक्स से कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा सख्त मना है और यह सबसे बड़ा पाप है.
मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार सादिक ने कहा, ‘हमारे ईमान की बुनियाद तौहीद है. हज़रतबल दरगाह पर एक मूर्ति स्थापित करना इसी आस्था के ख़िलाफ़ है. पवित्र स्थलों में सिर्फ़ तौहीद की पवित्रता झलकनी चाहिए, और कुछ नहीं.’
पलटवार करते हुए अंद्राबी ने आरोप लगाया कि तोड़फोड़ में शामिल लोग सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता थे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की.
‘आतंकवादी जंगलों में नहीं छिपे हैं. वे (नियंत्रण रेखा) पार से नहीं आ रहे हैं. ये वही आतंकवादी हैं जिन्होंने पत्थरों से प्रतीक चिन्ह तोड़ा है. उन्हें ढूंढो और उन पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज करो. वे शांति भंग कर रहे हैं. हमने बिना किसी राजनीति के दरगाह खोली. अगर पट्टिका पर उमर अब्दुल्ला का नाम होता, तो क्या वे अलग तरह से काम करते?’
पीएसए या जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम एक विवादास्पद कानून है जिसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ‘कानूनविहीन कानून’ बताया है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को दो साल तक निवारक हिरासत में रखा जा सकता है.
सत्तारूढ़ पार्टी पर तोड़फोड़ की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए अंद्राबी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता जम्मू-कश्मीर में धार्मिक स्थलों और मस्जिदों के जीर्णोद्धार के लिए वक्फ बोर्ड द्वारा किए गए काम को पचा नहीं पा रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘ट्वीट पोस्ट करने वाले विधानसभा सदस्य (सादिक) के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. इससे साफ पता चलता है कि वे (दोषी) उनके करीबी थे.’ उन्होंने आगे कहा कि उन्हें तोड़फोड़ की आशंका थी और उन्होंने घटना से पहले ही पुलिस को इस बारे में बता दिया था.
द वायर श्रीनगर पुलिस से तुरंत संपर्क नहीं कर पाया कि क्या इस घटना को रोकने के लिए कोई सुरक्षा उपाय किए गए थे. यह भी पता नहीं चल पाया कि अब तक कोई मामला दर्ज किया गया है या नहीं.
श्रीनगर से लोकसभा सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ‘आत्म-प्रशंसा के लिए धार्मिक संवेदनशीलता के साथ खेलने का खतरनाक प्रयास किया है.’
हज़रतबल दरगाह को लेकर छिड़ी जंग खुलकर सामने आ गई
अंद्राबी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच तनातनी ने श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक दरगाह पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष को खुलकर सामने ला दिया है, जो पारंपरिक रूप से सत्तारूढ़ पार्टी का शक्ति केंद्र रहा है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला, जो अपनी वाक पटुता के लिए जाने जाते हैं, अक्सर इसके मंच से धर्म और राजनीति का मिश्रण वाले भाषण देते हैं.
राजनीतिक इतिहासकार हज़रतबल दरगाह से एनसी के संबंधों की जड़ें 1960 के दशक की शुरुआत में हुए उस जन-विद्रोह से जोड़ते हैं जो पवित्र अवशेष की चोरी के बाद भड़क उठा था. माना जाता है कि शेख़ ने इस ऐतिहासिक अवसर का फ़ायदा अपनी पार्टी और एक राजनेता के रूप में अपनी छवि, दोनों के लिए उठाया.
श्रीनगर का हजरतबल विधानसभा क्षेत्र एनसी का गढ़ रहा है, जहां पार्टी ने 2024 के विधानसभा चुनाव सहित लगातार चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है. एनसी अध्यक्ष और उनके बेटे द्वारा नियमित रूप से शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए इस प्रतिष्ठित दरगाह की यात्रा को कई एनसी समर्थक एक संभावित कारक के रूप में देखते हैं जो पार्टी को अपने पारंपरिक आधार पर पकड़ बनाए रखने में मदद करता है.
हालांकि, 2019 के बाद, जब भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटा दिया, हज़रतबल दरगाह को लेकर राजनीति गरमा गई. इसके बाद पार्टी का अंद्राबी के नेतृत्व वाले वर्तमान वक्फ प्रशासन के साथ टकराव हुआ.
2024 में अंद्राबी ने दरगाह के मुख्य मौलवी, कमाल-उद-दीन फारूकी को, जिन पर सत्तारूढ़ दल का करीबी होने का आरोप था, पद से हटा दिया और फारूकी की मौजूदगी में इस्लाम स्वीकार करने वाले एक हिंदू व्यक्ति के धर्मांतरण को लेकर हुए विवाद के बाद उन्हें नमाज़ पढ़ाने से रोक दिया.
हालांकि धर्मांतरित व्यक्ति ने श्रीनगर की एक अदालत में गवाही दी कि उस पर फारूकी या अन्य धार्मिक हस्तियों ने इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव नहीं डाला था, फिर भी पूर्व मुख्य मौलवी पर जबरन धर्मांतरण के आरोप लगे थे, एक ऐसा आरोप जिसका उन्होंने कई साक्षात्कारों में बार-बार खंडन किया है.
हाल ही में एनसी-वक्फ विवाद तब सुर्खियों में आया जब मुख्यमंत्री को कथित तौर पर अंद्राबी की मौजूदगी में दरगाह के मुख्य गर्भगृह में जाने से रोक दिया गया, जबकि वहां नवीनीकरण का काम चल रहा था.
हालांकि सत्तारूढ़ दल ने इस घटना से इनकार किया है, लेकिन हज़रतबल के स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्दुल्ला को पुनर्विकसित गर्भगृह की देखने से रोकने के लिए दरगाह की दीवारों पर प्लाईबोर्ड लगाए गए थे, जिसका उद्घाटन बुधवार को अंद्राबी ने किया था.
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