नेपाल: प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने दिया इस्तीफ़ा, प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुसे

नेपाली प्रधानमंत्री के.पी. ओली ने देश में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच मंगलवार (9 सितंबर) को अपना इस्तीफ़ा दे दिया है. इसकी घोषणा प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा की गई है, जिसमें ओली की ओर से राष्ट्रपति को भेजा इस्तीफ़ा सार्वजनिक किया गया है.

नेपाल के काठमांडू में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान टायर जलाए जाने के बाद उठता धुंआ. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच मंगलवार (9 सितंबर) को अपना इस्तीफ़ा दे दिया है. इसकी घोषणा प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा की गई है, जिसमें ओली की ओर से राष्ट्रपति को भेजा इस्तीफ़ा सार्वजनिक किया गया है.

हिमालयन की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को भेजे अपने त्यागपत्र में ओली ने कहा, ‘मैंने संविधान के अनुच्छेद 77 (1) (ए) के अनुसार आज से प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है, ताकि संविधान के अनुसार राजनीतिक समाधान ढूंढा जा सके और देश में उत्पन्न असामान्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए समस्याओं को हल करने के लिए आगे की पहल की जा सके.’

अखबार के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के लगातार दूसरे दिन भी संसद भवन परिसर की दीवार तोड़ दी और अंदर घुस गए.

मालूम हो कि नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन और कथित राजनीतिक भ्रष्टाचार को लेकर राजधानी काठमांडू में ‘जेन ज़ी’ के प्रदर्शन में कई लोगों की मौत के बाद केपी शर्मा ओली आलोचना का सामना कर रहे थे.

प्रधानमंत्री के तौर पर यह ओली का चौथा कार्यकाल था और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक केपी शर्मा ओली का इस्तीफ़ा भी था.

जेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शनों में एक ही दिन के भीतर नेपाल में बड़ी संख्या में हुई मौतों के बाद से ही केपी शर्मा ओली पर इस्तीफ़े का दबाव बढ़ गया था.

उल्लेखनीय है कि नेपाल में तनाव मंगलवार (9 सितंबर) को तब और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने सोमवार दोपहर को लगाए गए कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के घरों और कार्यालयों में आग लगा दी, जिसमें भक्तपुर के बालकोट में ओली का निजी आवास भी शामिल था.

आग के हवाले किए गए अन्य घरों में राष्ट्रपति पौडेल, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक, नेपाली कांग्रेस नेता शेर बहादुर देउबा और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के नेता पुष्प कमल दहल के घर भी शामिल हैं.

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाली विदेश मंत्री आरज़ू देउबा राणा के एक स्कूल में भी आग लगा दी गई.

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आगजनी और तोड़फोड़ की खबरों के बीच नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टरों की मदद से मंत्रियों को उनके घरों से निकालना शुरू कर दिया है.

19 लोगों की मौत और 400 से अधिक घायल

मालूम हो कि सोमवार को पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी के बाद नेपाल में स्थिति और बिगड़ गई, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई थी और 400 से ज़्यादा घायल हो गए थे.

नेपाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतिबंध के बाद शुरू हुए, जो ओली सरकार के ख़िलाफ़ व्यापक असंतोष का संकेत हैं. ओली सरकार पर व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं.

इन स्वतःस्फूर्त विरोध प्रदर्शनों को सरकार के प्रति बढ़ती नाराज़गी, राजनीतिक विफलता और कथित भ्रष्टाचार का नतीजा माना जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि दूसरे दिन भी जारी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र ओली ने पहले मंगलवार शाम को एक सर्वदलीय बैठक की घोषणा की थी.

उन्होंने कहा था, ‘मैं सोमवार को राजधानी और देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद हुई घटनाओं से दुखी हूं. किसी भी प्रकार की हिंसा राष्ट्रहित में नहीं है और हमें शांतिपूर्ण और संवाद-आधारित समाधान निकालना चाहिए.’

प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह संकट को समाप्त करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं.

मंत्रियों ने इस्तीफा दिया, कर्फ्यू लगाया गया

बता दें कि नेपाल में सोमवार को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से तीन मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं.

नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने सोमवार शाम कैबिनेट बैठक के दौरान ओली को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. वहीं, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी और जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

इस बीच मंगलवार को काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर जिलों के विभिन्न इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया था, लेकिन जनता को सड़कों पर उतरने से रोकने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया गया.

ज्ञात हो कि पिछले हफ्ते नेपाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2023 के निर्देशों के अनुसार, उन प्रमुख सोशल मीडिया मंचों को बैन करने का फैसला किया था, जिन्होंने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ पंजीकरण नहीं कराया था.

उस समय मेटा, अल्फाबेट, एक्स, रेडिट और लिंक्डइन जैसी किसी भी बड़ी वैश्विक कंपनी ने मंत्रालय में पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. जबकि दूसरी ओर, टिकटॉक, टेलीग्राम और वाइबर उन चंद प्लेटफॉर्म्स में शामिल थे जिन्होंने पंजीकरण कराया था या पंजीकरण के लिए आवेदन किया था.

हालांकि, मंगलवार को सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटने के बावजूद काठमांडू घाटी के कुछ हिस्सों, जिनमें न्यू बानेश्वर, कलंकी और चापागांव शामिल हैं, में प्रदर्शन जारी रहे, जहां प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगाए और टायरों में आग लगाई.

इस दौरान पुलिस ने संघीय संसद भवन के पास कई गिरफ्तारियां कीं.

तेज़ होते प्रदर्शन के बीच भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य देशों ने संयम बरतने का आग्रह किया

मंगलवार सुबह जारी एक बयान में भारत ने कहा कि वह नेपाल के विरोध प्रदर्शनों में ‘कई युवाओं की जान जाने से बहुत दुखी है’ और आग्रह किया कि इस संकट का समाधान ‘शांतिपूर्ण तरीकों और बातचीत’ के ज़रिए किया जाए.

भारत ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की.

बयान में कहा गया, ‘एक घनिष्ठ मित्र और पड़ोसी होने के नाते, हम आशा करते हैं कि सभी संबंधित पक्ष संयम बरतेंगे और शांतिपूर्ण तरीकों और बातचीत के ज़रिए किसी भी मुद्दे का समाधान करेंगे.’

नेपाल स्थित ऑस्ट्रेलिया, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जापान, कोरिया गणराज्य, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के दूतावासों द्वारा सोमवार शाम एक संयुक्त बयान भी जारी किया गया था.

इस बयान में कहा गया था, ‘हम आज काठमांडू और नेपाल के अन्य हिस्सों में हुई हिंसा से बेहद दुखी हैं, जिसमें प्रदर्शनों के दौरान हुई दुखद जान-माल की हानि भी शामिल है. हम पीड़ितों के परिवारों और सभी प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हैं.’

इस बयान में आगे कहा गया था, ‘हमारी सरकारें शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकारों के प्रति अपने दृढ़ समर्थन की पुष्टि करती हैं. हम सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, आगे तनाव बढ़ने से बचने और इन मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं.’

इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और नेपाल के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय अधिकार संगठनों ने हत्याओं की निंदा की और शीघ्र जांच की मांग की. साथ ही सरकार से सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने का आग्रह किया.

गौरतलब है कि इस बीच नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने कहा है कि काठमांडू घाटी के भीतर प्रतिकूल परिस्थितियों और त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास धुआं उठता देख, हवाईअड्डे को बंद कर दिया गया है.

ये फ़ैसला तत्काल प्रभाव से लागू है.

घरेलू उड़ानें पहले ही स्थगित कर दी गई थीं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित होंगी.