वनतारा की जांच: एसआईटी ने वित्तीय लेन-देन और जानवरों के ट्रांसफर समेत 200 सवाल पूछे

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने जामनगर स्थित अंबानी परिवार के स्वामित्व वाले वनतारा से वित्तीय लेन-देन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानवरों की खरीद और कानूनी अनुपालन पर करीब 200 सवाल पूछे हैं. जांच में सीबीआई, ईडी समेत 16 एजेंसियां शामिल हैं. एसआईटी ने कई राज्यों से जानवरों के ट्रांसफर की भी जांच शुरू की है.

फाइल फोटो-वनतारा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर से लगभग 200 सवाल पूछे हैं. इसमें भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जंगली जानवरों की खरीद और अन्य मामलों से जुड़े सवाल शामिल थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसआईटी ने पिछले हफ्ते वनतारा का तीन दिवसीय दौरा पूरा किया, जो अंबानी परिवार के स्वामित्व वाले इस विवादास्पद ‘चिड़ियाघर’ के संचालन और कामकाज की जांच का हिस्सा था.

सर्वोच्च न्यायालय ने 28 अगस्त को चार सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जे. चेलमेश्वर कर रहे हैं. यह कदम उस समय उठाया गया जब अदालत को दो याचिकाएं मिलीं, जिनमें वनतारा की जांच की मांग की गई थी.

आरोप है कि वनतारा अपने संग्रह के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध रूप से पकड़े गए वन्यजीवों को हासिल करता है. इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य आरोप भी लगाए गए हैं.

अपने आदेश में अदालत ने इन सभी और अन्य पहलुओं की सूची दी थी, जिनकी जांच एसआईटी को करनी है. जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा, इस एसआईटी में उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर हेमंत नगराले और कस्टम्स के अतिरिक्त आयुक्त अनीश गुप्ता भी शामिल हैं.

एसआईटी में जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर हेमंत नगराले और कस्टम्स के अतिरिक्त आयुक्त अनीश गुप्ता भी शामिल हैं.

साइट विज़िट और एसआईटी के सवाल



इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी ने 4 से 6 सितंबर के बीच वंतारा का दौरा किया और ऑन-साइट निरीक्षण किया. हिंदुस्तान टाइम्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान एसआईटी ने केंद्र के मुख्य वित्त अधिकारी, निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात की. रिपोर्ट में एक अज्ञात स्रोत के हवाले से कहा गया कि एसआईटी ने जानवरों के ट्रांसफर, फंडिंग, पशु-चिकित्सा देखभाल और कानूनी मंज़ूरी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की.

इसके अलावा एसआईटी ने बाड़ों, क्वारंटीन सुविधाओं और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निरीक्षण किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1973, चिड़ियाघर नियमों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जा रहा है.

9 सितंबर को खबर आई कि एसआईटी ने वंतारा को प्रबंधन से जुड़े करीब 200 सवालों वाली प्रश्नावली सौंपी है. हिंदुस्तान टाइम्स ने दो अज्ञात स्रोतों का हवाला बताया है कि इस प्रश्नावली में ‘वित्तीय लेन-देन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानवरों की ख़रीद, वन्यजीव और चिड़ियाघर नियमों के अनुपालन, आवास मानकों और अंतरराष्ट्रीय व अंतर्राज्यीय ट्रांसफर की प्रक्रिया’ पर विस्तृत जवाब मांगे गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी ने जांच में मदद के लिए 16 अन्य एजेंसियों को भी शामिल किया है. इनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, कस्टम्स और गुजरात पुलिस शामिल हैं.

बताया जा रहा है कि एसआईटी ने त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और असम के वन और वन्यजीव विभागों के अधिकारियों को भी तलब किया है ताकि इन राज्यों से जामनगर में हाथियों और अन्य प्रजातियों के ट्रांसफर की जांच की जा सके. दो अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि एसआईटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानवरों के ट्रांसफर की भी जांच करेगी.

रिपोर्ट में वनतारा के हवाले से कहा गया है कि वह एसआईटी को ‘पूरी तरह सहयोग’ देगा.

द प्रिंट के मुताबिक, एसआईटी ने वनतारा के अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे उन इंटरनेशनल पार्टनर्स का ब्यौरा दें, जिन्होंने उन्हें वन्यजीव प्रजातियां दान की हैं. द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, संभावना है कि एसआईटी इन दाताओं से भी पूछताछ करेगी.

क्या-क्या आरोप लगे हैं?



एसआईटी को कई शिकायतों की जांच करनी है, जैसे- मौसम और पर्यावरण से जुड़ी स्थितियां, इंडस्ट्रियल ज़ोन के पास होने पर उठे सवाल, निजी शौक या कलेक्शन बनाने, प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रमों, जैव विविधता संसाधनों के इस्तेमाल, पानी और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग, अलग-अलग कानूनों के उल्लंघन, जानवरों या उनके अंगों के व्यापार और वन्यजीवों की तस्करी से जुड़ी बातें. ये सब वो मुद्दे हैं जो याचिकाओं में उल्लिखित खबरों, लेखों, सोशल मीडिया पोस्टों और विभिन्न संस्थाओं की शिकायतों के आधार पर उठाए गए हैं.

पीठ ने यह स्पष्ट किया कि एसआईटी की यह जांच सिर्फ तथ्यों की पड़ताल के लिए है ताकि असली स्थिति सामने लाई जा सके और कोर्ट उसके आधार पर ज़रूरी आदेश दे सके. कोर्ट ने कहा कि यह आदेश न तो याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर उसकी कोई राय है और न ही इससे यह समझा जाए कि किसी वैधानिक संस्था या निजी पक्ष (वनतारा) के कामकाज पर कोई संदेह जताया गया है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि ये दोनों याचिकाएं पूरी तरह अख़बारों में छपी खबरों, सोशल मीडिया पोस्टों और गैर-सरकारी संगठनों व वन्यजीव संगठनों की अलग-अलग शिकायतों पर आधारित हैं. इनमें बहुत व्यापक स्तर के आरोप लगाए गए हैं, जैसे- भारत और विदेश से जानवरों की अवैध खरीद, कैद में जानवरों के साथ दुर्व्यवहार, वित्तीय गड़बड़ियां और मनी लॉन्ड्रिंग आदि.