सोनौली (महराजगंज): नेपाल के हालिया हिंसक आंदोलन के बाद भारत-नेपाल सीमा पर फंसे विमल का कहना था कि बॉर्डर बंदी से सिंगल मोटर वालों को काफी नुकसान हो रहा है. यदि हम 15-20 दिन फंस गए तो हम बर्बाद हो जाएंगे.
नेपाल में ज़ेन-ज़ी आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी के बाद देश में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा के कारण भारत-नेपाल सीमा पर गहरा प्रभाव पड़ा है. नेपाल बॉर्डर पर भारवाहक वाहनों की लंबी कतार लगी है. सीमा से सटे भारतीय बाजारों में सन्नाटा है. सीमित आवाजाही है. दुकानदार खाली बैठें हैं, सरकारी और प्राइवेट वाहनों को यात्री नहीं मिल रहे.
शुक्रवार (11 सितंबर) की रात अंतरिम सरकार के गठन और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने के बाद शनिवार को स्थिति सामान्य होने की तरफ बढ़ रही है लेकिन सभी को बॉर्डर के पूरी तरह खुलने का इंतजार है.
यूपी के महराजगंज जिले का सोनौली बॉर्डर, भारत-नेपाल के बीच करीब 1,700 किलोमीटर लंबी सीमा का एक बड़ा नाका है जहां दोनों देशों से सैकड़ों प्रकार की वस्तुओं का आयात-निर्यात होता है, हजारों लोग आवाजाही करते हैं. बॉर्डर के इस पार सोनौली और नेपाल की तरफ बेलहिया व भैरहवां बाजार लोगों से गुलजार रहता है लेकिन आठ सितंबर से दोनों तरफ सब कुछ ठप हो गया है.
काठमांडू में आंदोलन का दमन
आठ सितंबर को काठमांडू में आंदोलन के बर्बर दमन के दौरान 19 युवाओं की मौत हो गई और 400 से अधिक लोग घायल हो गए थे. अगले दिन नौ सितंबर को हिंसा भड़क गई. भीड़ ने संसद, सुप्रीम कोर्ट, सिंह दरबार, राष्ट्रपति निवास सहित कई सरकारी संस्थानों के अलावा शीर्ष नेताओं के घरों, राजनीतिक दलों के कार्यालयों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, होटलों, डिपार्टमेंटल स्टोर आदि के तोडफोड़ की और उन्हें जला दिया.
देश के कई हिस्सों में भी होटलों, आवासीय परिसरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए. एक दर्जन से अधिक जेलों से 14000 से अधिक कैदी भाग गए. कुछ स्थानों पर भागे कैदियों ने जेल और जिला अदालतों में आगजनी की. अब तक पूरे देश में 51 लोगों की मौत की खबर है.

आठ सितंबर की शाम को नेपाल के रूपंदेही जिले के भैरहवा, बुटवल में कर्फ्यू लगा दिया गया. सोनौली बॉर्डर के पार नेपाल के बेलहिया भंसार कार्यालय को बंद कर दिया गया. नेपाल जा रहे पर्यटकों को रोका जाने लगा. नेपाल जाने वाले मालवाहक ट्रकों को को भी रोक दिया गया जिससे बॉर्डर पर करीब चार किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई.
अगले दिन नौ सितंबर को बेलहिया के भंसार कार्यालय और भैरहवां के मालपोत कार्यालय में आगजनी की गई. भैरहवां में पूर्व गृह मंत्री सर्वेंद्र नाथ शुक्ल , मेयर इश्तियाक खान के घर और पूर्व सांसद प्रमोद यादव के होटल में आगजनी हुई.
भैरहवां में मौर्य होटल और भाट भेटनी सुपर मार्केट को जला दिया गया. रात में महराजगंज जनपद के दूसरे नाके ठूठीबारी के पास नेपाल के एक गांव में पूर्व मंत्री एवं जनता प्रगतिशील पार्टी नेपाल के अध्यक्ष हृदयेश त्रिपाठी और विधायक संतू जायसवाल के घर को जला दिया गया.
इसके बाद से यूपी के महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जिले के नेपाल बॉर्डर के सभी नाकों-सोनौली-बेलहिया, ठूठीबारी-महेशपुर, बढनी-कृष्णा नगर, खुनवां-तौलिहवा आदि को पूरी तरह से बंद कर दिया गया. खुनुवा बॉर्डर पर तो नेपाल के तौलियहवां जेल से भागे 14 कैदी भारत में प्रवेश करते पकड़े गए.
आठ सितंबर के बाद से आज तक नेपाल बॉर्डर पर सामान्य आवाजाही शुरू नहीं हो सकी है. नेपाल में फंसे भारतीय पर्यटकों को आने दिया जा रहा है. इसी तरह भारत से नेपाल जाने वाले नेपाली नागरिकों को उनका पहचान पत्र की जांच करने के बाद जाने दिया जा रहा है.
भारवाहक ट्रकों को 11 सितंबर तक पूरी तरह से रोका गया गया था. शुक्रवार को गैस, तेल और आवश्यक वस्तुओं वाले ट्रकों को जाने दिया गया. बेलहिया और भैरहवां भंसार कार्यालय के जल जाने से उसका काम पूरी तरह से ठप था. अब वहां मैनुअल प्रपत्र तैयार कर फंसे भारवाहक वाहनों को जाने के लिए कहा जा रहा है.
बेलहिया के भंसार कार्यालय के डिपो में 300 से अधिक ट्रक रुके हुए है. शनिवार को आवागमन को और खोला गया है लेकिन आज बॉर्डर पूरी तरह खुल भी जाए तो सामान्य स्थिति बहाल होने में कई दिन लग जाएंगे.

राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर ट्रकों की लंबी कतार
सोनौली से नौतनवा तक 7.6 किलोमीटर तक करीब एक हजार टक आठ सितंबर से ही रुके हुए हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर एक लेन पर ट्रकों की लंबी कतार लगी हुई. इन टकों में कोयला, रूई, मोबिल आयल, प्लास्टिक दाना सहित तमाम तरह की वस्तुएं लदी हैं. कच्चे सामान वाले (आलू-प्याज आदि ) ट्रक स्थानीय गोदामों में टक खाली कर वापस चले गए. कुछ ट्रकों ने स्थानीय मंडियों में सस्ते में कच्चा माल बेच दिया ताकि वे सड़ न जाएं.
सोनौली स्थित सेवा एवं वस्तु कर एवं सीमा शुल्क कार्यालय ( कस्टम आफिस ) के एक सूत्र ने बताया कि सामान्य दिनों में औसतन 400 से 500 मालवाहक वाहनों को सबी औपचारिकताएं पूरी कर क्लीयरेंस दे दिया जाता है और वे नेपाल सीमा में प्रवेश कर जाते हैं. लेकिन अभी तो सब कुछ ठप है. आज कुछ ट्रकों के परिपत्र क्लीयर किए गए हैं.
नौतनवां से सौनौली के रास्ते में दो से ढाई हजार ट्रक ड्राइवर-खलासी सड़क किनारे एक सप्ताह से जिंदगी गुजार रहे हैं. ट्रक के नीचे सो रहे हैं, खाना बना रहे हैं. उनकी जिंदगी कठिन होती जा रही है क्योंकि मांग बढ़ने पर स्थानीय व्यापारियों व फेरीवालों ने सब्जियों , पानी, खा़द्य वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए हैं. ढाबों पर 100 की थाली अब 250 रुपए में मिल रही है.
मोहसिन, सतपाल और आरिफ राजस्थान के अलवर से सिनेटरी सामान लेकर नेपाल जा रहे थे कि बॉर्डर पर फंस गए. मोहसिन 12 सितंबर को सोनौली पहुंचे जबकि सतपाल और आरिफ एक सप्ताह से यहां फंसे हुए हैं. सतनाम ने बताया कि वह छह सितंबर को बॉर्डर पर आ गया था. नेपाल के बेलहिया भंसार पर आवश्यक पेपर भी बन गया था कि बॉर्डर बंद हो गया. अब तो भंसार आफिस भी जल गया. मेरा भी पेपर पता नहीं बचा है कि जल गया है. तीनों को काठमांडू जाना था.

मोहसिन ने बताया कि पार्टी काठमांडू स्थित व्यापारी कह रही है कि नेपाल आओगे तो ट्रक में आग लग सकती है. यहां माहौल खराब है. जहां हो वहीं खड़े रहो.
आरिफ ने कहा कि सात-आठ किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रकों की लाइन लगी है. गनीमत है कि हमारे ट्रक में खराब होने वाला सामान नहीं है. कच्चे माल वाले सोनौली नौतनवा में माल खाली कर वापस जा रहे हैं.
बॉर्डर बंदी से सिंगल मोटर वालों को काफी नुकसान
गोरखपुर के उरुवा के रहने वाले विमल पांडेय तिनसुकिया से आगे मार्गरिटा से कोयला लेकर भैरहवां जा रहे थे लेकिन बॉर्डर बंद होने से नौतनवा-सोनौली के बीच फंसे हैं. शुक्रवार को उनको यहां रुके पांच दिन हो गए. विमल ने बताया कि उनके साथ कोयला लदी सात-आठ ट्रक यहां फंसी है. वह 15 वर्ष से ट्रक चला रहे हैं. पांच वर्ष पहले खुद की ट्रक ले ली. हर महीने 53 हजार की किस्त आती है. पहले ड्राइवर रखा था लेकिन किश्त लायक कमाई न होने पर खुद चलाने लगे.
उन्होंने बताया, ‘यहां सब चीजें महंगी हो गई हैं. आलू 80 रुपए और गोभी 210 रुपए किलो बिक रही है. सौ की दही 250 रुपए में बिक रही है. ढाबे पर 100 की थाली ढाई सौ रुपए में मिल रही है. सबसे अधिक दिक्कत पानी की है. लोग समझते हैं कि कि डाइवर राजा आदमी है लेकिन हम जानते हैं कि हमारी क्या हालत है.’
विमल का कहना था कि कंपनी वाले ट्रकों और उनके ड्राइवरों की बात अलग है लेकिन बॉर्डर बंदी से सिंगल मोटर वालों को काफी नुकसान हो रहा है. यदि 15-20 दिन फंस गए तो हम बर्बाद हो जाएंगे. अफसोस है कि हमारा हाल जानने कोई नहीं आ रहा है.
पीलीभीत के हरीश पाल भिवाडी से मोबिल ऑयल लेकर आठ सितंबर को नेपाल बॉर्डर पर पहुंचे थे. भंसार का कागज बनाने के लिए गए तभी बॉर्डर बंद कर दिया गया. वे कम्पनी का ट्रक चलाते है. वे 18 वर्ष से ट्रक चला रहे हैं.

हरिश कहते हैं, ‘10-11 हजार रुपये महीने मिलते हैं. यहां अधिक दिन रुकना पड़ा तो मालिक रोज का खुराकी का खर्चा भी नहीं देगा. यहां हर चीज महंगा होती जा रही है. पानी की छोटी बाल्टी दस के बजाय 20 रुपए में मिल रही है. दूध का पैकेट 25 रुपए में मिल रहा है जबकि पहले 16 में मिलता था.’
सड़क पर नहा रहे ट्रक ड्राइवर अरशद ने बताया कि वह प्रतापगढ़ के रहने वाले है. गांठ (रुई) लेकर नेपाल के भैरहवां जा रहे थे, लेकिन नेपाल में ‘लफड़ा’ होने के कारण यहां फंस गए.
अरशद ने अपनी दुश्वारी बयां करते हुए कहा, ‘एक सप्ताह हो गया है. देखो कब बॉर्डर खुलता है. यहां तो हर चीज महंगी मिल रही है भाई. मालिक कह रहा है कि वहीं खड़े रहो. वापस नहीं आओ. यहां सब परेशान हैं.’
राजस्थान से प्लास्टिक दाना लेकर आए काड़ा अपने तीन साथियों के साथ ट्रक के नीचे सो रहे थे. वे कहते हैं, ‘पांच दिन हो गए. हम आठ लोग हैं. देखो कब जाने को मिलता है.’
सामान्य दिनों में बॉर्डर पहुंचने वाले ट्रकों को भारत और नेपाल के संबंधित कार्यालयों से 24 से 48 घंटे में क्लीयरेंस मिल जाता है और वे अपने गंतव्य की तरफ चल देते हैं.
बॉर्डर पर ऐसी स्थिति तीसरी बार बनी है: कस्टम अधिकारी
कस्टम के एक अधिकारी याद करते हैं कि बॉर्डर पर ऐसी स्थिति तीसरी बार बनी है. पहली बार राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में नेपाल-भारत की व्यापारिक संधि के खत्म हो जाने पर इसी तरह वाहनों की आवाजाही रूक गई थी.
माओवादी आंदोलन के दौरान भी कई बार ऐसी स्थिति बनी लेकिन उसकी अवधि लंबी नहीं थी. वर्ष 2015 में नेपाल के वर्तमान संविधान के लागू होने को लेकर नेपाल में मधेशियों के आंदोलन और नाखुश भारत सरकार द्वारा की गई ‘नियंत्रित नाकाबंदी’ के समय कोल्हुई से लेकर सोनौली बॉर्डर तक ट्रकों की लंबी कतार लग गई थी. आज एक बार फिर उसी तरह का माहौल है.
सुबह से लेकर रात दस बजे तक बॉर्डर बंद होने का समय सोनौली में खूब गहमागहमी होती है लेकिन आठ सितंबर से पूरा बाजार सन्नाटे में है. लोगों की आवाजाही एकदम नहीं है. रोडवेज की बसे लगभग खाली जा रही है. टैक्सिया 150 से 200 रुपये में भी यात्रियों को गोरखपुर लेकर जाने को तैयार हैं लेकिन उन्हें यात्री नहीं मिल रहे है. सोनौली से नौतनवा तक चलने वाले ई रिक्शा व रिक्शा वाले सड़क किनारे लाइन लगाकर खाली बैठे.
दुकान खुले हुए हैं लेकिन ग्राहक नहीं है. कुकवेयर बेचने वाले एक दुकानदार ने बताया कि वे एक दिन में 40 हजार रुपए तक की बिक्री कर लेते थे लेकिन आज दोपहर दो बजे तक बोहनी भी नहीं हुई है.
उर्वशी रेस्टोरेंट में मिले युवा अंश कपूर हिमाचल प्रदेश में मनाली के पास के रहने वाले हैं. वह चंडीगढ़ के एक कालेज से ग्रेजुएशन कर रहे हैं. वह अपने नेपाली दोस्त के साथ शुक्रवार की सुबह सोनौली बॉर्डर पहुंचे. वह अपने दोस्त के साथ बुटवल उनके घर जाना चाहते थे. उनकी योजना दो-दिन दिन नेपाल घूमकर वापस आने की थी.
लेकिन बॉर्डर पर उनके नेपाली दोस्त को पहचान पत्र चेक कर जाने दिया गया और उन्हें रोक दिया गया कि अभी भारतीय नेपाल नहीं जा सकते. बॉर्डर पर उन्होंने अपने दोस्त को विदा किया और गहरी निराशा के साथ चंडीगढ़ जाने के लिए वापस लौट आए.
(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)
