नई दिल्ली: सशस्त्र संघर्ष का अस्थाई विराम और हथियार छोड़ने की पेशकश करते हुए माओवादी प्रवक्ता अभय द्वारा जारी बयान का पार्टी की तेलंगाना राज्य कमेटी ने खंडन किया है.
‘अभय’ और ‘सोनू’ के नाम से माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल द्वारा जारी एक स्टेटमेंट और एक पत्र क्रमशः 16 और 17 सितंबर को मीडिया और सोशल मीडिया में प्रकाशित हुए हैं. जिसके बाद से पिछले 60 बरसों से चल रहे माओवादी संघर्ष पर पूर्ण विराम लगने के कयास लगाए जा रहे थे.
लेकिन भाकपा (माओवादी) की तेलंगाना राज्य कमेटी के प्रवक्ता जगन ने 19 सितंबर को एक तरह से इन कयासों पर पूर्ण विराम लगा दिया. अभय ने अपने बयान में हथियारबंद संघर्ष को त्यागने और हथियार डालने की जो बात कही थी, उसे जगन ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह उनकी निजी राय है और पार्टी का निर्णय नहीं.
हालांकि, इस मुद्दे पर पार्टी की केंद्रीय कमेटी की ओर से अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है. माओवादी पार्टी के महासचिव बसवराजू की मौत के बाद, जिन तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी के उस पद को लेने की चर्चा चल रही है, उनकी कोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है. दंडकारण्य और बिहार-झारखंड के बाद तेलंगाना कमेटी एक महत्वपूर्ण कमेटी है.
जगन के बयान में उनकी पार्टी के पहले के रुख को दोहराते हुए कहा गया है कि, ‘मार्च 2025 में कुछ लोकतांत्रिक बुद्धिजीवियों ने एक शांति संवाद समिति का गठन किया और प्रस्ताव रखा कि सरकार और माओवादी पार्टी के बीच शांति वार्ता होनी चाहिए. उस प्रस्ताव के जवाब में पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण माहौल में बातचीत हो सकती है – अगर तलाशी अभियान और नरसंहार बंद कर दिए जाएं और सुरक्षा बलों के नए कैंपों का निर्माण रोक दिया जाए.’
अभय के बयान में हथियार छोड़ने के लिए एक महीने का मोहलत मांगने और पार्टी कमेटी के सदस्यों और समर्थकों से ईमेल द्वारा अपनी राय रखने की जो बात रखी गई, उस पर हैरानी जताते हुए तेलंगाना कमेटी के प्रवक्ता ने उसे बेतुका बताया.
ये कहा गया कि कोई भी ज़िम्मेदार पार्टी नेता ऐसे फैसलों को इंटरनेट पर खुलेआम पोस्ट करके हल नहीं तलाशते. वह भी एक ऐसी पार्टी में, जो गोपनीय तरीके से काम करती हो, केंद्रीकृत लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हो, और कठोर दमन का सामना कर रही हो.
जगन ने यह भी कहा कि अगर अभय सशस्त्र आंदोलन को छोड़कर मुख्यधारा में जाना चाहते हैं तो वो ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है बशर्ते कि पार्टी कमेटी को सूचित करें और चर्चा करें. इसमें आगे कहा गया, ‘इतने बड़े निर्णय की सार्वजनिक घोषणा करके उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और क्रांतिकारी खेमे में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी.’
कुल मिलाकर, तेलुगु भाषा में जारी जगन के बयान का सारांश यही था कि वे अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने को तैयार हैं और अभय के बयान से वो कोई इत्तेफाक नहीं रखते हैं.
इस बीच, सुरक्षा एजेंसियों ने पुष्टि की है कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केंद्र कमेटी प्रवक्ता अभय के नाम से जारी बयान और ऑडियो मल्लोजुला वेणुगोपाल राव के हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया ने छत्तीसगढ़ पुलिस के महानिरीक्षक पी. सुंदरराज हवाले से रिपोर्ट की है कि इस पर सरकार की प्रतिक्रिया ‘उच्चतम स्तर से आनी चाहिए.’ इस मामले में सर्वोच्च प्राधिकारी केंद्र होगा, और निर्णय संभवत: प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा लिया जाएगा.
सुंदरराज ने कहा, ‘जब तक ऐसा कोई निर्णय नहीं हो जाता, नक्सल-रोधी बल पहले की तरह ही माओवादियों और उनके ठिकानों पर अपने अभियान जारी रखेंगे. सुरक्षा बलों को उनके ‘कोर’ एरिया में माओवादियों के खिलाफ अपने हमले कम करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है.’
