नई दिल्ली: हरियाणा के दलित आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में मंगलवार (14 अक्टूबर) को एक नया मोड़ आया, जब रोहतक में तैनात एक सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) ने भी कथित तौर पर आत्महत्या कर ली.
मृतक एएसआई संदीप कुमार ने एक सुसाइड नोट और एक वीडियो छोड़ा है, जिसमें उन्होंने पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. इस वीडियो ने पहले से विवादों में घिरे इस मामले को और भी पेचीदा बना दिया है.
इस बीच, चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत में याचिका दायर कर पूरन कुमार के शव का पोस्टमार्टम कराने और उनकी लैपटॉप को जांच में शामिल करने की अनुमति मांगी है. हालांकि, अधिकारी के परिवार ने अपनी लंबित मांगें पूरी न होने तक न पोस्टमार्टम की अनुमति दी है और न ही लैपटॉप सौंपने को तैयार हैं.
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए रोहतक के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुरेंद्र सिंह भोरिया ने मृतक एएसआई को मेहनती और ईमानदार बताया और कहा कि मामले की जांच जारी है.
इस घटना ने 7 अक्टूबर को हुई आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार की आत्महत्या की घटनाओं की कड़ी को फिर से उलझा दिया है.
पूरन कुमार की मौत से एक दिन पहले तत्कालीन एसपी नरेंद्र बिजारनिया के कार्यकाल में रोहतक पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल सुशील कुमार को गिरफ्तार किया था. उस पर आरोप था कि उसने एक स्थानीय शराब व्यापारी से पूरन कुमार के नाम पर रिश्वत मांगी थी.
बिजारनिया ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि सुशील ने पूरन कुमार के नाम पर रिश्वत मांगी थी और उन्होंने पूरन कुमार के नाम पर पैसे लेने की बात को स्वीकारा भी था.
उधर पूरन कुमार के परिवार का आरोप है कि यह रिश्वत वाली घटना उनके खिलाफ रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शत्रुजीत कपूर और एसपी बिजारनिया शामिल थे और इसी साजिश के चलते कुमार ने आत्महत्या की.
लेकिन एएसआई संदीप ने अपनी कथित आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में दावा किया है कि कपूर और बिजारनिया दोनों ईमानदार अधिकारी हैं.
इसके उलट, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिस अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त थे, अपने सहयोगियों को परेशान करते थे और ईमानदार अफसरों पर अत्याचार करते थे. यहां पर उनका सीधा इशारा पूरन कुमार की ओर था.
वीडियो में संदीप कहते सुनाई देते हैं, ‘कभी-कभी किसी को देश को जगाने के लिए अपनी जान देनी पड़ती है.’ उन्होंने पूरन कुमार और उनके परिवार की संपत्तियों की जांच की भी मांग की.’
संदीप का यह भी दावा था कि पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद वे दबाव में थे, और इसी डर से उन्होंने आत्महत्या की.. न कि किसी सामाजिक भेदभाव या जातीय उत्पीड़न के कारण.. जैसा कि उनके सुसाइड नोट में लिखा गया था.
इसी बीच, वाई. पूरन कुमार न्याय मोर्चा के सचिव मुकेश कुमार ने द वायर से कहा कि यह नया घटनाक्रम कुमार के लिए न्याय की मांग को भटकाने की कोशिश लगती है.
उन्होंने कहा, ‘हमें एएसआई संदीप कुमार की मौत का उतना ही दुख है जितना पूरन कुमार की मौत का है. हम मांग करते हैं कि एएसआई की मौत की भी निष्पक्ष जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके.’
सोमवार देर रात हरियाणा सरकार ने डीजीपी कपूर को छुट्टी पर भेज दिया और ओपी सिंह को कार्यभार सौंप दिया है.
इस पर मुकेश ने कहा, ‘डीजीपी को छुट्टी पर भेजना या रोहतक के एसपी का तबादला करना सिर्फ दिखावा है. उन्हें निलंबित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए. हम न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे.’
चंडीगढ़ पुलिस ने मंगलवार (14 अक्टूबर) को स्थानीय अदालत में पूरन कुमार के पोस्टमार्टम की अनुमति के लिए याचिका दायर की है. अदालत ने इस पर मृतक अधिकारी के परिवार से जवाब मांगा है, जिसके बाद फैसला लिया जाएगा.
पुलिस का कहना है कि सबूत सुरक्षित रखने और जांच को आगे बढ़ाने के लिए इस चरण पर पोस्टमार्टम बेहद ज़रूरी है.
आठ दिन बीत जाने के बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका है क्योंकि परिवार अपनी मांगें पूरी होने तक इसकी अनुमति देने से इनकार कर रहा है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सरकार और पुलिस दोनों ने परिवार को मनाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहने पर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया गया है.
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सबूत नष्ट होने की आशंका हो, तब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस परिवार की अनुमति के बिना भी पोस्टमार्टम कर सकती है.
अगर आप या आपका कोई परिचित आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो कृपया उनकी मदद के लिए संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन आत्महत्या-रोधी हेल्पलाइन नंबरों की सूची उपलब्ध कराता है जहां गोपनीय तौर पर बात चीत की जाती है. टीआईएसएस द्वारा संचालित ‘iCall’ पर देशभर के प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की लिस्ट भी मौजूद है. या आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
