नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. उन्होंने इसी सप्ताह इससे पहले दिए गए अपने बयान को दोहराया है जिसका अभी तक नई दिल्ली ने पूरी तरह खंडन नहीं किया है.
17 अक्टूबर को ह्वाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ लंच के दौरान पत्रकारों से बातचीत के समय ट्रंप से रूस के मुख्य तेल खरीदारों के बारे में सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि भारत रूस से तेल नहीं लेगा.
‘आपने भारत और हंगरी का ज़िक्र किया? दिलचस्प कॉम्बिनेशन! खैर, भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और हंगरी एक तरह से फंसा हुआ है क्योंकि उनके पास एक पाइपलाइन है जो सालों से वहां है. और उनके यहां समंदर नहीं है. और मैंने हंगरी के बहुत बड़े नेता से बात की और वे – आप जानते हैं, उनके लिए तेल पाना बहुत मुश्किल है.’
ट्रंप ने आगे जोड़ा, ‘भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. और उन्होंने पहले ही शुरुआत कर दी है, और कमोबेश रुक भी गए हैं. वे पीछे हट रहे हैं. उन्होंने लगभग 38% तेल खरीदा है और अब वे ऐसा नहीं करेंगे.’
ज़ेलेंस्की के साथ 17 अक्टूबर के कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने फिर कहा कि वे ‘जंग खत्म करने’ के लिए काम कर रहे हैं. उनके अनुसार, उन्होंने एक दिन पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर हुई बातचीत में ऐसा कहा था.
‘बड़ा कदम’
उल्लेखनीय है कि यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा पत्रकारों को दिए गए उस बयान के दो दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल आयात बंद कर देगा. ट्रंप ने 15 अक्टूबर को इसे ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ बताते हुए कहा, ‘मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि भारत रूस से तेल खरीद रहा था, और उन्होंने आज मुझसे आश्वासन दिया कि अब वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह एक बड़ा कदम है.’
उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि यह बदलाव ‘तुरंत नहीं किया जा सकता’ बल्कि एक ‘प्रक्रिया’ के तहत ऐसा किया जाएगा. उन्होंने जोड़ा था कि ‘यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी.’
इन टिप्पणियों के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने सावधानीपूर्वक शब्दों में प्रतिक्रिया जारी की, जिसमें न तो ट्रंप के रूसी तेल न खरीदने के दावे की पुष्टि की गई और न ही खंडन किया गया, बल्कि कहा गया कि नई दिल्ली पहले से ही अपने स्रोतों में ‘विविधता ला रही है. ‘
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 अक्टूबर को कहा, ‘ऊर्जा कीमत की स्थिर रखना और आपूर्ति सुनिश्चित करना, हमारी ऊर्जा नीति के दो लक्ष्य हैं. इसमें हमारी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को व्यापक बनाने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विविधता लाने का प्रयास शामिल है.’
बाद में, ह्वाइट हाउस ने कहा कि भारत ने अपनी रूसी तेल की ख़रीद को आधा कर दिया है, हालांकि भारतीय अधिकारियों ने ऐसी किसी भी कमी से इनकार किया.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ह्वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत ‘अच्छी’ रही और भारतीय रिफ़ाइनर ‘पहले ही रूसी तेल आयात में 50% की कटौती कर रहे हैं.’
हालांकि, भारतीय उद्योग सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सरकार की ओर से रूसी आयात कम करने का कोई निर्देश नहीं मिला है और रिफ़ाइनर पहले ही नवंबर और दिसंबर के कार्गो के लिए ऑर्डर दे चुके हैं, इसलिए ‘कोई भी कटौती दिसंबर या जनवरी के आयात आंकड़ों में दिखाई दे सकती है.’
उधर अपने बयान में जायसवाल ने अमेरिका का जिक्र करते हुए कहा, ‘जहां तक अमेरिका का संबंध है, हम कई सालों से अपनी ऊर्जा खरीद को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. यह पिछले दशक में लगातार आगे बढ़ा है. वर्तमान सरकार ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को गहरा करने में रुचि दिखाई है. चर्चा जारी है.’
उसी शाम मंत्रालय की नियमित मीडिया ब्रीफिंग में जायसवाल ने केवल इस बात की पुष्टि की कि जिस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत हुई थी, उस दिन उनके बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई थी. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप अपने सवालों के लिए उस विशेष बयान को देखें… कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई बातचीत हुई थी या कॉल हुई थी. मुझे कल दोनों नेताओं के बीच हुई किसी बातचीत की जानकारी नहीं है.’
भारत सरकार ने शुक्रवार को ट्रंप की ताज़ा टिप्पणियों पर कोई नई प्रतिक्रिया जारी दी है.
आधिकारिक बयानों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच आखिरी बातचीत 9 अक्टूबर को हुई थी, जब मोदी ने गाजा युद्धविराम समझौते पर ट्रंप को बधाई दी थी और व्यापार वार्ता पर चर्चा की थी.
कांग्रेस ने कहा- भारत की तरफ से ट्रंप ले रहे हैं फैसले
ट्रंप के दावों की भारत में भी राजनीतिक आलोचना हुई है. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को ‘यह फैसला लेने और घोषणा करने दी कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा’ और सार्वजनिक रूप से उनका खंडन करने में विफल रहे.
उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने ‘महत्वपूर्ण फैसले अमेरिका को सौंप दिए हैं.’
शुक्रवार को ट्रंप की टिप्पणी के बाद कांग्रेस पार्टी ने आलोचना करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री पर अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत की ओर से बोलने देने का आरोप लगाया.
एक्स पर एक पोस्ट में पार्टी ने कहा कि ‘ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति के सामने भारत की ओर से फैसला ले लिया. ट्रंप ने ऐलान किया- ‘भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा.’ आखिर नरेंद्र मोदी ने भारत के फैसले लेने का हक ट्रंप को क्यों दे दिया है? सीजफायर से लेकर रूस से तेल ना खरीदने का फैसला ट्रंप क्यों कर रहे हैं? यह देश का अपमान है.’
गौरतलब है कि शुक्रवार को ह्वाइट हाउस के इसी कार्यक्रम में ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान का भी ज़िक्र किया और उन पुराने विवादों के बारे में बात की, जिन्हें सुलझाने का दावा वह करते रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘मैंने आठ युद्ध सुलझाए. रवांडा और कांगो जाकर भारत और पाकिस्तान के बारे में बात करें. थाईलैंड को देखिए. उन सभी युद्धों को देखिए जिन्हें हमने सुलझाया है.’
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि उन्होंने ‘पाकिस्तान के मामले में दखल देकर लाखों लोगों की जान बचाई है.’ ट्रंप ने यह जोड़ते हुए कि भारत-पाकिस्तान टकराव ‘दो परमाणु संपन्न राष्ट्रों के बीच ख़राब संघर्ष होता’, इस संघर्ष में मध्यस्थता करने को अपनी पिछली सफलता का एक उदाहरण बताया.
ज्ञात हो कि ट्रंप बार-बार दावा करते रहे हैं कि उन्होंने इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चली झड़प के बाद युद्धविराम में मध्यस्थता की थी. पाकिस्तान ने उनके दावों का समर्थन किया है, जबकि भारत ने केवल यही कहा है कि दोनों सेनाओं के बीच बातचीत के कारण ही युद्धविराम रुका है.
