नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने शनिवार (25 अक्टूबर) को कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा लाए जा रहे ‘लव जिहाद’ के खिलाफ प्रस्तावित कानून में पुरुष आरोपी के माता-पिता को गिरफ्तार करने का प्रावधान शामिल होगा.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह की शुरुआत में हुई कैबिनेट बैठक के बाद शर्मा ने कहा कि असम विधानसभा के अगले सत्र में बहुविवाह विरोधी उपायों और लव-जिहाद पर कानून सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे.
इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को कहा था, ‘हम अपनी महिलाओं को ऐसे जाल से बचाना चाहते हैं, जहां वे लव-जिहाद और बहुविवाह का शिकार हो जाती हैं. हम कड़े कानून ला रहे हैं और लव-जिहाद के मामलों में आरोपी पुरुष के माता-पिता भी नए कानून के तहत गिरफ़्तार किए जा सकेंगे.’
असम में शर्मा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार विधानसभा के अगले सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी, जिनमें बहुविवाह विरोधी उपाय और ‘लव-जिहाद’ पर कानून शामिल हैं.
प्रस्तावित बहुविवाह विरोधी कानून के बारे में बोलते हुए सीएम ने कहा कि कई पुरुष कई बार शादी करके महिलाओं को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाते हैं.
उन्होंने कहा, ‘नए कानून के तहत, अगर कोई पुरुष एक से ज़्यादा महिलाओं से शादी करता है, तो उसे सात साल तक की कैद हो सकती है.’
शर्मा ने यह टिप्पणी कछार ज़िले में महिला सशक्तिकरण योजना के चेक वितरण समारोह में की. उन्होंने आगे कहा था कि तीन से ज़्यादा बच्चों को जन्म देने वाली महिलाएं ऐसी सरकारी योजनाओं के लिए पात्र नहीं होंगी.
सीएम हिमंता के अनुसार, ‘कुछ लोग कहते हैं कि अल्लाह उन्हें बच्चे देता है, इसलिए वे जन्म देना बंद नहीं कर सकतीं. मैं कहता हूं, जितनी चाहो उतने बच्चे पैदा करो, लेकिन बच्चों की परवरिश या सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए सरकारी मदद की उम्मीद मत रखो.’
उल्लेखनीय है कि तथाकथित ‘लव जिहाद’ शब्द हिंदुत्ववादी समूहों द्वारा इजाद किया गया है, जिसका मकसद उनके अनुसार हिंदू लड़कियों का मुस्लिम समाज में शादी होने से रोकना है. ऐसा करने के पीछे वे दलील देते हैं कि मुस्लिम युवक साजिश के तहत हिंदू लड़कियों से शादी कर उनका धर्म परिवर्तन करा रहे हैं और इसके लिए विदेशी फंडिंग भी होती है.
उनका दावा यह भी रहता है कि इस तरह के धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम, हिंदुओं को इस देश में अल्पसंख्यक बनाना चाह रहे हैं.
‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2009 में सनातन प्रभात और हिंदू जनजागृति समिति द्वारा एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी के तौर पर किया गया था, जिसे बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद ने भी अपना लिया. 2014 के बाद यह विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारों का केंद्रीय एजेंडा बन गया. अब तक गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा ऐसे प्रमुख राज्यों में शामिल हैं जहां इसे लेकर कानून बनाया गया है.
हालांकि कभी-कभार मीडिया में ऐसे विवाहोंऔर उनसे जुड़े विवादों की खबरें आती रहती हैं, लेकिन ऐसे मामलों की संख्या का कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. हालांकि दक्षिणपंथी समूह यह सुनिश्चित करते रहे हैं कि ‘लव जिहाद’ के झूठे हौवे पर गिरफ्तारियां भी होती रहें.
गौरतलब है कि साल 2020 में तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ शब्द को मौजूदा कानूनों के तहत परिभाषित नहीं किया गया है और तब तक ‘लव जिहाद’ का कोई मामला केंद्रीय एजेंसियों द्वारा नहीं बताया गया था.
शर्मा की मेधा पाटकर को चेतावनी
उल्लेखनीय है कि गायक जुबीन गर्ग की मौत की जांच और राज्य के बेदखली अभियान पर कार्यकर्ता मेधा पाटकर की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहरी लोग असम के मूल निवासियों की पीड़ा को नहीं समझते हैं और उन्होंने उनसे हस्तक्षेप करने से बचने का आग्रह किया.
उन्होंने आगे कहा, ‘एक समुदाय हमारी ज़मीन हड़पने की कोशिश कर रहा है और लव जिहाद जैसी चालों के ज़रिए हमारी बहनों को छीनने की कोशिश कर रहा है. मेधा पाटकर जैसे लोग इसे नहीं देखेंगे. अगर वह बेदखली का विरोध करने यहां आती हैं, तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे.’
गौरतलब है कि इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा था कि सरकार राज्य में ‘मिया’ की आबादी को कम करने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पेश करने की योजना बना रही है. उन्होंने दावा किया था कि अगली जनगणना में यह सबसे बड़ा समुदाय बनकर उभरेगा.
ज्ञात हो कि ‘मिया’ मूल रूप से एक अपमानजनक शब्द था, जिसका इस्तेमाल असम में बंगाली मूल के मुसलमानों के लिए किया जाता था. राजनीति के एक धड़े द्वारा उन्हें जातीय और धार्मिक आधार पर कई बार निशाना बनाया गया है.
बांग्ला भाषी मुसलमानों को बनाते रहे हैं निशाना
बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा लगातार बांग्ला भाषी मुसलमानों पर निशाना साधते रहे हैं. मुख्यमंत्री ने पहले दावा किया था कि राज्य के मूल निवासी समुदाय ‘एक धर्म’ के लोगों के ‘आक्रमण’ का सामना कर रहे हैं, जो कथित तौर पर अलग-अलग इलाकों की ज़मीनों पर अतिक्रमण कर उन इलाकों की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश कर रहे हैं.
जुलाई में उन्होंने कहा था कि जनगणना में असमिया की बजाय बंगाली भाषा चुनने वालों से बांग्लादेशियों की पहचान में मदद मिलेगी. यह बात उन्होंने राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग द्वारा बांग्ला को जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में सूचीबद्ध करने की मांग का जवाब देते हुए कहा था.
बीते जुलाई महीने में में धुबरी ज़िला प्रशासन ने धुबरी ज़िले के बिलाशीपारा में असम सरकार द्वारा प्रस्तावित 3,400 मेगावाट के थर्मल पवार प्लांट स्थल पर 2,000 से ज़्यादा मिया मुसलमानों के घरों को गिरा दिया.
जुलाई में शर्मा ने अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ ‘लड़ाई’ को उचित ठहराया था, भले ही वे ‘विदेशी’ न हों, जब उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा था, ‘हमें अपने हक़ के लिए लड़ने से मत रोको. हमारे लिए यह हमारे अस्तित्व की आखिरी लड़ाई है.’
इससे पहले मई में हिमंता के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले ‘मूल निवासियों’ को बंदूक के लाइसेंस देने की योजना लाई थी. इस कदम को उचित ठहराते हुए, शर्मा ने कहा था, ‘बंदूक ज़रूरी है. बंदूक के बिना, आप दक्षिण सलमारा और मनकाचर जैसी जगहों पर कैसे रह पाएंगे? जब आप वहां जाएंगे तो आपको समझ आ जाएगा.’
फरवरी में असम विधानसभा ने 90 वर्षों से चली आ रही मुस्लिम विधायकों को शुक्रवार (जुमे) को नमाज पढ़ने के लिए दिए जाने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्म कर दिया था.
जुलाई 2023 में असम में सब्जियों की बढ़ी कीमतों के लिए ‘मिया’ लोगों को दोषी ठहराने के लिए हिमंता बिस्वा शर्मा की काफी आलोचना की गई थी. उन्होंने कथित तौर पर सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के लिए ‘मिया’ किसानों और व्यापारियों के एकाधिकार को जिम्मेदार ठहराया था. साथ ही असमिया युवाओं से ‘मिया’ को व्यवसाय से बाहर करने के लिए खेती और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को अपनाने का आग्रह किया था.
