नई दिल्ली: दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में सबसे लंबे समय से चल रहे सेमिनारों में से एक को दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देश पर रद्द कर दिया गया, जिसके अधीन यह स्कूल संचालित होता है.
‘जमीन, संपत्ति और लोकतांत्रिक अधिकार’ शीर्षक से आयोजित सेमिनार समाजशास्त्र विभाग की ‘शुक्रवार संगोष्ठी’ श्रृंखला के तहत 31 अक्टूबर को होना था. इसमें वक्ता के तौर पर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की वरिष्ठ फेलो डॉ. नमिता वाही, संवैधानिक परिवर्तनों और संपत्ति के अधिकार की न्यायिक व्याख्याओं पर बोलने वाली थीं.
कार्यक्रम को रद्द करने का निर्देश कुलपति योगेश सिंह और रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने दिया था. हालांकि, फैकल्टी सदस्यों का दावा है कि रद्द करने का कोई औपचारिक कारण नहीं बताया गया है.
द वायर ने कुलपति सिंह, रजिस्ट्रार गुप्ता, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान अनुसंधान के डीन उज्ज्वल सिंह और समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष अनुजा अग्रवाल को पत्र लिखा है. इनमें से किसी के भी जवाब ख़बर लिखने तक नहीं मिले हैं. जवाब आने पर इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.
समाजशास्त्री नंदिनी सुंदर, जो डीएसई में कार्यरत हैं और संगोष्ठी की संयोजक हैं, ने सोशल मीडिया पर अपनी असहमति दर्ज कराई.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘चूंकि मैं अब शोध संगोष्ठी की बौद्धिक अखंडता की गारंटी नहीं दे सकती और यह कि इसे अंतिम समय में मनमाने ढंग से रद्द नहीं किया जाएगा, इसलिए मैंने संगोष्ठी की संयोजक के पद से इस्तीफा दे दिया है.’
सुंदर ने आगे दावा किया कि कार्यक्रम बिना कोई औपचारिक कारण बताए रद्द कर दिया गया. उन्होंने अपने सोशल मीडिया नोट में आगे लिखा, ‘रद्द करने का कोई कारण, लिखित या अन्य तरीके से नहीं बताया गया, इसलिए हम केवल अनुमान लगा सकते हैं कि आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार भूमि और लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी चर्चा से डरती है.’
शुक्रवार संगोष्ठी को दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स विभाग की सबसे पुरानी शैक्षणिक परंपराओं में से एक बताते हुए उन्होंने कहा, ‘आपातकाल के दौरान और विभाग की स्थापना के बाद से सभी अन्य दशकों में स्वतंत्र रूप से कार्य करती रही है.’
उन्होंने लिखा, ‘यह संगोष्ठी किसी भी अन्य रद्द किए गए सेमिनार की तरह नहीं है – दुर्भाग्य से पिछले एक दशक में हम इससे अभ्यस्त हो गए हैं. यह हमारे शिक्षण अभ्यास का हिस्सा था और स्नातक छात्रों के लिए इसमें भाग लेना अनिवार्य था. यह गंभीर चर्चा का एक मंच था जहां हमारे छात्रों ने कुछ बहुत ही प्रतिभाशाली लोगों के साथ बातचीत की, और वक्ता हमारे छात्रों की गुणवत्ता से प्रभावित हुए.’
